Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयकाबुल की मस्जिद में बम ब्लास्ट, तालिबानी प्रवक्ता की अम्मी के लिए पढ़ा जा...

काबुल की मस्जिद में बम ब्लास्ट, तालिबानी प्रवक्ता की अम्मी के लिए पढ़ा जा रहा था फातिया: कई मरे, ISIL पर शक

तालिबान का शासन शुरू होने के बाद ISIL ही अधिकतर इस तरह की हरकतें कर रहा है। नांगरहार के पूर्वी प्रान्त में ISIL की अच्छी-खासी उपस्थिति है और ये तालिबान को अपना दुश्मन मानता है।

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक मस्जिद के बाहर हुए बम ब्लास्ट में कई लोगों की मौत हो गई है। तालिबान ने बताया है कि बम ब्लास्ट के दौरान मस्जिद के भीतर घुसने के लिए बने दरवाजे को निशाना बनाया गया। ये घटना रविवार (3 अक्टूबर, 2021) को हुई है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद की अम्मी का निधन होने के बाद एक विशेष दुआ सभा का आयोजन किया गया था।

इसी दौरान बम ब्लास्ट हो गया। ये घटना ईदगाह मस्जिद परिसर में हुई। पास के ही एक दुकानदार अहमदुल्लाह ने बताया कि उसने मस्जिद से बम विस्फोट की आवाज़ सुनी, जिसके बाद गोलीबारी भी हुई। इस बम ब्लास्ट के पहले ही तालिबान ने सड़कों पर आवागमन रोक दिया था। अभी तक किसी ने इस बम ब्लास्ट की जानकारी नहीं ली है। लेकिन, तालिबान का शासन शुरू होने के बाद ISIL ही अधिकतर इस तरह की हरकतें कर रहा है।

नांगरहार के पूर्वी प्रान्त में ISIL की अच्छी-खासी उपस्थिति है और ये तालिबान को अपना दुश्मन मानता है। इस प्रान्त की राजधानी जलालाबाद में हुए ऐसे कई हमलों की जिम्मेदारी इसी संगठन ने ली है। हालाँकि, काबुल में इस तरह की घटनाएँ कम ही हुई हैं। काबुल के उत्तर में स्थित परवान प्रान्त में तालिबान ने हाल ही में ISIL के ठिकानों को तबाह किया है। सड़क पर हुए एक बम ब्लास्ट में 4 तालिबानियों के घायल होने के बाद ये कार्रवाई की गई थी।

काबुल में स्थित एक इटली फंडेड अस्पताल ने जानकारी दी है कि 4 घायलों को इलाज के लिए वहाँ लाया गया है। काबुल के इमरजेंसी हॉस्पिटल की तरफ कई एम्बुलेंसों को भी जाते हुए देखा गया है। फ़िलहाल 8 लोगों के मरने और 20 के घायल होने की बात कही जा रही है। हालाँकि, मृतकों के आँकड़े इससे ज्यादा बताए जा रहे हैं और उनमें अधिकतर आम नागरिक हैं। तालिबान ने वहाँ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रखी थी, फिर भी ये घटना हुई।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -