Wednesday, April 1, 2020
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जैश पर प्रतिबंध: फ्रांस है भारत के साथ, मसूद अज़हर के भाई व कमांडरों पर भी कसेगी नकेल!

भारत ने ऐसी तमाम कोशिशें की हैं, जिससे जैश के अन्य कमांडरों को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों की सूची में शामिल कराया जा सके। लेकिन भारत की इन कोशिशों में चीन ने हमेशा ही अड़ंगा लगाया है। इस बार भी संशय बरक़रार है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को सबक सिखाने की कोशिशों में भारत को फ्रांस का साथ मिला है। पिछले दिनों फ्रांस सरकार के सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी थी कि संयुक्त राष्ट्र संघ में जैश-ए-मोहम्मद को प्रतिबंधित करने के लिए फ्रांस प्रस्ताव पेश करेगा। इसके अलावा भारत-फ्रांस मिलकर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के ख़िलाफ़ पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।

ख़बरों के अनुसार, जैश के सरगना मसूद अज़हर के साथ-साथ उसके भाई अब्दुल रौफ़ असगर और अन्य जैश कमांडरों के ख़िलाफ़ भी संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रस्ताव पेश किया जा सकता है। बता दें कि जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के साथ पठानकोट हमले के आरोपी असगर को भी प्रतिबंधित करने के लिए सरकार डॉजियर तैयार कर रही है।

फ़िलहाल यह देखना बाक़ी है कि अब्दुल रौफ़ असगर और जैश के अन्य आतंकियों को यूएन के सेक्शन 1267 के तहत प्रतिंबधित सूची में शामिल करने के लिए अलग से प्रस्ताव रखा जाएगा या अज़हर के लिए पेश किए जाने वाले प्रस्ताव में ही उसका नाम शामिल कर लिया जाएगा।

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भारत ने ऐसी तमाम कोशिशें की हैं, जिससे जैश के अन्य कमांडरों को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों की सूची में शामिल कराया जा सके। लेकिन भारत की इन कोशिशों में चीन ने हमेशा ही अड़ंगा लगाया है। इस बार भी संशय बरक़रार है। कहीं ऐसा न हो कि भारत के पक्ष में फ्रांस की कोशिशों में चीन अपनी टांग अड़ा दे।

याद दिला दें कि पिछली बार 2017 में मसूद अज़हर पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर चीन ने ही वीटो लगाया था और कहा था कि ऐसा करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं है। तब भारत ने इसे सेलेक्टिव अप्रोच और डबल स्टैंडर्ड बताकर चीन की आलोचना की थी और कहा था कि इससे आतंकवाद से जंग जीतने की अंतरराष्ट्रीय प्रयास कमज़ोर होते हैं। पुलवामा हमले के बाद भी जैश के प्रमुख मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने में चीन ने ही अपने पाँव पीछे किए थे।

अब यह साफ़ हो चला है कि अगर चीन असगर और अन्य जैश कमांडरों को प्रतिबंधित करने वाले प्रस्ताव के साथ भी यही रवैया अपनाता है तो निश्चित तौर पर उसे अंतरराष्ट्रीय शर्मिंदगी झेलनी पड़ेगी। बता दें कि अज़हर का भाई असगर न सिर्फ़ पठानकोट हमले में शामिल था बल्कि वह भारत के ख़िलाफ़ अपने अभियान में अज़हर से भी अधिक प्रभावशाली रहा है। हाल ही में असगर ने भारत पर हमले की बात कही थी। कश्मीर एकजुटता दिवस के दिन असगर ने कहा भी था कि वह भारत को आतंकित करना चाहता है। असगर के अलावा इब्राहिम अतहर और शाहिद लतीफ का नाम प्रतिबंध के लिए प्रस्तावित किया जा सकता है। दोनों ही पठानकोट हमले का आरोपी है।

फ्रांस ने अपने प्रयासों के लिए अन्य यूरोपीय देशों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। वहीं पाकिस्तान ने भी अपने मित्र देशों के साथ मेल-जोल बढ़ा दिया है, जिससे वो फ्रांस की इस पहल में बाधा उत्पन्न कर सके।

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