Friday, November 27, 2020
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‘IAF पायलट अभिनंदन का वापस आना हमारी डिप्लोमेसी की विजय’: अमित शाह

"उरी की घटना के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और अब पुलवामा की घटना के बाद एयर स्ट्राइक से इतना संदेश जरूर गया है कि अब देश में नरेंद्र मोदी की सरकार है। हम अपनी सुरक्षा के प्रति सजग हैं।"

पुलवामा अटैक के बाद भारत की एयर स्ट्राइक, फिर उसके बाद पाकिस्तान की हेकड़ी, फिर पाकिस्तान का बैकफूट पर आना। F-16 की तबाही, भारत के पायलट की कस्टडी और अब उसके सकुशल भारत लौट आने के घटनाक्रम के बीच 1 फरवरी को शुरू हुआ इंडिया टुडे कॉन्क्लेव। इस कॉन्क्लेव में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भारत-पाकिस्तान से जुड़े कई अहम सवालों के साथ ही कई और जरूरी राजनीतिक सवालों के जवाब दिए। प्रस्तुत है, इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में दिए इंटरव्यू के प्रमुख अंश—-

पिछले 72 घंटे में देश ने जो देखा उससे क्या मैसेज गया? क्या अगला पुलवामा नहीं होगा?

उरी की घटना के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और अब पुलवामा की घटना के बाद एयर स्ट्राइक से इतना संदेश जरूर गया है कि अब देश में नरेंद्र मोदी की सरकार है। हम अपनी सुरक्षा के प्रति सजग हैं। हम आतंकवाद के ख़िलाफ़ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाए हुए हैं। विश्व में हमारी इतनी पहचान हो चुकी है कि विश्व हमें सुनता है। पुलवामा के बाद पाकिस्तान दुनिया में अलग-थलग पड़ा है। ये हमारी कूटनीति की विजय है। अगर अभिनंदन इतने कम समय में वापस देश आ रहे हैं तो ये भी हमारी डिप्लोमेसी की विजय है।

इमरान खान कहते हैं सुबूत दीजिए, हम बातचीत को तैयार हैं?

मुझे आश्चर्य है कि इंडिया टुडे क्यों विपक्ष भाषा बोल रहा है। मैं इतना कहता हूँ कि सुबूत की बात बाद में, पुलवामा में जो हुआ पहले उसकी निंदा तो पाकिस्तान का प्रधानमंत्री करे। दो शब्द नहीं बोले कि घटना गलत हुई है। कैसे भरोसा करें हम, मंशा नहीं देंखे हम। जो पहले सुबूत दिए हैं, पहले उस पर कार्रवाई करें पाकिस्तान।

विपक्ष सेना और स्ट्राइक पर राजनीति कर रहे हैं, येदुरप्पा ने कहा 28 में 22 सीटें बातें करने की बात की?

येदुरप्पा ने जो कहा वो उन्हें नहीं कहना चाहिए था। उन्होंने खेद भी जताया है। पर आप लोगों को मनमोहन सिंह का वो बयान नहीं दिखाई दे रहा है। जिसमें वो कहते हैं कि दोनों देशों को संयम बरतना चाहिए, दोनों देशों को पागलपन नहीं करना चाहिए। आप क्या इक्वेट कर रहे हैं, भारत और पाकिस्तान की तुलना हो ही नहीं सकती। एक आतंकवाद फैलाने वाला देश है। एक अपनी आत्मरक्षा में कार्रवाई करने वाला देश है। दोनों को एक प्लैटफॉर्म में कैसे रखा जा सकता है? मीडिया को भी ये दिखाई नहीं पड़ता और क्यों नहीं दिखाई पड़ता? पूरे 3 दिन में पाकिस्तान मीडिया के चेहरे पर मैंने हँसी देखी है तो ये 22 दलों के रेजोल्यूशन के बाद देखी है। ऐसा क्या रिजॉल्व कर दिया कि पाकिस्तान की संसद में, मीडिया में आनंद का वातावरण हैं। जब पूरा विश्व भारत के साथ है, तो यहाँ से क्यों आवाजें निकल रही हैं। हम भी विपक्ष में रहे है। लेकिन, हमने सरकार का हमेशा समर्थन किया है।

26/11 के बाद आपने भी तो फुल पेज एड निकाले थे कि अगर मजबूत सरकार चाहिए तो बीजेपी चुनें?

