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₹300 करोड़ की क्रिप्टोकरेंसी के लिए महाराष्ट्र पुलिस के सिपाही ने कारोबारी को अगवा किया: साइबर सेल में रहते हासिल की थी जानकारी

बता दें कि क्रिप्टोकरेंसी एक प्रकार की डिजिटल कैश प्रणाली है। यह एक निजी कंप्यूटर चेन से जुड़ी हुई होती है और कंप्यूटर एल्गोरिदम पर बनी होती है। क्रिप्टोकरेंसी पर किसी भी देश या सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होता है। कई देश इसे लीगल कर चुके हैं।

क्रिप्टोकरेंसी की बढ़ती डिमांड के चलते महाराष्ट्र के पुणे में एक शेयर कारोबारी का अपहरण करने की खबर सामने आई है। हैरानी की बात तो यह है कि यह अपहरण किसी और ने नहीं, ​बल्कि महाराष्ट्र पुलिस (Maharashtra Police) के एक सिपाही ने किया है। पिंपरी चिंचवाड़ के वाकाड थाना पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र पुलिस के सिपाही का नाम दिलीप तुकाराम खंडारे है। वह पुणे में साइबर क्राइम सेल के साथ भी काम कर चुका है। जैसे ही उसे जानकारी मिली कि शेयर कारोबारी विनय नाइक के पास 300 करोड़ रुपए की क्रिप्टोकरेंसी (बिटकॉइन) है, उसने 7 अन्य लोगों के साथ मिलकर उसका अपहरण करने की योजना बना ली। इसके बाद आरोपित खंडारे ने अपने साथियों के साथ मिलकर 14 जनवरी को पुणे के एक होटल से विनय का अपहरण कर लिया।

बुधवार (2 फरवरी 2022) को पुणे पुलिस जोन-2 के उपायुक्त (DCP) आनंद भोइटे ने बताया कि शेयर कारोबारी को अगवा करने वाले कॉन्स्टेबल दिलीप तुकाराम खंडारे के साथ सुनील राम शिंदे, वसंत श्याम चव्हाण, फ्रान्सिस टिमोटी डिसूजा, मयूर महेंद्र शिर्के, प्रदीप काशीनाथ काटे, संजय उर्फ निकी राजेश बंसल और शिरीष चंद्रकांत खोत को गिरफ्तार कर लिया गया है।

वहीं, पिंपरी चिंचवाड़ के पुलिस कमिश्नर कृष्ण प्रकाश ने बताया कि कॉन्स्टेबल दिलीप तुकाराम खंडारे ही इस पूरे केस का मास्टरमाइंड है। उसने विनय नाइक के अपहरण के बाद बिटकॉइन (Bitcoin) बेचने की कोशिश भी की थी। वहीं, खंडारे को साल 2019 में 10,000 रुपए का रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था।

बता दें कि क्रिप्टोकरेंसी एक प्रकार की डिजिटल कैश प्रणाली है। यह एक निजी कंप्यूटर चेन से जुड़ी हुई होती है और कंप्यूटर एल्गोरिदम पर बनी होती है। क्रिप्टोकरेंसी पर किसी भी देश या सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होता है। कई देश इसे लीगल कर चुके हैं। क्रिप्टोकरेंसी का आज सबसे आसान और लोकप्रिय तरीका क्रिप्टो एक्सचेंज हैं, जिसके जरिए इसे खरीदना और बेचना आसान हो गया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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