Friday, February 26, 2021
Home रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय गज़नी का वह अंतिम हिन्दू जो अफग़ानिस्तान में ही रुक गया ताकि मंदिरों में...

गज़नी का वह अंतिम हिन्दू जो अफग़ानिस्तान में ही रुक गया ताकि मंदिरों में जलता रहे दिया, परिवार ने ली भारत में शरण

गज़नी के अंतिम हिन्दू राजा राम की कहानी इस बात का सबूत है कि वहाँ अल्पसंख्यकों को अपने मन मुताबिक़ पूजा करने के लिए कितना कुछ झेलना पड़ता है। इस तरह के मुश्किल हालातों में, अपने परिवार को छोड़ कर उन्होंने वहाँ रुकने का फैसला लिया। वह चाहते थे कि मंदिरों में दिया जलता रहे।

बहुत पहले ही बात नहीं है, भारत ने अफग़ानिस्तान के गज़नी से आए 21 हिन्दू और सिख परिवारों को शरण दी थी। वहाँ पर इन परिवारों को जिस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है वह कोई राज़ की बात नहीं है। अफग़ानिस्तान में पहले ही युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं, इसके ऊपर इस्लामी आतंकवाद और कट्टरपंथ ने वहाँ के अल्पसंख्यकों का जीवन नरक से भी बदतर बना दिया है।

हिन्दू और सिख परिवार तो भारत आ गए लेकिन इस दौरान एक व्यक्ति वहीं रह गया या यूँ कहें वहीं रुक गया। व्यक्ति ने वहाँ रुकने का फैसला इसलिए किया क्योंकि उसे बचे हुए हिन्दू मंदिरों की सुरक्षा और देखरेख करनी थी। ऐसे ज़िंदा दिल और अटूट इरादों के व्यक्ति का नाम है ‘राजा राम’। भले उन्होंने कभी भारत की ज़मीन पर कदम नहीं रखा हो लेकिन उनके नाम और इस देश के बीच रिश्तों की सूरत बेहद खूबसूरत है। 

राजा राम ने रेडियो फ्री से बात करते हुए कहा, “हम सभी अपनी मातृभूमि से प्यार करते हैं लेकिन हमला होने के बाद लोगों को यहाँ से जाना ही पड़ा। उन सभी के लिए कश्मीर ही मातृभूमि है।” इसके बाद उन्होंने कहा कि यहाँ पर हालात भयावह हो चुके थे, जिससे लोग पूरी तरह टूट चुके थे। जब लोगों के पास कोई विकल्प नहीं बचा, तब उन्होंने लाचार होकर अपनी ज़मीन छोड़ दी। राजा राम ने बताया कि एक बेहतर कल की आशा में उनकी पत्नी और बच्चे भारत आ चुके हैं। इसके बावजूद उन्होंने वहीं रहने का फैसला लिया, वहाँ स्थित मंदिरों की सेवा करने के लिए। अफग़ानिस्तान की सरकार ऐसा करने के लिए उन्हें हर महीने लगभग 100 डॉलर का भुगतान करती है। 

राजा राम अभी तक इस बात के लिए आशावादी हैं कि ऐसा समय ज़रूर आएगा जब उनकी पत्नी और बच्चे उस जगह वापस लौट कर आएँगे जिसे वह अपना देश मानते हैं। इस मुद्दे पर वह कहते हैं, “मुझे ऐसा लगता है कि एक दिन अफग़ानिस्तान में शांति होगी, सब कुछ बेहतर होगा। ऐसा होने पर यहाँ रहने वाले सभी लोग वापस लौटेंगे। हिन्दू से लेकर सिख सभी इस ज़मीन की औलाद हैं, हम भी अफगान हैं।”      

