Tuesday, June 2, 2020
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ग्राउंड रिपोर्ट #2: नमामि गंगे योजना से लौटी काशी की रौनक – सिर्फ अभी का नहीं, 2035 तक का है प्लान

वाराणसी शहर के नालों से 300 मिलियन लीटर प्रतिदिन गंदा पानी गंगा में प्रवाहित होता है। 2035 तक 400 मीलियन लीटर गंदा पानी बाहर निकलेगा। ऐसे में नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा को साफ़ रखने के लिए 2035 तक की है योजना।

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अनुराग आनंद
अनुराग आनंद मूल रूप से (बांका ) बिहार के रहने वाले हैं। बैचलर की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया से पीजी डिप्लोमा इन हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद राजस्थान पत्रिका व दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों में काम किया। अनुराग आनंद को कहानी और कविता लिखने का भी शौक है।

30 जनवरी 2019 जो मेरी बनारस यात्रा का दूसरा दिन था। इससे पहले शाम को अस्सी घाट पर धीरेंद्र और गोरखनाथ ने स्वच्छ व अविरल गंगा के लिए मोदी सरकार की जमकर तारीफ़ की थी। ऐसे में बनारस के लोग जिस नमामि गंगे परियोजना की तारीफ़ कर रहे थे, उसकी वास्तविकता को जानना मेरे लिए कई मायनों में ज़रूरी था।

दूसरे दिन अपने कुछ साथियों  के साथ मैं वाराणसी शहर से कुछ दूरी पर स्थित रमना नाम के एक गाँव में पहुँचा। इस गाँव में नमामि गंगे परियोजना के तहत शहर से निकलकर गंगा में मिलने वाले गंदे पानी को साफ़ करने के लिए एक सीवेज ट्रीमेंट प्लांट (STP) बनाया जा रहा है। रमना में बन रहे इस एसटीपी की कुल क्षमता हर रोज़ 5 करोड़ लीटर गंदे पानी को साफ़ करने की होगी। इस एसटीपी को बनाने का कॉन्ट्रैक्ट ऐसेल इंफ्रा नाम की कंपनी को दी गई है।

रमना में बन रहे सीवेज प्लांट में मेरी मुलाक़ात नमामि गंगा योजना के सीनियर स्पेशलिस्ट पदाधिकारी रजत गुप्ता से हुई। रजत गुप्ता अगले दो दिन बनारस से लेकर प्रयाग तक हमारे साथ रहे। इस आर्टिकल में नमामि गंगे परियोजना के तहत बनारस में मैंने जो कुछ भी देखा, उसका ज़िक्र मैं यहाँ सचित्र करुँगा।

रजत गुप्ता ने मुझे और मेरे साथियों को वाराणसी शहर से निकलने वाले गंदे पानी और उसके साफ़-सफ़ाई के बारे में गहराई से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गंगा के पानी और गंगा घाट को निर्मल बनाने के लिए सरकार ने नमामि गंगे के तहत कई योजनाओं का शुभारंभ किया है। इनमें प्रमुख रूप से सीवेज ट्रीटमेंट, नदी के घाट की सफ़ाई, नदी के किनारे पेड़ों को लगाया जाना, औद्योगिक कचरे का निपटारा, जलीय जीवों की सुरक्षा, गंगा ग्राम आदि के लिए लोगों में जन-जागरुकता अभियान भी चलाया जा रहा है।

रजत गुप्ता व भाजपा नेता वीरेंद्र सचदेवा रमना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में पत्रकारों के साथ

रजत गुप्ता को सुनने के बाद किसी कर्मचारी के कहने पर विश्वास करने के बजाय हमने रमना के अलावा भी कई दूसरे एसटीपी प्लांट पर जाकर उनके दावे की वास्तविकता का पता करना उचित समझा।

