Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयग्रीन कार्ड और वीजा नीति में बड़ा बदलाव: ट्रंप के इस प्रस्ताव से पहुँचेगा...

ग्रीन कार्ड और वीजा नीति में बड़ा बदलाव: ट्रंप के इस प्रस्ताव से पहुँचेगा कुशल कर्मियों को फायदा

ट्रंप ने कहा है कि अभी अमेरिकी आव्रजन कानून प्रतिभाशाली लोगों के साथ भेदभाव करता है, क्योंकि अधिकतर ग्रीन कार्ड कम प्रतिभाशाली लोगों को मिलता है जो कम पैसे लेते हैं।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप ने योग्यता पर आधारित आव्रजन प्रणाली पेश की है। ट्रंप की इस पेशकश से ग्रीन कार्ड और स्थायी वैध निवास का इंतजार कर रहे हजारों भारतीय समेत विदेशी पेशेवरों एवं कुशल श्रमिकों को लाभ पहुँचेगा।

इस पेशकश के अनुसार परिवार के बजाए योग्यता को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि इस प्रस्ताव को कानूनी मंजूरी मिल जाती है तो योग्य लोगों के लिए अमेरिका का वीजा प्राप्त करना बेहद आसान हो जाएगा। ट्रंप के प्रस्ताव के मुताबिक शिक्षित, किसी भी कौशल (स्किल) के साथ अंग्रेजी बोलने में माहिर, जॉब ऑफर और अमेरिकी संस्कृति अपनाने वालों को तरजीह दी जाएगी।

ट्रंप ने कहा है कि अभी अमेरिकी आव्रजन कानून प्रतिभाशाली लोगों के साथ भेदभाव करता है, क्योंकि अधिकतर ग्रीन कार्ड कम प्रतिभाशाली लोगों को मिलता है जो कम पैसे लेते हैं।

बता दें अमेरिका हर वर्ष 10 लाख से ज्यादा ग्रीन कार्ड जारी करता है जो विदेशियों को कानूनी रूप से स्थाई निवास का अधिकार है। इसमें 1, 40,000 ग्रीन कार्ड रोजगार पर दिए जाते हैं, बाकी पारिवारिक रिश्ते, शरणार्थी और लॉटरी के आधार पर दिए जाते हैं।

ट्रंप के नए प्रस्ताव से पिछले आँकड़े पूरी तरह पलट जाएँगे। इस प्रस्ताव में कुशल कर्मियों के लिए आरक्षण को करीब 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 57 प्रतिशत करने की बात की गई है। ट्रंप का कहना है कि उनका ये कदम अमेरिका को दूसरे देशों के साथ खड़ा करेगा और वैश्विक रूप से प्रतिद्वंदी बनाएगा।

https://platform.twitter.com/widgets.js
Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

राम मनोहर लोहिया के सिद्धांतों से भटकी समाजवादी पार्टी, ‘PDA’ के नाम पर सिर्फ ‘MY’ समीकरण को तरजीह: समझिए कैसे दलितों की अनदेखी कर...

सामाजिक न्याय का दावा करने वाली सपा आज भी अपने पुराने ढर्रे पर चल रही है, जिससे उसका 'PDA' का रैपर महज एक चुनावी चुनावी हथकंडा नजर आता है।

असल बात को छुपाओ, शब्दों का हेर-फेर कर प्रोपेगेंडा फैलाओ: UP को बदनाम करने के लिए ये है NewsLaundry की ट्रिक, जानिए कैसे प्रस्तावित...

हर राज्य में सभी MoU हकीकत में नहीं बदलते। कुछ परियोजनाएँ सफल होती हैं और कुछ निरस्त होती हैं। इससे पूरे निवेश मॉडल को ही फर्जी कह देना गलत है।
- विज्ञापन -