Wednesday, May 22, 2024
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इस्लाम का नया खलीफा बनने चले तुर्की का भी Pak की तरह बुरा हाल: ब्रेड के लिए भी लंबी लाइनें, गेहूँ-गैस की किल्लत, बेरोजगारी चरम पर

टर्किश लीरा की कीमत 14.3 प्रति डॉलर हो गई है। इस साल ये दोगुनी हो गई है। युवाओं की बेरोजगारी दर भी 25% पहुँच गई है।

इस्लाम का खलीफा बनने चले रेजेप तैयब एर्दोआँ के तुर्की में महँगाई ने सारी सीमाएँ पार कर दी हैं। ब्रेड के लिए दुकानों पर लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। अर्थव्यवस्था डाँवाडोल हो रही है। दवाओं, दूध और टॉयलेट पेपर्स के दाम भी आसमान छू रहे हैं। कुछ गैस स्टेशनों में गैस ही ख़त्म हो गई है। इसके बाद उन्होंने अपनी दुकानें बंद करनी शुरू कर दी हैं। इसके बाद लोग भी सड़कों पर उतर आए हैं। बेरोजगारी और रहने के लिए अधिक खर्च से लोगों की कमर टूट गई है।

ट्रेड यूनियनों ने भी इसका विरोध शुरू कर दिया है। तुर्की की करेंसी ‘टर्किश लीरा’ के भाव भी काफी गिर गए हैं। कोरोना के समय जब विश्व की अधिकतर अर्थव्यवस्थाएँ मंदी से जूझ रही थीं, तब भी तुर्की में हालात और ज्यादा खराब थे। तुर्की पर भारी कर्ज भी है। इन सबके लिए वहाँ के राष्ट्रपति रेजेप तैयब एर्दोआँ को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जिन्होंने महँगाई के बावजूद इंटररेस्ट रेट्स को कम कर डाला। पिछले 18 वर्षों से तुर्की पर उनका ही शासन है।

तुर्की में महँगाई दर 21% पहुँच गई है। सामान्यतः देश के मुख्य बैंक के पास ये जिम्मेदारी होती है कि वो महँगाई को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए। लेकिन, राष्ट्रपति रेजेप तैयब एर्दोआँ ने पिछले कुछ महीनों में तीन बैंक अधिकारियों को फायर किया है। अगर बैंक उनकी बात नहीं मानते हैं तो उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ता है। टर्किश लीरा की कीमत 14.3 प्रति डॉलर हो गई है। इस साल ये दोगुनी हो गई है। युवाओं की बेरोजगारी दर भी 25% पहुँच गई है।

वहीं वहाँ के राष्ट्रपति रेजेप तैयब एर्दोआँ की लोकप्रियता भी लगातार घट रही है। अगले 18 महीनों बाद चुनाव आने वाले हैं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि तुर्की की इकॉनमी में एक बड़ा क्रैश आने वाला है। 2003 में जब एर्दोआँ ने सत्ता संभाली थी, तब उनका पहला दशक अच्छा रहा था और इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ निवेश पर भी काम हुए थे। लेकिन, फिर उन्होंने देश पर कर्ज का बोझ बढ़ाना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि इंटरेस्ट रेट कम रहेंगे तो आम लोग ज्यादा खरीददारी करेंगे और व्यापार बढ़ेगा।

लोगों का कहना है कि शर्ट से लेकर मोज़े तक, सब कुछ महँगा हो गया है। लोगों को रहने के लिए घर के किराए के लिए भी ज्यादा रुपए देने पड़ रहे हैं। नवंबर क्रैश में टर्किश लीरा की कीमत घट गई। इस्ताम्बुल म्युनिसिपल्टी, जिस पर विपक्षी दल का शासन है, उसका कहना है कि शहर में लोगों के रहने का खर्च 48% बढ़ गया है। गेहूँ के दाम 109%, सूर्यमुखी के तेल के दाम 137%, नेचुरल गैस के दाम 102% और टॉयलेट पेपर और चीनी के दाम 90% बढ़ गए हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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