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इमरान खान की कंगाल रेलवे में जान फूँकने के वादे से मुकरा चीन, हर साल हो रहा है ₹40 अरब का घाटा

पिछले 2 दशक में पाकिस्‍तान रेलवे को हुए कुल 1.2 ट्रिलियन रुपए के घाटे में 90 फीसदी नुकसान हुआ है, जिस कारण उन्हें हर साल करीब 35 से 40 अरब रुपए का घाटा हो रहा है।

पाकिस्तान अब अपने जिगरी दोस्त चीन से ही ठगा हुआ महसूस कर रहा है। दरअसल, आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने घाटे में चल रही अपनी रेलवे में फिरसे जान फूँकने के लिए चीन से आर्थिक मदद की भीख माँगी थी, लेकिन पाकिस्तान के हालात देखते हुए चीन ने भी उससे अब किनारा कर लिया है।

पाकिस्‍तानी अखबार ‘डॉन’ के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का मानना था कि आर्थिक समस्या से जूझ रहे उसके देश को चीन के 6.8 अरब डॉलर के निवेश से पेशावर से कराची के बीच मेन लाइन-1 को अपग्रेड कर दिया जाएगा, जिससे रेलवे में चल रही मंदी को फिर से जीवनदान मिलेगा। हालाँकि, चीन ने पाकिस्तान के इस भरोसे को तोड़ दिया।

चीन पाक की इमरान खान सरकार को धोखा देते हुए अपने किए हुए वादे से मुकर गया और रेलवे के लिए पैसा देने से इनकार कर दिया। चीन के इस झटके से पाकिस्तान का यह प्रोजेक्ट बीच में ही लटक गया है और काम में देरी हो रही है।

पाकिस्‍तान की खस्ता रेलवे हालात के बारे में नए रेलमंत्री आजम खान स्‍वाती ने खुलासा किया है कि पिछले 2 दशक में पाकिस्‍तान रेलवे को हुए कुल 1.2 ट्रिलियन रुपए के घाटे में 90 फीसदी नुकसान हुआ है, जिस कारण उन्हें हर साल करीब 35 से 40 अरब रुपए का घाटा हो रहा है। वहीं, चीन के इस रवैए के चलते इमरान खान सरकार को अब यह समझ नहीं आ रहा है कि कैसे रेलवे को वापस अपने पैरों पर खड़ा किया जाए।

बता दें कि कराची-पेशावर मेन लाइन को सुधारने का काम इसी साल जनवरी में शुरू होना था, लेकिन अभी तक यह शुरू नहीं हो सका है। खबर यह भी है कि कर्ज में डूबे पाकिस्तान के पास अब रेलवे कर्मचारियों को सैलरी तक देने के पैसे नहीं हैं।

FATF की ग्रे सूची से जून तक नहीं निकल पाएगा पाकिस्तान

उल्लेखनीय है कि आतंकियों की फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में घिरा पड़ोसी देश पाकिस्तान अब जून तक फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (Financial Action Task Force) की ग्रे सूची से नहीं निकल पाएगा।

‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ अखबार की एक रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी FATF की आगामी बैठक के परिणाम को लेकर आशान्वित हैं, लेकिन इसके बावजूद अधिकारियों ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान कम से कम जून तक ‘ग्रे’ सूची में रहेगा।

इससे पहले, पिछले साल अक्टूबर माह में हुई FATF की एक बैठक में तय किया गया था कि पाकिस्तान फरवरी, 2021 तक ग्रे सूची में बना रहेगा क्योंकि वह 06 प्रमुख दायित्वों को पूरा करने में नाकाम रहा है। इनमें भारत के दो सर्वाधिक वांछित आतंकवादियों – मौलाना मसूद अजहर और हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई करना भी शामिल है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान को जून, 2018 में एफएटीएफ ‘ग्रे’ सूची में रखा गया था। 27 मुद्दों को लागू कर वैश्विक चिंताओं को दूर करने के लिए समय सीमा दी गई थी। ग्रे सूची में वो देश शामिल होते हैं जहाँ आतंकवादी गतिविधियों को फंडिंग और आतंकियों को मनी लॉन्ड्रिंग करने का जोखिम सबसे ज़्यादा होता है। वहीं, पाकिस्तान अपने आपको लगातार इस ग्रे लिस्ट से निकालने के लिए प्रयास कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि ‘फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स’ यानी FATF एक अंतर-सरकारी निकाय है जो 1989 में मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फाइनेंसिंग और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की अखंडता के लिए अन्य संबंधित खतरों का मुकाबला करने के लिए स्थापित किया गया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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