चीन-पाक-बांग्लादेश से लगी सीमाओं पर रणनीतिक महत्व की सड़कें बनाने की तैयारी

उरी और पठानकोट हमले के बाद से ही बॉर्डर मैनेजमेंट को दुरुस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय सीमा एक संवेदनशील क्षेत्र होता है जिसका सही प्रबंधन करना शांति और युद्ध दोनों काल में आवश्यक है।

भारत सरकार ने Comprehensive Integrated Border Management के अंतर्गत चीन पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी सीमाओं पर सड़कें बनाने का कार्य आरंभ कर दिया है। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2018-19 में इसका उल्लेख किया है कि विभाग अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर रणनीतिक महत्व की सड़कें बनाने, फ़ेसिंग करने और फ़्लड लाइट लगाने के लिए प्रतिबद्ध है।

CPWD ने भारत के साथ लगने वाली पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश की सीमाओं पर यह सारे कार्य करना प्रारंभ कर दिया है। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2018-19 में ₹490 करोड़ की लागत से कार्य किए जा रहे हैं।

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CPWD को भारत-चीन सीमा पर रणनीतिक महत्व की 44 सड़कें बनाने का कार्यभार सौंपा गया है। यह सड़कें पाँच राज्यों- जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरेंगी।

इसके अतिरिक्त गृह मंत्रालय ने नवंबर 2018 में विभिन्न कार्यों के लिए भारत-पाकिस्तान तथा भारत-बांग्लादेश सीमा पर क्रमशः ₹450 करोड़ और ₹315 करोड़ जारी किए हैं जिसमें से पाकिस्तान सीमा पर फ़्लड लाइट हटाकर LED लाइट लगाने के लिए ₹350 करोड़ दिए गए।

CPWD को भारत-चीन सीमा पर रणनीतिक महत्व की 44 सड़कें बनाने का कार्यभार सौंपा गया है। ‘डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट’ (DPR) के अनुसार इस कार्य के लिए ₹21,040 करोड़ की लागत आएगी। यह सड़कें पाँच राज्यों- जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरेंगी। डीपीआर को अभी सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति से पास होना बाकी है।

इसके अतिरिक्त CPWD, सर्द मौसम में चीन सीमा पर तैनात ITBP के सैनिकों के लिए 96 बॉर्डर आउटपोस्ट पर अत्याधुनिक थर्मल इन्सुलेशन से युक्त परमानेंट इंटीग्रेटेड बिल्डिंग बनाएगी। डीपीआर में इसकी लागत ₹2,500 करोड़ के लगभग आएगी। भारत-पाकिस्तान सीमा पर राजस्थान और पंजाब राज्यों में क्रमशः ₹3,700 और ₹1,750 करोड़ की लागत से लेटरल और एक्सियल सड़कें बनाई जाएँगी।

यह सारे कार्य भारत सरकार की Comprehensive Integrated Border Management योजना को लागू करने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। उरी और पठानकोट हमले के बाद से ही बॉर्डर मैनेजमेंट को दुरुस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय सीमा एक संवेदनशील क्षेत्र होता है जिसका सही प्रबंधन करना शांति और युद्ध, दोनों काल में आवश्यक है। भारत सरकार ने 2015 से अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा को लेकर CIBM योजना को मूर्तरूप देना प्रारंभ कर दिया था।     

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