Wednesday, April 21, 2021
Home रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय नेपाल के गरीब किसान के बेटे की मदद को सामने आए भारतीय: IIM-अहमदाबाद में...

नेपाल के गरीब किसान के बेटे की मदद को सामने आए भारतीय: IIM-अहमदाबाद में प्रवेश के लिए फीस भरने में आई कठिनाई

अहमदाबाद स्थित एक एनजीओ ने उन्हें पहले सेमेस्टर की फीस देने में मदद की है। जो इस हफ्ते के अंत से शुरू होने वाला है। अहमदाबाद के उद्यमी पंकज मशरूवाला (जो कृषि व्यवसाय में काम करते हैं) वे भी उनकी मदद के लिए आगे आए हैं। मशरुवाला ने जयसवाल को बताया कि.........

नेपाल के एक गरीब शिक्षक और किसान के 24 वर्षीय बेटे आशिक जयसवाल (Aashik Jayswal) ने कठिनाइयों का सामना करते हुए भारत के एक प्रतिष्ठित इंस्टिट्यूट आईआईएम का एंट्रेंस पास किया। आईआईएम-अहमदाबाद का एंट्रेंस निकलने से आशिक का बरसों पुराना सपना सच हो गया। लेकिन आशिक को कहाँ पता था कि इस सपने में रुकावट अभी आनी बाकी है।

दरअसल, आशिक ने फूड एंड एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट (PGPFABM) के जिस दो वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम में प्रवेश लेना चाहा है। जिसकी फीस बहुत ज्यादा है। कोर्स की इतनी ज्यादा फीस का पता लगते ही आशिक का सपना जैसे कहीं अटक गया।

जयसवाल अपने परिवार के साथ पूर्वी चंपारण में भारत-नेपाल सीमा से लगभग 20 किलोमीटर दूर रहते हैं। जहाँ हर कोई खेती कर अपनी जिंदगी का गुजर करता है। आशिक के पिता एक अस्थायी शिक्षक के रूप में काम करते है। इसके साथ वे खेती भी करते हैं। जयसवाल ने 10 वीं तक की शिक्षा अपने गाँव में पूरी की। जिसके बाद वह अपने बाकी स्कूल ग्रेजुएशन के लिए काठमांडू चले गए। आशिक को भारतीय दूतावास से छात्रवृत्ति प्राप्त हुआ था। ताकि वे प्रयागराज से कृषि में बीएससी की पढ़ाई कर सके।

प्रयागराज में पढ़ाई के दौरान, उन्हें आईआईएम में कृषि में दो वर्षीय पाठ्यक्रम का पता चला। जयसवाल का परिवार भी नेपाल में कृषि से जुड़ा हुआ है। जिसको ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने गाँव की खेती को आगे बढ़ाने का फैसला किया।

आशिक ने बताया, “अपने अंडरग्रेजुएशन के दौरान, मैंने अपने सीनियर्स को कैट के लिए प्रश्नपत्र को हल करने की कोशिश करते हुए देखा था। मुझे मैथ्स के सवाल बहुत पसंद थे। मैं उन्हें बहुत जल्दी हल कर लेता था। मेरे सीनियर्स ने मुझे बताया कि IIMA से कृषि में डिग्री मेरे लिए एमएससी से ज्यादा फायदेमंद होगी। इसलिए मैंने कैट की तैयारी शुरू कर दी।” आशिक ने कैट (कॉमन एडमिशन टेस्ट) की परीक्षा को पास कर लिया। लेकिन परीक्षा को पास करना ही बड़ी बात नहीं थी। असली कठिनाई तो अब शुरू हुई।

जयसवाल एक गरीब परिवार से हैं। उसके लिए आईआईएमए की मोटी फीस भर पाना बहुत बड़ी बात थी। ऑपइंडिया से बात करते हुए आशिका ने कहा, “मैं नेपाल में इमारत की सातवीं मंजिल पर था जब 2015 में आए भूकंप ने देश को तबाह कर दिया था। मैं बिना सैनिटाइजेशन के उपयोग के एक सप्ताह तक जीवित रहा। लेकिन मैंने वहाँ एक बड़ा सबक सीखा। मैंने सीखा कि मैं कठिन से कठिन दौर में भी जीवित रह सकता हूँ।”

जयसवाल ने कहा कि पहले, भारत में उसके रिश्तेदारों ने उसे पैसे की मदद करने का वादा किया था। हालाँकि, चीन से फैले कोरोना वायरस महामारी की वजह से वो लोग मुझे पैसे नहीं दे पाएँ। जयसवाल ने बैंकों से भी उधार लेने की कोशिश की। आशिक का परिवार 0.5 एकड़ आर्द्र भूमि और एक घर का मालिक है और उसके पिता की वार्षिक आय 3 लाख रुपए है।

