Homeराजनीति'स्पीडब्रेकर' ममता के बंगाल में भाजपा बूथ कार्यालय पर लटकी मिली मज़दूर की लाश

‘स्पीडब्रेकर’ ममता के बंगाल में भाजपा बूथ कार्यालय पर लटकी मिली मज़दूर की लाश

मृतक की पहचान नित्या मंडल के रूप में की गई है, जो वहाँ मज़दूर का काम करता था। पुलिस अभी तक मौत के कारण की पुष्टि नहीं कर पाई है, लेकिन मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।

सिलिगुड़ी में अभी नरेंद्र मोदी की विशाल जनसभा को हुए एक दिन भी नहीं बीता कि वहाँ से आज (अप्रैल 4, 2019) सुबह खबर आ गई कि 42 साल के एक व्यक्ति का शव बीजेपी के बूथ ऑफिस में लटका हुआ मिला है।

मीडिया खबरों के मुताबिक ये घटना म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन वॉर्ड नम्बर 36 में हुई है। मृतक की पहचान नित्या मंडल के रूप में की गई है, जो वहाँ मज़दूर का काम करता था। पुलिस अभी तक मौत के कारण की पुष्टि नहीं कर पाई है, लेकिन मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।

यहाँ बता दें कि कल (अप्रैल 3, 2019) ही पीएम मोदी ने सिलीगुड़ी जनसभा को संबोधित करने के दौरान ममता बनर्जी को राज्य के विकास में ‘स्पीडब्रेकर’ बताया था। और ठीक एक दिन बाद बीजेपी को अपने कार्यालय में मज़दूर की मौत का ऐसा दृश्य देखने को मिल गया।

वैसे तो पश्चिम बंगाल हमेशा से राजनैतिक हिंसा और हत्याओं के कारण खबरों में रहा है। लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल विशेष रूप से भाजपा के खिलाफ गंभीर राजनीतिक हिंसा के लिए जाना गया। इसका हालिया उदाहरण- कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर में भाजपा कार्यकर्ता अपूर्बा चक्रवर्ती को टीएमसी के गुंडों ने बेरहमी से पीटा था। जिसके बाद से चक्रवर्ती की हालत अब भी गंभीर है और वह वर्तमान में उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं।

इतना ही नहीं मालदा में, भाजपा ग्राम पंचायत के सदस्य उत्पाल मंडल के भाई पटानू मंडल को भी टीएमसी के गुंडों ने उनके घर में गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके अलावा टीएमसी के एक अन्य विधायक सोवन चटर्जी और उनके मित्र बैशाखी चटर्जी को भी कथित तौर पर एक बंगले में सिर्फ़ इसलिए कैद रखा गया था क्योंकि उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें थीं। इतना ही नहीं पिछले साल पंचायत के चुनावों में बीजेपी उम्मीदवार की एक गर्भवती रिश्तेदार का टीएमसी के कार्यकर्ताओं द्वारा रेप तक कर दिया गया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -