Saturday, May 18, 2024
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‘मदद के लिए चिल्लाते रहे हिन्दू, कोई नहीं आया’: बांग्लादेश हिंसा पर बोले इस्कॉन प्रवक्ता – दूसरे मजहब की खिड़की का शीशा भी टूट जाए तो…

राधारमण दास ने बताया कि 15 अक्टूबर, 2021 को नोआखली के इस्कॉन मंदिर से उनके पास कॉल आया कि प्रतिमाओं को खंडित किया जा रहा है, श्रद्धालुओं की हत्या हो रही है और महिलाओं के साथ बलात्कार किए जा रहे हैं।

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा में कुरान के अपमान की झूठी अफवाह उड़ा कर मुस्लिम भीड़ ने कई मंदिरों में तोड़फोड़ मचाई, पंडालों को तबाह कर दिया और हिन्दुओं के घरों में आगजनी की। इस्कॉन के मंदिर में भी तोड़फोड़ हुई और प्रभुपाद भक्तिवेदांत स्वामी की प्रतिमा को जला डाला गया। दुनिया भर में इस्कॉन समर्थकों व भक्तों ने विरोध प्रदर्शन किया। सोशल मीडिया पर इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष व प्रवक्ता राधारमण दास ने हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध कड़ी आवाज़ उठाई।

राधारमण दास ने इस पूरे मामले पर ‘टाइम्स नाउ’ से बातचीत की, जिसमें उन्होंने कहा कि इस साल 13 अक्टूबर को शुरू हुआ हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा का क्रम कोई पहली बार नहीं हो रहा, न ही इस्कॉन के मंदिरों और हिन्दुओं पर हमले की ये घटना पहली है। उन्होंने कहा कि 2015, 2016 और 2019 में भी इस्कॉन के मंदिरों पर क्रूड बम से हमले हो चुके हैं। श्रद्धालुओं को गोली मारी गई, उनका गला रेत दिया गया। उन्होंने 1946 और 1971 की हिन्दू विरोधी हिंसा की याद दिलाई।

उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि हिन्दुओं के विरुद्ध हो रही हिंसा को मेनस्ट्रीम मीडिया ने जगह नहीं दी। राधारमण दास ने कहा कि पीड़ित हिन्दू मदद के लिए चिल्लाते रहे और सोशल मीडिया के माध्यम से हिंसा के बारे में बताते रहे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने शायद ही कोई मदद की। उन्होंने बताया कि 15 अक्टूबर, 2021 को नोआखली के इस्कॉन मंदिर से उनके पास कॉल आया कि प्रतिमाओं को खंडित किया जा रहा है, श्रद्धालुओं की हत्या हो रही है और महिलाओं के साथ बलात्कार किए जा रहे हैं।

उन्होंने उसी समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर बांग्लादश की पीएम शेख हसीना से इस मामले को उठाने का निवेदन किया। साथ ही संयुक्त राष्ट्र में भी इस घटना की निंदा के लिए अपील की और हिंसा को रोकने के लिए एक टीम वहाँ भेजने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि गैर-मुस्लिमों को बांग्लादेश से निकाल बाहर करने की साजिश के तहत इस पूर्व-नियोजित हमले को अंजाम दिया गया। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे हनुमान जी की प्रतिमा के नीचे कुरान इक़बाल हुसैन नाम के व्यक्ति ने रखी और फिर अफवाह फैलाई।

उन्होंने बांग्लादेश के मंत्री एके अब्दुल मेनन के उस बयान की निंदा की, जिसमें उन्होंने कहा था कि 6 मृतकों में 4 मुस्लिम थे। राधारमण दास ने कहा कि 3 इस्कॉन के श्रद्धालुओं को मार डाला गया था। उन्होंने बताया कि एक श्रद्धालु के परिवार की सभी महिलाओं का बलात्कार हुआ, जिनमें दो कम उम्र की लड़कियाँ थीं। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को धमकियाँ दी गईं, ताकि वो चुप रहें। उन्होंने बांग्लादेश के मंत्री से अपना बयान वापस लेने और माफ़ी माँगने को कहा।

राधारमण दास ने कहा, “मैंने मंदिर को तोड़े जाने वाली तस्वीर शेयर की तो ट्विटर ने इसे हटाने को कहा और मेरा हैंडल लॉक कर दिया। मुझे यूएन को टैग करना था, इसीलिए मुझे ये ट्वीट डिलीट कर के हैंडल वापस लेना पड़ा। ट्विटर ने हिन्दुओं के लिए आवाज़ उठाने वाले ऐसे कई हैंडलों को सस्पेंड किया। 75 वर्षों में बांग्लादेश में हिन्दुओं की जनसंख्या 29% से सिर्फ 9% हो गई है। 5 वर्ष पहले हमारे एक श्रद्धालु का सिर कलम कर दिया गया था। संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसकी निंदा तो छोड़िए, भारतीय मीडिया तक ने इसे कवर नहीं किया।”

राधारमण दास ने कहा कि जब किसी अन्य मजहब की एक खिड़की का शीशा भी टूट जाता है कि संयुक्त राष्ट्र के अध्यक्ष इस मामले को उस देश के राष्ट्रपति के साथ उठाते हैं। जबकि, हिन्दुओं के मामले में अफगानिस्तान से लेकर कश्मीरी पंडितों तक, आवाज़ नहीं उठाई जाती। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे इस्कॉन के लोग 170 देशों में विरोध के लिए सड़क पर उतरे। बांग्लादेश की सरकार ने 450 FIR दर्ज किए हैं और अब यूएन व अमेरिका के प्रतिनिधि भी हिंसा पीड़ित इलाकों में जा रहे हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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