वो हमने चुनाव के वक्त लगवाया था। घटना के समय नहीं। और ये चुनाव में उठना भी चाहिए, क्या चुनाव में देश की सुरक्षा मुद्दा नहीं होगा? मगर जब घटना हुई तो हमने विरोध नहीं किया, हमारा इतिहास उठा के आप देख लो। हमने 1971 के वक्त क्या स्टैंड लिया था, जनसंघ का स्टैंड 1965 के युद्ध के वक्त देख लीजिए।

विपक्ष पूछता है कि सरकार से सवाल पूछना क्या ऐंटी नेशनल है? अगर पुलवामा अटैक हुआ तो क्या यह इंटेलिजेंस फेलियर नहीं था? बीजेपी और सरकार जवाब दे?

देखिए सवाल पूछने में कोई दिक्कत नहीं है। सवाल पूछने के फोरम होते हैं। पूछने का समय होता है। अभी हमारा जवाब देना भी बाकी है। वो मानते हैं कि हम जवाब देंगे ही नहीं। इसीलिए उन्होंने शुरू से ही पॉलिटिक्स शुरू कर दी। हमारा जवाब देना बाकी है। दुनिया को हमारा तथ्य बताना बाकी है। विदेश विभाग को दुनिया भर से संपर्क करना है। उस वक्त आप सवाल कर रहे हैं? और सवाल क्या कर रहे हैं वो, क्या आपके समय कोई आतंकवादी घटना नहीं हुई? और सवाल तो मैं करता हूँ कि तब आपने जवाब क्यों नहीं दिया? देश की जनता आपसे सवाल पूछती है 26/11 के बाद आपने जवाब क्यों नहीं दिया?

मनमोहन सिंह सरकार मानती थी कि एयर स्ट्राइक से पाकिस्तान नहीं बदलेगा। बातचीत का रास्ता ही ठीक है। उनका कहना है कि आपने भी तो हमला कर लिया तो कौन सा पाकिस्तान बदल गया?

तो बातचीत से भी कौन सा सुधर गया। आपने भी तो 10 साल बातचीत की, क्या एकतरफा मरते जाएँ, क्या रणनीति है ये? हो सकता है मनमोहन सिंह मुझे ज्यादा समझदार हों, मुझसे अच्छा ही सोचते होंगे देश के लिए, पर मैं नहीं समझ पाया कि एक के बाद एक घटनाएँ होती जाएँ और आप बातचीत की बात करते रहो।

बातचीत से (हल) नहीं निकलेगा, एयर स्ट्राइक से नहीं निकलेगा तो निकलेगा कैसे?

ये मुझे नहीं मालूम, मगर आतंकवाद फैलाने वाले, इन पर दबाव, खौफ बढ़ा है कि उन्हें जवाब मिलेगा, एकतरफा नहीं चलेगा। सबसे ज़्यादा आतंकवादी बीजेपी सरकार के दौरान मारे गए हैं।

इस वक्त जो सरकार चला रहे हैं, उनमें नरेंद्र मोदी हैं, अमित शाह हैं, अजीत डोवाल हैं। मगर फिर भी पाकिस्तान में हाफिज सईद, मसूद अजहर खुलेआम जिंदा घूम रहे हैं। ऐसा क्यों?

