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PM मोदी की सेशेल्स यात्रा से भारत के UPI का वैश्विक विस्तार, बना दुनिया का 10वाँ देश: जानें दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म कैसे बना रहा अपनी पहचान

सेशेल्स में UPI लागू करने के समझौते के बाद यह जानना जरूरी है कि भारत का यह डिजिटल पेमेंट सिस्टम कैसे विकसित हुआ, दुनिया में इसकी पहुँच कितनी बढ़ी और भविष्य में इसे और स्मार्ट बनाने की क्या तैयारी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा के दौरान भारत और इस द्वीपीय देश के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लेकर हुए समझौते की रही।

इस समझौते के बाद सेशेल्स भी उन देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहाँ भारत का डिजिटल भुगतान सिस्टम पहुँच रहा है और सेशेल्स दशवाँ ऐसा देश बन गया है जहाँ ये डिजिटल पेमेंट की सविधा पहुँच गई है।

इसे पहले नौ और देश है जहाँ UPI का इस्तेमाल हो रहा है जिनमें सिंगापुर, UAE, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, कतर, कंबोडिया जैसे देश शामिल है। यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब यूपीआई ने अपने 10 साल पूरे किए हैं।

अप्रैल 2016 में शुरू हुआ यह प्लेटफॉर्म आज दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट सिस्टम बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) भी यूपीआई को ट्रांजैक्शन के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट प्लेटफॉर्म मान चुका है। यह केवल एक पेमेंट सिस्टम का विस्तार नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को दुनिया तक पहुँचाने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।

भारत पहले ही आधार, डिजिलॉकर और UPI जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म कई देशों के साथ साझा करने के लिए सहयोग समझौते कर चुका है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर UPI क्या है, यह कैसे काम करता है, दुनिया के किन देशों तक पहुँच चुका है और भारत को इससे क्या फायदा होगा?

UPI क्या है और यह कैसे काम करता है?

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) एक रियल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली है, जिसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने विकसित किया है। इसकी शुरुआत अप्रैल 2016 में हुई थी। इसका मकसद लोगों को मोबाइल के जरिए सीधे बैंक खाते से तुरंत पैसे भेजने और प्राप्त करने की सुविधा देना था।

UPI को 11 अप्रैल 2016 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की निगरानी में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने लॉन्च किया था। इसका उद्देश्य अलग-अलग बैंकों के खातों के बीच रियल टाइम डिजिटल भुगतान को आसान बनाना था।

UPI की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बैंक खाते का नंबर या IFSC कोड याद रखने की जरूरत नहीं होती। उपयोगकर्ता केवल मोबाइल नंबर, क्यूआर कोड या वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA) के जरिए भुगतान कर सकता है।

पैसा कुछ ही सेकंड में एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में पहुँच जाता है। यही वजह है कि आज छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं।

2016 से अब तक कैसे बदला UPI का सफर?

UPI की शुरुआत अप्रैल 2016 में हुई थी, लेकिन आज जिस रूप में यह दिखाई देता है, वहाँ तक पहुँचने के लिए इसे कई चरणों में विकसित किया गया।

पहला चरण (2016): शुरुआत और बुनियाद तैयार करना

अप्रैल 2016 में जब UPI लॉन्च हुआ था, तब केवल 21 बैंक इससे जुड़े थे। पहले महीने पूरे नेटवर्क पर सिर्फ 373 ट्रांजैक्शन हुए थे। वित्त वर्ष 2016-17 में कुल करीब 2 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए जिनकी कुल कीमत केवल 0.07 लाख करोड़ रुपए थी।

शुरुआत में इससे जुड़े कुछ ही बैंक थे और लोगों के लिए यह बिल्कुल नया सिस्टम था। उसी साल दिसंबर में BHIM ऐप लॉन्च किया गया, जिससे सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया।

दूसरा चरण (2017-2019): बड़े ऐप्स की एंट्री और तेज विस्तार

इस दौरान फोनपे, गूगल पे और पेटीएम जैसे ऐप तेजी से लोकप्रिय हुए। लगभग सभी बड़े बैंक UPI नेटवर्क से जुड़ गए। क्यूआर कोड के जरिए भुगतान आसान हुआ और दुकानों, बाजारों व छोटे कारोबारियों तक UPI पहुँचने लगा।

