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चीन की सहमति के बिना भी लग सकता है मसूद अज़हर पर प्रतिबंध: UNSC सदस्य देशों ने दिया अल्टीमेटम

चीन को 23 अप्रैल तक का समय दिया गया है कि वह इस पर से अपना होल्ड हटा ले नहीं तो 1267 को बायपास करते हुए एक नया प्रस्ताव लाया जाएगा। यह भी बताया जा रहा है कि ऐसा एक प्रस्ताव अनौपचारिक रूप से सभी 15 सदस्य देशों के बीच सर्कुलेट किया जा रहा है।

पाकिस्तान की मुसीबत बढ़ने वाली है, साथ ही चीन पर दबाव भी उतनी ही तेजी से बढ़ाया जा रहा है। यह सब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैश-ए-मुहम्मद सरगना मसूद अज़हर पर प्रतिबंध लगाने के भारत के प्रयासों का हिस्सा है। इसे भारतीय कूटनीति की विजय के रूप में देखा जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मसूद अज़हर पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए प्रस्ताव लाने वाले US, UK और फ्रांस ने चीन पर दबाव डाला है कि वह रेसोलुशन UNSC-1267 से तकनीकी रोक एक-दो सप्ताह में हटाए। यदि चीन ऐसा नहीं करता है तो चीन को मसूद अजहर पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए काउंसिल में दूसरे प्रस्ताव का सामना करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे मामले पर एक विदेशी डिप्लोमेट ने कहा कि चीन को 23 अप्रैल तक का समय दिया गया है कि वह इस पर से रोक हटा ले नहीं तो 1267 को दरकिनार करते हुए एक नया प्रस्ताव लाया जाएगा। यह भी बताया जा रहा है कि ऐसा एक प्रस्ताव अनौपचारिक रूप से सभी 15 सदस्य देशों के बीच सर्कुलेट किया जा रहा है, इस आशय के साथ कि चीन इससे दबाव में आकर आतंकी सरगना मसूद अज़हर पर अपने स्टैंड पर पुनर्विचार करे।

हालाँकि, अभी तक ऐसे संकेत नहीं मिले हैं चीन होल्ड हटाने जा रहा है। बता दें कि मौजूदा हालात में चीन पर कई तरह से दबाव बनाया जा रहा है ताकि मसूद पर प्रस्ताव पारित करा कर उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित किया जा सके। ऐसा करना ज़रूरी है तभी मसूद पर यात्रा प्रतिबन्ध के साथ उसकी संपत्तियों को सीज़ किया जा सकता है।

बता दें कि पुलवामा अटैक के बाद से एक बार फिर मसूद अज़हर पर प्रतिबन्ध के लिए अमेरिका और फ्रांस द्वारा प्रस्ताव लाया गया था। लेकिन चीन की धूर्तता की वजह से पाकिस्तान एक बार फिर मसूद को बचाने में कामयाब रहा। यह चौथी बार है जब चीन ने 1267 प्रस्ताव पर तकनीकी होल्ड लगाकर मसूद अज़हर पर प्रतिबन्ध लगाने में अड़चने पैदा की हैं।

हालाँकि, चीन के बार-बार होल्ड लगाने से तंग आकर अमेरिका अनौपचारिक रूप से प्रतिबन्ध के एक नए प्रस्ताव को सर्कुलेट कर रहा है। जिसमे यह प्रावधान है कि 1267 के बिना भी मसूद पर प्रतिबन्ध लगाया जा सकता है। अब देखना यह है कि भारत की कूटनीति कितने सफल होती है। क्या चीन 23 अप्रैल तक अपने होल्ड पर पुनर्विचार करता है? या अमेरिका, UK और फ्रांस सहित बाकि सदस्य देश नए प्रस्ताव के ज़रिए 1267 को बायपास करते हुए चीन के प्रतिरोध को धता बताते हुए मसूद पर प्रतिबन्ध लगाकर पाकिस्तान के मुँह पर एक और करारा तमाचा देते हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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