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खालिस्तानी आतंकियों के आगे झुक गई कनाडा सरकार, मुक्त व्यापार समझौता पर लगाई रोक: मंदिर पर हमलों से लेकर गुरुद्वारे में भारतीयों की हत्या के पोस्टर

जब जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भारत में थे, उस दौरान भी खालिस्तानी अलगाववादियों ने वहाँ के एक राज्य ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक ‘जनमत संग्रह’ आयोजित किया था। खालिस्तानी अलगाववादियों ने उस दौरान भारतीय नेतृत्व के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल और भारत की अखंडता के खिलाफ टिप्पणी की थी।

खालिस्तानी आतंकवाद का असर भारत और कनाडा के संबंधों का असर साफ दिखता है। दोनों देशों के बीच जारी मुक्त व्यापार समझौत वार्ता (Free Trade Agreement Negotiations) रुक गई है। कहा जा रहा है कि कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए हैं, जिनका असर इस वार्ता पर पड़ा है।

सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि दोनों देशों के बीच के कुछ राजनीतिक घटनाक्रमों का सीधा असर इस वार्ता पर पड़ा है। कहा जा रहा है कि जब इन मुद्दों को सुलझा लिया जाएगा, उसके बाद ये वार्ता फिर से शुरू की जाएगी। दरअसल, 2 सितंबर 2023 को कनाडा ने घोषणा की कि उसने समझौते के लिए बातचीत रोक दी है।

अधिकारियों का कहना है कि कनाडा अपने घरेलू राजनीति की वजह से भारत की चिंताओं को लगातार नजरअंदाज करता आ रहा है। ऐसी स्थिति में इस वार्ता को जारी नहीं रखा जा सकता है। हालाँकि, अधिकारी ने यह भी कहा कि दोनों सरकारों के बीच मुद्दे सुलझने के बाद बातचीत फिर से शुरू होगी। इसे सिर्फ एक विराम बताया है।

इससे पहले ये खबरें आ रही थीं कि भारत और कनाडा इस साल के अंत तक अंतरिम व्यापार समझौते पर पहुँच सकते हैं। इस तरह के समझौते में आमतौर पर समझौते में शामिल देश अपने बीच व्यापार की जाने वाली वस्तुओं पर सीमा शुल्क को काफी कम या खत्म कर देते हैं। इससे देशों के व्यापार को गति मिलती है।

व्यापार समझौते पर दोनों देशों के बीच अब तक लगभग आधा दर्जन दौर की वार्ता हो चुकी है। पिछले साल मार्च में दोनों देशों ने एक अंतरिम समझौते के लिए बातचीत फिर से शुरू की थी। इस समझौता वार्ता को आधिकारिक तौर पर प्रारंभिक प्रगति व्यापार समझौता (Preliminary Progress Trade Agreement) का नाम दिया गया था।

इस साल मई में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश पर मंत्री स्तर की छठी वार्ता हुई की थी। इस बैठक की सह-अध्यक्षता वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और कनाडा के लघु व्यवसाय, निर्यात संवर्धन और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री मैरी एनजी ने की थी।

जब जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भारत में थे, उस दौरान भी खालिस्तानी अलगाववादियों ने वहाँ के एक राज्य ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक ‘जनमत संग्रह’ आयोजित किया था। खालिस्तानी अलगाववादियों ने उस दौरान भारतीय नेतृत्व के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल और भारत की अखंडता के खिलाफ टिप्पणी की थी।

कनाडा में स्थित एक गुरुद्वारा में भारतीय राजनयिकों की तस्वीरें लगा कर उनकी हत्या के लिए उकसाया है। साथ ही इसमें 2 खालिस्तानी आतंकियों की तस्वीरें भी लगी हैं। इनमें से एक तस्वीर 1985 में ‘एयर इंडिया’ की फ्लाइट में बम डाल कर 329 लोगों की जान लेने वाले आतंकी तलविंदर सिंह परमार की तस्वीर लगी है, जो ‘बब्बर खालसा’ का संस्थापक था। एक तस्वीर 2023 में संदिग्ध रूप से मार डाले गए खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की है।

शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन यानी 10 सितंबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो से खालिस्तानी आतंकियों की भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर चिंता जाहिर की थी। भारत के आधिकारिक बयान में कहा गया था कि ये खालिस्तानी आतंकी कनाडा में भारतीय राजनयिकों के खिलाफ हिंसा को भड़का रहे हैं और भारतीय समुदाय के लोगों को धमकी दे रहे हैं।

बता दें कि इससे पहले भी खालिस्तानियों ने कई हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया था। खालिस्तानी आतंकियों ने 7 सितंबर 2023 को तड़के एक मंदिर को निशाना बनाया था। स्थानीय निवासी जब मंदिर पहुँचे तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। माता भामेश्वरी दुर्गा मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखने के फोटो, वीडियो सामने आए थे। दीवारों पर ‘मोदी इज टेररिस्ट’ यानी ‘मोदी आतंकी है’ और ‘पंजाब इज नॉट इंडिया’ यानी ‘पंजाब भारत का हिस्सा नहीं है’ लिखा देखा गया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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