तीसरा चरण (2020-2022): गाँवों और हर वर्ग तक पहुँच

कोरोना महामारी के दौरान संपर्क रहित भुगतान की माँग बढ़ी, जिससे UPI का इस्तेमाल रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया। गाँवों और छोटे शहरों में भी डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ा। फीचर फोन उपयोगकर्ताओं के लिए UPI 123PAY और छोटे ऑफलाइन भुगतान के लिए UPI Lite जैसी सुविधाएँ शुरू की गईं।

चौथा चरण (2022-2024): नई सेवाएँ और क्रेडिट सुविधा

इस दौरान UPI, ऑटोपे, UPI पर रुपे क्रेडिट कार्ड और UPI पर क्रेडिट लाइन जैसी सुविधाएँ शुरू हुईं। इससे लोग केवल भुगतान ही नहीं, बल्कि सब्सक्रिप्शन, ऑटोमैटिक पेमेंट और डिजिटल क्रेडिट जैसी सेवाओं का भी लाभ लेने लगे।

आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। मार्च 2026 तक यूपीआई नेटवर्क से 703 बैंक जुड़ चुके हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई के जरिए 24,162 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल कीमत करीब 314 लाख करोड़ रुपये रही।

यानी 10 वर्षों में ट्रांजैक्शन की संख्या लगभग 12,000 गुना और कुल लेनदेन मूल्य 4,000 गुना से ज्यादा बढ़ चुका है। आज भारत के करीब 85 प्रतिशत डिजिटल भुगतान यूपीआई के जरिए होते हैं और रोजाना औसतन 66 करोड़ डिजिटल ट्रांजैक्शन इसी प्लेटफॉर्म पर किए जाते हैं।

पाँचवाँ चरण (2024 से आगे): दुनिया तक पहुँच और AI का दौर

अब UPI केवल भारत तक सीमित नहीं है। सिंगापुर, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मॉरीशस, UAE, कतर, फ्रांस, कंबोडिया और अब सेशेल्स जैसे देशों तक इसका विस्तार हो रहा है।

NPCI अब AI आधारित वॉयस पेमेंट, बहुभाषी समर्थन, धोखाधड़ी का पता लगाना और डिजिटल क्रेडिट पर काम कर रहा है। वर्तमान में UPI प्रतिदिन 75 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन संभालता है और लक्ष्य इसे 1 अरब रुपए ट्रांजैक्शन तक पहुँचाने का है।

किन-किन देशों तक पहुँच चुका है भारत का UPI?

पिछले कुछ सालों में UPI भारत की सीमाओं से निकलकर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। भारतीय पर्यटक और व्यापारी अब सिंगापुर, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, फ्रांस और कंबोडिया जैसे देशों में UPI के जरिए मर्चेंट पेमेंट कर सकते हैं। अब इस सूची में सेशेल्स भी जुड़ने जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, दुनिया में होने वाले लगभग 49 प्रतिशत रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट अब UPI नेटवर्क के जरिए होते हैं। यही वजह है कि कई देश भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल में रुचि दिखा रहे हैं और कई अन्य देशों के साथ भी यूपीआई कनेक्टिविटी को लेकर बातचीत जारी है।

प्रधानमंत्री मोदी की सेशेल्स यात्रा के दौरान नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) और सेशेल्स के केंद्रीय बैंक के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए। इसका उद्देश्य सेशेल्स में UPI आधारित डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू करना और दोनों देशों के बीच डिजिटल भुगतान एवं फिनटेक सहयोग को मजबूत करना है।

भारत सरकार 20 से अधिक देशों के साथ आधार, डिजिलॉकर और UPI जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म साझा करने के लिए सहयोग समझौते कर चुकी है। इससे भारत का इंडिया स्टैक  मॉडल दुनिया में तेजी से पहचान बना रहा है।

विदेशों में UPI पहुँचने से भारत और लोगों को क्या फायदा होगा?