नेपाल के बैंक आशिक को कोलैटरल के बिना फीस की रकम लोन देने की स्थिति में नहीं है। न ही वहाँ के बैंक उसे सिक्योर्ड लोन दे सकते है। भारतीय नागरिक को आईआईएमए में शिक्षा पूरी करने के लिए मदद की जाती है। लेकिन उसे यह मदद नहीं मिल सकती क्योंकि वह नेपाली है।

जयसवाल ने कहा, “मैं भारतीय बैंकों से ऋण नहीं ले सकता था क्योंकि मैं एक नेपाल नागरिक हूँ। एक गैर-भारतीय के रूप में मैं यहाँ ऋण के लिए पात्र नहीं था। मैं अपनी शिक्षा के लिए लोगों से क्राउडफंडिंग के रूप में पैसे नहीं इकट्ठा करना चाहता हूँ। मैं ऐसे कॉर्पोरेट्स से स्पांसरशिप लेना चाहूँगा, जो कृषि या ऋणों पर विश्वास करते हैं जिन्हें मैं बाद में लिए हुए पैसे लौटा दूँ। लोग दयालु हैं। वे मेरी मदद कर सकते हैं। लेकिन यह महामारी का समय सभी के लिए कठिन है। पैसों की अनिश्चितता बनी हुई है, तो वे जो पैसा आज मुझे दे सकते हैं वह कल उनके काम आ सकता है। इसलिए, मैं अपने मेरिट पर आगे बढ़ना चाहता हूँ। मेरी मदद को आगे आए लोगों की मैं सराहना करता हूँ। लेकिन मैं प्रत्येक व्यक्ति से मदद नहीं ले सकता हूँ।”

जयसवाल ने उन सभी से संपर्क किया है जो उनकी मदद कर सकता हो। जैसे कि- NBFCs, निजी निवेशक, SAARC के पूर्व छात्र । इसके अलावा IIMA के पूर्व छात्र भी उनकी मदद करने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं।

नेपाली नागरिक की मदद के लिए जुटे भारतीय

इस बीच, कुछ मदद मिलनी शुरू हो गई है। अहमदाबाद स्थित एक एनजीओ ने उन्हें पहले सेमेस्टर की फीस देने में मदद की है। जो इस हफ्ते के अंत से शुरू होने वाला है। अहमदाबाद के उद्यमी पंकज मशरूवाला (जो कृषि व्यवसाय में काम करते हैं) वे भी उनकी मदद के लिए आगे आए हैं। मशरुवाला ने जयसवाल को बताया कि 40 साल पहले उनकी भी किसी ने फीस भरने में मदद की थी। उन्होंने वादा किया था कि समय आने पर वह इसका भुगतान करेंगे।

नागपुर के रहने वाले के एस चीमा ने भी बची हुई राशि के लिए जयसवाल को लोन देने की पेशकश की है। वहीं नेपाल के रहने वाले दिवेश बोथरा ने भी उनके साथ संपर्क किया है। जयसवाल की मदद के लिए दिवेश ने अपने नियोक्ताओं से भी बात की है।

गौरतलब है कि फीस की समस्या का आंशिक रूप से समाधान हो गया है। लेकिन जयसवाल को अभी भी दूसरे वर्ष की फीस की व्यवस्था करनी है। वह अभी भी व्यक्तियों, कॉर्पोरेटों और वित्तीय संस्थानों से बात कर रहे है जो उसकी मदद कर सकते हैं।

अगर आप भी इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आशिक जयसवाल की मदद करना चाहते हैं, तो आप उनके इस मेल आईडी aashikjayswal8@gmail.com के जरिए उनसे संपर्क बना सकते हैं।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘गैर मुस्लिम नहीं कर सकते अल्लाह शब्द का इस्तेमाल, किसी अन्य ईश्वर से तुलना गुनाह’: इस्लामी संस्था ने कहा- फतवे के हिसाब से चलें

मलेशिया की एक इस्लामी संस्था ने कहा है कि 'अल्लाह' एक बेहद ही पवित्र शब्द है और इसका इस्तेमाल सिर्फ इस्लाम के लिए और मुस्लिमों द्वारा ही होना चाहिए।

आज वैक्सीन का शोर, फरवरी में था बेकारः कोरोना टीके पर छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेसी सरकार ने ही रचा प्रोपेगेंडा