किसी ज़माने में अफग़ानिस्तान के भीतर हिन्दू और सिखों की संख्या 80 हज़ार थी। दोनों वहाँ पर मज़बूत अल्पसंख्यक की श्रेणी में आते थे लेकिन अब उनकी संख्या लगातार कम हो रही है। अल्पसंख्यकों की एक बड़ी आबादी या तो भारत आ चुकी है या फिर विदेशों की ओर चली गई है। भारत ने हमेशा प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को अपने यहाँ जगह दी है, जिससे उनके बच्चों को एक बेहतर भविष्य मिल पाए। 

बेशक वह अपने देश को याद करते हैं, यह मानवीय स्वभाव है इसमें कोई गुरेज़ भी नहीं है। इसके अलावा वह इस बात के लिए आभारी भी रहते हैं जो भारत ने उन्हें अपने यहाँ शरण दी। उनके लिए इससे बेहतर बात क्या हो सकती है कि भारत उनके अस्तित्व को स्वीकार करता है। भारत पड़ोसी देशों (ख़ास कर इस्लामी देश) में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को शरण देना अपना कर्तव्य समझता है जिन्होंने हर तरह का अत्याचार झेला है।      

इस कड़ी में सबसे पहला कदम था नागरिकता संशोधन क़ानून 2019, जिसकी मदद से इस्लामी मुल्कों में अत्याचार झेल रहे अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को राहत मिलेगी। इसका बहुत से लोगों ने विरोध भी किया लेकिन अल्पसंख्यकों के हालात देख कर यह साफ़ हो जाता है कि इस क़ानून की कितनी ज्यादा ज़रूरत है। पाकिस्तान में रहने वाले सिख और हिन्दू समुदाय के लोगों के साथ जिस तरह का व्यवहार होता है वह किसी से छिपा नहीं है।

गज़नी के अंतिम हिन्दू राजा राम की कहानी इस बात का सबूत है कि वहाँ अल्पसंख्यकों को अपने मन मुताबिक़ पूजा करने के लिए कितना कुछ झेलना पड़ता है। इस तरह के मुश्किल हालातों में, अपने परिवार को छोड़ कर उन्होंने वहाँ रुकने का फैसला लिया। वह चाहते थे कि मंदिरों में दिया जलता रहे। इस तरह के बलिदानों की वजह से पूर्वजों की धरोहर ज़िंदा रहती है और एक सभ्यता जीवित रहती है।     

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

10 साल पहले अग्रेसिव लेंडिंग के नाम पर किया गया बैंकिंग सेंक्टर को कमजोर: PM मोदी ने पारदर्शिता को बताया प्राथमिकता

सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास इसका मंत्र फाइनेंशल सेक्टर पर स्पष्ट दिख रहा है। आज गरीब हो, किसान हो, पशुपालक हो, मछुआरे हो, छोटे दुकानदार हो सबके लिए क्रेडिट एक्सेस हो पाया है।

हिन्दुओं के आराध्यों का अपमान बन गया है कमाई का जरिया: तांडव मामले में अपर्णा पुरोहित की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

तांडव वेब सीरीज के विवाद के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अमजॉन प्राइम वीडियो की हेड अपर्णा पुरोहित की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।

मिशनरी स्कूल प्रिंसिपल ने लाइब्रेरियन पर डाला धर्मांतरण का दबाव: लालच देकर सैलरी रोकी फिर गालियाँ देकर नौकरी से निकाला

जब लाइब्रेरियन रूबी सिंह ने स्कूल प्रिंसिपल सिस्टर भाग्या से वेतन की माँग की तो उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन कर लो, हम तुम्हारा वेतन दे देंगे और उसमें बढ़ोतरी भी कर देंगे।

सतीश बनकर हिंदू युवती से शादी कर रहा था 2 बच्चों का बाप टीपू: मंडप पर नहीं बता सका गोत्र, ट्रू कॉलर ने पकड़ाया

ग्रामीणों ने जब सतीश राय बने हुए टीपू सुल्तान से उसके गोत्र के बारे में पूछा तो वह इसका जवाब नहीं दे पाया, चुप रह गया। ट्रू कॉलर ऐप में भी उसका नाम टीपू ही था।