UPI का वैश्विक विस्तार सबसे पहले भारतीय पर्यटकों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा। विदेश यात्रा के दौरान उन्हें स्थानीय मुद्रा बदलने या अंतरराष्ट्रीय कार्ड पर निर्भर रहने की जरूरत कम होगी। अपने मोबाइल में मौजूद उसी UPI ऐप से भुगतान करना आसान हो जाएगा।

विदेशों में रहने वाले भारतीयों और कारोबारियों के लिए भी भुगतान और लेनदेन अधिक सरल और तेज होगा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और फिनटेक क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा। डिजिटल भुगतान की लागत कम होगी और छोटे व्यवसायों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय भुगतान पहले से अधिक आसान बन सकता है।

सेशेल्स जैसे पर्यटन आधारित देश के लिए भी यह समझौता महत्वपूर्ण है। हर साल करीब 15 हजार भारतीय वहाँ घूमने जाते हैं। भारतीयों को सेशेल्स जाने के लिए पहले से वीजा लेने की जरूरत नहीं होती, हालाँकि आगमन पर विजिटर परमिट लेना पड़ता है। ऐसे में UPI लागू होने से भारतीय पर्यटक वहाँ आसानी से डिजिटल भुगतान कर सकेंगे।

भारत पहले से सेशेल्स को दवाएँ, चावल, कपड़े, वाहन, मशीनरी और अन्य सामान निर्यात करता है। डिजिटल भुगतान व्यवस्था मजबूत होने से व्यापारिक संबंधों को भी नई गति मिल सकती है।

यही वजह है कि मोदी की यात्रा के दौरान UPI के अलावा स्वास्थ्य, कृषि, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और 1250 करोड़ रुपए की लाइन ऑफ क्रेडिट सहित कई समझौते किए गए।

UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार केवल भुगतान तक सीमित नहीं है। इससे भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक पहचान मिल रही है। भारतीय फिनटेक कंपनियों के लिए नए बाजार खुलेंगे, सीमा पार भुगतान आसान होगा और डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की सॉफ्ट पावर भी मजबूत होगी।

AI के साथ UPI की अगली उड़ान कैसी होगी?

NPCI अब UPI के अगले चरण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को बड़ी भूमिका देना चाहता है। NPCI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिलीप अस्बे के अनुसार AI की मदद से नए उपयोगकर्ताओं को जोड़ना आसान होगा।

NPCI का लक्ष्य अगले चरण में और अधिक लोगों तथा व्यापारियों को UPI नेटवर्क से जोड़ना है। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित वॉयस पेमेंट, बहुभाषी सुविधा, धोखाधड़ी की पहचान और डिजिटल क्रेडिट जैसे फीचर्स पर काम चल रहा है। NPCI का लक्ष्य आने वाले वर्षों में यूपीआई को प्रतिदिन एक अरब ट्रांजैक्शन तक पहुँचाना है।

खासतौर पर वॉयस असिस्टेंट और बहुभाषी सुविधाओं के जरिए ऐसे लोग भी डिजिटल भुगतान से जुड़ सकेंगे जिन्हें अंग्रेजी या स्मार्टफोन का अधिक अनुभव नहीं है।

NPCI ने 2023 में वॉयस असिस्टेंट आधारित इंटरैक्टिव सिस्टम भी शुरू किया था। भविष्य में AI की मदद से डिजिटल लेनदेन में धोखाधड़ी की पहचान, फर्जी खातों पर नजर रखने और सुरक्षा को मजबूत करने की योजना है।

इतना ही नहीं, डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर AI भविष्य में छोटे कारोबारियों और ग्राहकों को डिजिटल क्रेडिट या लोन मंजूर करने में भी मदद कर सकता है।

NPCI का मानना है कि भारतीय बैंक और फिनटेक कंपनियाँ अपने डेटा के आधार पर छोटे और सटीक AI भाषा मॉडल विकसित कर सकती हैं। विवाद समाधान प्रणाली FIMI भी पहले से लाखों उपयोगकर्ताओं की मदद कर रही है। इन सभी पहलों का लक्ष्य UPI को अधिक सुरक्षित, आसान और दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल भुगतान नेटवर्क बनाना है।

सेशेल्स में UPI लागू करने का समझौता सिर्फ एक नए देश में भुगतान सुविधा शुरू करने तक सीमित नहीं है। यह भारत की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए वह अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना चाहता है।

जिस प्लेटफॉर्म ने 10 साल पहले केवल 21 बैंकों और कुछ सौ ट्रांजैक्शन के साथ शुरुआत की थी, वही आज दुनिया के लगभग आधे रियल-टाइम डिजिटल भुगतान का हिस्सा बन चुका है। यही वजह है कि अब भारत केवल डिजिटल भुगतान का उपभोक्ता नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने वाला देश बनकर उभर रहा है।

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विवेकानंद मिश्र
विवेकानंद मिश्र
एक पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर। राजनीति, संस्कृति, समाज से जुड़ी अनसुनी कहानियाँ सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध।

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