यदि आप वाराणसी गए हैं और वरुणा और असि की वर्तमान हालत को आपने देखा होगा तो आपको पता होगा कि यह दोनों ही नदी नाले में बदल चुकी हैं। ऐसे में यह ज़रूरी है कि गंगा में प्रवाहित होने से पहले इन दोनों ही नदी के गंदे पानी को साफ़ किया जाए।

जब मैंने मौके़ पर मौजूद अधिकारियों से पता किया तो उन्होंने बताया कि इन दोनों नदी के पानी को रमना व दिनापुर एसटीपी के ज़रिए साफ किए जाने की योजना है। दिनापुर प्लांट को ट्रायल के लिए शुरू किया जा चुका है जबकि रमना प्लांट को जल्द शुरू करने की योजना है।

सरकारी आँकड़ों के मुताबिक वर्तमान समय में वाराणसी शहर के नालों से 300 मिलियन लीटर प्रतिदिन गंदा पानी गंगा में प्रवाहित होता है। सरकार ने एक अनुमान लगाया है कि 2035 तक शहर से 400 मीलियन लीटर गंदा पानी बाहर निकलेगा। ऐसे में सरकार ने नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा को साफ़ रखने के लिए 2035 तक की योजना बनाई है।

शहर के नाले से दिनापुर STP में जमा होता गंदा पानी

आपका बता दूँ कि गंगा को साफ़ रखने के लिए पूरे वाराणसी शहर को 4 हिस्सों में बाँटा गया है। इन सभी क्षेत्रों में कुल 13 प्रोजेक्ट को शुरू किया गया, जिस पर सरकार द्वारा ₹913.07 करोड़ ख़र्च करने की घोषणा की गई है। वर्तमान समय में वाराणसी एसटीपी प्लांट द्वारा पानी साफ़ करने की क्षमता 102 मीलियन लीटर प्रतिदिन है, जबकि आने वाले समय में इसे 412 मीलियन लीटर तक पहुँचाने की योजना है।

शहर के गंदे पानी को सीवेज तक पहुँचाने के लिए तीन पंपिंग स्टेशन चौकाघाट, फुलवरिया और सरैया में बनाया गया है। इसके अलावा 26 घाटों को ख़ूबसूरत बनाने के लिए नमामि गंगे परियोजना के तहत ₹11.73 करोड़ खर्च करने की घोषणा की गई है।

यही नहीं देश भर में गंगा की सफ़ाई के लिए लोगों को जागरुक भी किया गया है। इसके तहत गंगा के किनारे रहने वाले देश भर के क़रीब 630 लोगों को गंगा प्रहरी के रूप में नियुक्त किया गया है।

इसमें कोई शक़ नहीं कि 2014 के बाद वाराणसी में गंगा के किनारे बैठकर चाय बेचने वालों की आय में वृद्धि हुई है। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि नमामि गंगे परियोजना लागू होने की वजह से गंगा के घाटों से लेकर पानी तक साफ़ दिखने लगा है। देश-विदेश के लोग दशाश्वमेध घाट के अलावा भी दूसरे घाटों पर घूमने के लिए जाने लगे हैं। यही नहीं, पहले गंगा की आरती सिर्फ़ दशाश्वमेध घाट पर होती थी, लेकिन आज के समय में सभी घाटों पर गंगा आरती होने लगी है।

रिपोर्ट के अगले हिस्से में आप प्रयागराज में होने वाले कुंभ व नमामि गंगे परियोजना की सफलता के क़िस्से को पढ़ेंगे। आप जानेंगे कि किस तरह यह कुंभ पिछले कई कुंभ से अलग और ख़ास है। आप यह भी पढ़ेंगे कि कुंभ को स्वच्छ और पवित्र बनाए रखने के लिए सरकार ने किस नई तक़नीक का इस्तेमाल किया है।

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अनुराग आनंद
अनुराग आनंद मूल रूप से (बांका ) बिहार के रहने वाले हैं। बैचलर की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया से पीजी डिप्लोमा इन हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद राजस्थान पत्रिका व दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों में काम किया। अनुराग आनंद को कहानी और कविता लिखने का भी शौक है।

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