इतना किया तो ही आप लोग इतने सवाल दाग देते हो। अगर मसूद अजहर पर कुछ ज्यादा किया तो आप लोग क्या करोगे? हमने आतंकवाद को कठोरता से डील किया है। आजादी के बाद से किसी भी सरकार से ज्यादा अच्छा और कठोर रहा है हमारा रुख आतंकवाद के लिए, सबसे ज्यादा आतंकवादी हमारे समय में मारे गए हैं। और हो सकता है कि लोग पूछें कि इससे क्या हासिल हुआ? मैं यही कहना चाहता हूँ कि 20 साल से एक अघोषित युद्ध भारत से लड़ा जा रहा है। आतंकवादियों को आगे करके, ऐसे में इनको जवाब नहीं दिया जाना गलत है।

विपक्ष को लग रहा है कि ये टेंशन सब इसलिए की जा रही है कि चुनाव से पहले लोगों का ध्यान नौकरी, बिजली, सड़क, पानी जैसे मुद्दे से भटकाया जा सके? क्योंकि तीन राज्यों में बीजेपी हार गई है, इसलिए नेशनल सिक्योरिटी को मुद्दा बनाकर लोगों को भटकाया जा रहा है?

विपक्ष का क्या कहना है कि क्या पुलवामा हमने करवाया है? उसके बाद जो हुआ, उस पर सवाल उठ रहे हैं पूछने पर शाह बोले हम तारीख नहीं तय करते हमले की। सिर्फ इतना मैं मानता हूँ कि दो हमलों से उधर पूरा संदेश गया है। हमने शांति का भी मौका दिया था। मगर उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया, उस वक्त भी विपक्ष चीखा था कि क्यों पहुँच गए वहाँ? हम तो आपके बातचीत के प्लान को ही लेकर बढ़े थे, मैं मानता हूँ कि पहले एक बार शांति का प्रयास करना ठीक है, मगर जब वो सुधर ही नहीं रहे तो क्या कर सकते हैं। जवाब देना पड़ेगा और जवाब मोदी जी ने दृढ़ता से दिया है, हमारे सेना के जवानों ने प्रोफेशनली दिया है और वीरता से दिया है और ऐसे ही देंगे।

कश्मीर की समस्या को सुलझाने में पिछले 5 साल में आप ज्यादा कामयाब नहीं रहे?

कोई भी लोकतांत्रिक सरकार या दल ये नहीं मानेगा कि हथियार का उपयोग अंतिम समाधान है। मगर हथियार का उपयोग नहीं करना भी समाधान नहीं है जब सामने से हथियार का उपयोग हो रहा हो। हमें जवाब देना होगा और हम दे रहे हैं।

तो कश्मीर मुद्दा कैसे सॉल्व होगा?

ये इस शो में तो नहीं सॉल्व होगा, एक घंटे में तो नहीं होगा, जो गलतियाँ 1947 के बाद जवाहरलाल नेहरू कर गए। वो यहाँ तो सॉल्व नहीं होगी। इस प्रकार की चीजों पर चर्चा ऐसे प्रोग्रामों में नहीं हो सकती।

आपकी जो सोशल मीडिया फोर्स कहती है कि अगर आप हमारे साथ हो तो देशभक्त हो, विरोधी हो तो ऐंटी नेशनल हो?

आप एयरस्ट्राइक पर सवाल खड़ा करोगे तो देश की जनता जवाब माँगेगी, माँगना भी चाहिए, अगर किसी और पार्टी की सरकार है और वो आतंकवाद के खिलाफ स्टैंड लेती है, मैं उसकी आलोचना करता हूँ तो जनता मुझसे भी जवाब माँगेगी।

प्रियंका गांधी की एंट्री हुई, इससे उत्तर प्रदेश में फर्क पड़ेगा?

जहाँ तक मिसेज वाडरा का राजनीति में एंट्री का सवाल है। तो आपको मालूम नहीं हैं कि वो 12 साल से राजनीति में ही हैं। कई बार कैंपेनिंग कर चुकी हैं। अभी चुनाव हारने के बाद दो साल इधर-उधर बिताएँगे, बाद में कहेंगे री-एंट्री। तो आप कहते रहो। मगर इससे देश की जनता को कोई आस नहीं है। परिवारवाद के दिन समाप्त हो गए हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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