कुरान की आयतें करती हैं सीमित परिवार की पैरवी: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त कुरैशी ने बताया इस्लाम को परिवार नियोजन का समर्थक

“1,400 साल पहले, जब दुनिया में कहीं भी जनसंख्या का दबाव नहीं था, कुरान में नियोजित परिवारों के बारे में बात हो रही थी"

‘अंकित शर्मा ने किया हिंसक भीड़ का नेतृत्व, ताहिर हुसैन कर रहा था खुद का बचाव’: ‘द लल्लनटॉप’ ने जमकर परोसा प्रोपेगेंडा

हमारे पास अंकित के परिवार के कुछ शब्द हैं, जिन्हें पढ़कर आज लगता है कि उन्हें पहले से पता था कि आखिर में न्याय तो मिलेगा नहीं लेकिन उसके बदले अंकित को दंगाई घोषित जरूर कर दिया जाएगा।

प्रचलित ख़बरें

आमिर खान की बेटी इरा अपने संघी हिन्दू नौकर के साथ फरार.. अब होगा न्याय: Fact Check से जानिए क्या है हकीकत

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि आमिर खान की बेटी इरा अपने हिन्दू नौकर के साथ भाग गई हैं। तस्वीर में इरा एक तिलक लगाए हुए युवक के साथ देखी जा सकती हैं।

‘अंकित शर्मा ने किया हिंसक भीड़ का नेतृत्व, ताहिर हुसैन कर रहा था खुद का बचाव’: ‘द लल्लनटॉप’ ने जमकर परोसा प्रोपेगेंडा

हमारे पास अंकित के परिवार के कुछ शब्द हैं, जिन्हें पढ़कर आज लगता है कि उन्हें पहले से पता था कि आखिर में न्याय तो मिलेगा नहीं लेकिन उसके बदले अंकित को दंगाई घोषित जरूर कर दिया जाएगा।

UP पुलिस की गाड़ी में बैठने से साफ मुकर गया हाथरस में दंगे भड़काने की साजिश रचने वाला PFI सदस्य रऊफ शरीफ

PFI मेंबर रऊफ शरीफ ने मेडिकल जाँच कराने के लिए ले जा रही UP STF टीम से उनकी गाड़ी में बैठने से साफ मना कर दिया।

सतीश बनकर हिंदू युवती से शादी कर रहा था 2 बच्चों का बाप टीपू: मंडप पर नहीं बता सका गोत्र, ट्रू कॉलर ने पकड़ाया

ग्रामीणों ने जब सतीश राय बने हुए टीपू सुल्तान से उसके गोत्र के बारे में पूछा तो वह इसका जवाब नहीं दे पाया, चुप रह गया। ट्रू कॉलर ऐप में भी उसका नाम टीपू ही था।

कला में दक्ष, युद्ध में महान, वीर और वीरांगनाएँ भी: कौन थे सिनौली के वो लोग, वेदों पर आधारित था जिनका साम्राज्य

वो कौन से योद्धा थे तो आज से 5000 वर्ष पूर्व भी उन्नत किस्म के रथों से चलते थे। कला में दक्ष, युद्ध में महान। वीरांगनाएँ पुरुषों से कम नहीं। रीति-रिवाज वैदिक। आइए, रहस्य में गोते लगाएँ।

शैतान की आजादी के लिए पड़ोसी के दिल को आलू के साथ पकाया, खिलाने के बाद अंकल-ऑन्टी को भी बेरहमी से मारा

मृत पड़ोसी के दिल को लेकर एंडरसन अपने अंकल के घर गया जहाँ उसने इस दिल को पकाया। फिर अपने अंकल और उनकी पत्नी को इसे सर्व किया।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,062FansLike
81,853FollowersFollow
392,000SubscribersSubscribe