आज छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री इस बात से नाखुश हैं कि पीएम ने राज्यों को कोरोना वैक्सीन देने की बात नहीं की। लेकिन, फरवरी में वही इसके असर पर सवाल उठा रहे थे।

पंजाब के 1650 गाँव से आएँगे 20000 ‘किसान’, दिल्ली पहुँच करेंगे प्रदर्शनः कोरोना की लहर के बीच एक और तमाशा

संयुक्त किसान मोर्चा ने 'फिर दिल्ली चलो' का नारा दिया है। किसान नेताओं ने कहा कि इस बार अधिकतर प्रदर्शनकारी महिलाएँ होंगी।

हम 1 साल में कितने तैयार हुए? सरकारों की नाकामी के बाद आखिर किस अवतार की बाट जोह रहे हम?

मुफ्त वाई-फाई, मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी से आगे लोगों को सोचने लायक ही नहीं छोड़ती समाजवाद। सरकार के भरोसे हाथ बाँध कर...

मधुबनी: धरोहर नाथ मंदिर में सोए दो साधुओं का गला कुदाल से काटा, ‘लव जिहाद’ का विरोध करने वाले महंत के आश्रम पर हमला

बिहार के मधुबनी जिला स्थित खिरहर गाँव में 2 साधुओं की गला काट हत्या कर दी गई है। इससे पहले पास के ही बिसौली कुटी के महंत के आश्रम पर रात के वक्त हमला हुआ था।

पाकिस्तानी फ्री होकर रहें, इसलिए रेप की गईं बच्चियाँ चुप रहें: महिला सांसद नाज शाह के कारण 60 साल के बुजुर्ग जेल में

"ग्रूमिंग गैंग के शिकार लोग आपकी (सासंद की) नियुक्ति पर खुश होंगे।" - पाकिस्तानी मूल के सांसद नाज शाह ने इस चिट्ठी के आधार पर...

प्रचलित ख़बरें

रेप में नाकाम रहने पर शकील ने बेटी को कर दिया गंजा, जैसे ही बीवी पढ़ने लगती नमाज शुरू कर देता था गंदी हरकतें

मेरठ पुलिस ने शकील को गिरफ्तार किया है। उस पर अपनी ही बेटी ने रेप करने की कोशिश का आरोप लगाया है।

मधुबनी: धरोहर नाथ मंदिर में सोए दो साधुओं का गला कुदाल से काटा, ‘लव जिहाद’ का विरोध करने वाले महंत के आश्रम पर हमला

बिहार के मधुबनी जिला स्थित खिरहर गाँव में 2 साधुओं की गला काट हत्या कर दी गई है। इससे पहले पास के ही बिसौली कुटी के महंत के आश्रम पर रात के वक्त हमला हुआ था।

रेमडेसिविर खेप को लेकर महाराष्ट्र के FDA मंत्री ने किया उद्धव सरकार को शर्मिंदा, कहा- ‘हमने दी थी बीजेपी को परमीशन’

महाविकास अघाड़ी को और शर्मिंदा करते हुए राजेंद्र शिंगणे ने पुष्टि की कि ये इंजेक्शन किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। उन्हें भाजपा नेताओं ने भी इसके बारे में आश्वासन दिया था।

‘सुअर के बच्चे BJP, सुअर के बच्चे CISF’: TMC नेता फिरहाद हाकिम ने समर्थकों को हिंसा के लिए उकसाया, Video वायरल

TMC नेता फिरहाद हाकिम का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। इसमें वह बीजेपी और केंद्रीय सुरक्षा बलों को 'सुअर' बता रहे हैं।

हाँ, हम मंदिर के लिए लड़े… क्योंकि वहाँ लाउडस्पीकर से ऐलान कर भीड़ नहीं बुलाई जाती, पेट्रोल बम नहीं बाँधे जाते

हिंदुओं को तीन बातें याद रखनी चाहिए, और जो भी ये मंदिर-अस्पताल की घटिया बाइनरी दे, उसके मुँह पर मार फेंकनी चाहिए।

रवीश और बरखा की लाश पत्रकारिताः निशाने पर धर्म और श्मशान, ‘सर तन से जुदा’ रैलियाँ और कब्रिस्तान नदारद

अचानक लग रहा है जैसे पत्रकारों को लाश से प्यार हो गया है। बरखा दत्त श्मशान में बैठकर रिपोर्टिंग कर रही हैं। रवीश कुमार लखनऊ को लाशनऊ बता रहे हैं।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,985FansLike
82,653FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe