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प्राइवेट पार्ट में चाकू घोंपकर किया बलात्कार, भाई-बहन से कहा आपस में सेक्स करो: जानिए हमास आतंकियों ने इजरायलियों पर किए कितने अत्याचार, सामने आई 300 पन्नों की रिपोर्ट

इजरायल के एनजीओ 'द सिविल कमीशन' ने 'साइलेंस्ड नो मोर' में हमास द्वारा यौन हिंसा और क्रूरता के सबूत दिए यानी 'अब और चुप नहीं' नाम से एक रिपोर्ट जारी किया है। इसमें 7 अक्टूबर को योजनाबद्ध तरीके से हमास द्वारा रेप और यौन उत्पीड़न के साथ-साथ भयानक क्रूरता के सबूत दिए गए हैं।

इजरायल के एनजीओ ‘द सिविल कमीशन’ ने ‘साइलेंस्ड नो मोर‘ यानी ‘अब और चुप नहीं’ नाम से एक रिपोर्ट जारी किया है। इसमें 7 अक्टूबर को योजनाबद्ध तरीके से हमास द्वारा रेप और यौन उत्पीड़न के सबूत दिए गए हैं। इसकी टैगलाइन ‘सेक्सुअल टेरर अनवील्ड: 7 अक्टूबर के अनकहे अत्याचार और कैद में बंधकों के खिलाफ’ है।

7 अक्टूबर 2023 इजरायल के इतिहास का सबसे खूनी दिवस था। उस दिन हमास ने नेतृत्व में फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद जैसे संगठनों ने इजरायल के मासूम बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं को अपना निशाना बनाया था। इस हमले में 1200 से ज्यादा लोग मारे गए। हमलावरों ने घरों, सड़कों, बस्तियों, सुरक्षा प्रतिष्ठानों और एक संगीत समारोह में आतंक मचाया। इस दौरान करीब 251 लोगों को अगवा कर गाजा ले जाया गया। घटना का वीडियो बनाकर पूरी दुनिया में इसको प्रसारित किया गया।

इस दौरान इजरायली नागरिकों के साथ अभूतपूर्व यौन हिंसा किया गया। इस दिल दहला देने वाली घटना के गवाहों ने जब दुनिया को जानकारी दी, तो लोग सन्न रह गए।

इजरायल की गैर लाभकारी संगठन ‘द सिविल कमीशन’ ने 12 मई 2026 को ‘साइलेंस्ड नो मोर’ यानी ‘अब और चुप नहीं’ शीर्षक से करीब 300 पेज की रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट का शीर्षक है ‘यौन आतंक का पर्दाफाश: 7 अक्टूबर की अनकही क्रूरताएँ और बंधकों के खिलाफ अत्याचार’।

यौन हिंसा, अपमान और क्रूरता की दास्ताँ

दो साल के रिसर्च के आधार पर आयोग ने जो निष्कर्ष निकाला, उसमें कहा गया है कि यौन और लिंग आधारित हिंसा सुनियोजित, व्यापक और अहम थी। हमास और उसके सहयोगियों ने हमले के दौरान कई जगहों पर और कई फेज में पीड़ितों के साथ यौन शोषण किया और उन्हें यातनाएँ दी। उनका अपहरण, स्थानांतरण किया गया और जेल में डाला गया। इन अपराधों में अत्यधिक क्रूरता और गंभीर मानवीय पीड़ा देखी गई, जिन्हें पीड़ितों को डराने और अपमानित करने के उद्देश्य से अंजाम दिया गया था।

हमले के चश्मदीदों और पीड़ितों के बयान, साक्षात्कार, तस्वीरें, वीडियो, सरकारी दस्तावेज और अन्य प्राथमिक सामग्रियों का उपयोग निष्कर्ष निकालने में किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है, “आयोग द्वारा किए गए डेटा विश्लेषण से पता चलता है कि पीड़ित 52 अलग-अलग राष्ट्रीयताओं के थे, जो अपराधों के अंतर्राष्ट्रीय दायरे और उनके प्रभाव को रेखांकित करता है।” गाजा में हिरासत में लिए गए लोगों में विदेशी या दोहरी इजरायली और विदेशी नागरिकता वाले लोगों का एक बड़ा हिस्सा था।

इसमें कहा गया है कि सबूतों और सामग्रियों की तुलना और अपराधियों के तौर-तरीकों के विस्तृत विश्लेषण के आधार पर आयोग ने कई स्थानों पर की गई यौन और लिंग आधारित हिंसा की 13 पुनरावृत्तियों की पहचान की। इन पुनरावृत्तियों से पता चलता है कि ये अपराध एक व्यापक और सुनियोजित कार्यप्रणाली का हिस्सा थीं।

जाँच में यह भी पता चला कि आतंकवादियों ने हमले में खुद को दिखा कर और यौन उत्पीड़न को डिजिटल माध्यमों से प्रसार कर हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने हमले, अपमान और हत्या के फुटेज प्रसारित करने के लिए सोशल मीडिया और पीड़ितों की व्यक्तिगत ऑनलाइन प्रोफाइल का दुरुपयोग किया। परिवार के सदस्यों को अपनों की मृत्यु के बारे में सबसे पहले हमलावरों द्वारा कई बार साझा की गई तस्वीरों या वीडियो के माध्यम से पता चला।

आतंकवादियों ने गोप्रो और बॉडी-वियर कैमरे लगा रखे थे या यह सुनिश्चित किया था कि उनके कृत्यों को रिकॉर्ड किया जाए और सार्वजनिक किया जाए। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि इसी वजह से सभी साइटों पर वीडियो में सशस्त्र समूहों और फिलिस्तीनी नागरिकों को हमलों का जश्न मनाते हुए, प्रसन्न और उत्साहित दिखाया गया। डिजिटल मीडिया के इस दुरुपयोग ने जघन्य क्राइम को मनोवैज्ञानिक युद्ध के हथियार में बदल दिया। इसका लक्ष्य न केवल पीड़ित थे, बल्कि उनके परिवार और पूरा समाज भी था।

पीड़ितों को गाजा पट्टी में घसीट कर ले जाने के बाद भी उन्हें दंडित करने, अपमानित करने और यौन हिंसा का शिकार बनाया गया। आतंक का यह एक सुनियोजित अभियान था। नवजात बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को भी नहीं बख्शा गया। महिलाओं और पुरुषों को घोर अपमान और यौन हिंसा का सामना करना पड़ा। परिवारों को अलग कर दिया गया और बुनियादी चिकित्सा उपचार से वंचित कर दिया गया। दरअसल इन कैदियों के तन-मन पर लगे गहरे चोट का इस्तेमाल प्रचार और दबाव के हथियार के रूप में किया गया।

रिपोर्ट में इन कृत्यों को हमले का ‘केन्द्र’ बताया गया है। इसमें कहा गया है, “महिलाओं और लड़कियों, और कई मामलों में पुरुषों और लड़कों को बलात्कार, यौन यातना, अंग-भंग, जबरन नग्नता और शवों के अपमान का शिकार बनाया गया। माता-पिता की उनके बच्चों के सामने हत्या कर दी गई, भाई-बहनों पर एक-दूसरे के सामने हमला किया गया, पीड़ितों को निर्वस्त्र किया गया, उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, उनका वीडियो बनाया गया और प्रदर्शित किया गया। ये आवेश में किए गए अपराध नहीं थे। ये सुनियोजित और योजनाबद्ध तरीके से किए गए थे ताकि यौन प्रकृति के अपराधों की क्रूरता को और भी बढ़ाया जा सके।”

परिजनों के सामने यौन उत्पीड़न, मृतकों को भी नहीं बख्शा- पीड़ित

रिपोर्ट में कहा गया है, “हमास और उसके सहयोगियों ने हमले की व्यापक रणनीति के एक अंतर्निहित हिस्से के रूप में जानबूझकर और व्यवस्थित रूप से यौन और लिंग आधारित हिंसा (एसजीबीवी) का इस्तेमाल किया। महिलाओं और बंधकों को निशाना बनाया। नाबालिगों को भी इस तरह की हिंसा और दुर्व्यवहार का शिकार बनाया गया।” जिहादियों ने लोगों को उनके परिवारों की उपस्थिति में हृदयविदारक रूप से यातना दी।

जांच में पता चला कि पीड़ितों को क्रूरता के इंतहा तक तड़पाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, “पीड़ितों को जलाना, अंग-भंग करना, बलात्कार, बांधना, प्राइवेट पार्ट में जबरन वस्तुएँ डालना, चेहरे और प्राइवेट पार्ट पर गोली मारना, परिवार के सदस्यों के सामने हत्याएँ और दुर्व्यवहार करना और फाँसी देना शामिल थे। कई पीड़ितों को हथकड़ी लगाए हुए और बंधक के रूप में बरामद किया गया था। लंबे समय तक बंधक बनाए गए लोगों के खिलाफ यौन उत्पीड़न आम रहे। इन पीड़ितों में महिलाओं के साथ-साथ पुरुष भी शामिल थे।”

यातनाओं की वजह से जीवित बचे लोगों को गंभीर और दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक और शारीरिक क्षति पहुँची। शवों के पोस्टमार्टम में यौन शोषण, अपमान के सबूत मिले।

जाँच रिपोर्ट में कहा गया है कि पीड़ितों को हथकड़ी लगाना, बंधक बनाए हुए दिखाना, महिलाओं और बच्चों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना और परेड कराना। माताओं और बच्चों का अपहरण। परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में यौन हिंसा करना, उसका वीडियो बनाना और डिजिटल प्रसार करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करना शामिल है। जबरन विवाह की धमकियाँ भी दी गई। लड़कों और पुरुषों के अंग-भंग करना, बलात्कार और यौन हिंसा के भी सबूत मिले।

एक ही परिवार के लोगों और खून के रिश्ते वाले पीड़ितों को जानबूझकर आपस में यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया। इसमें एक विशेष मामले का जिक्र जाँच रिपोर्ट में किया गया है। इसके अलावा परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे की उपस्थिति में यौन उत्पीड़न या अपमानित किया गया। इससे पूरा परिवार आतंकित रहता था। यह प्रवृत्ति विशेष रूप से हमास की कैद के दौरान देखी गई।”

चरमपंथियों ने खुद को कैमरे पर रिकॉर्ड किया और महिलाओं, बच्चों और पूरे परिवारों को पीटते, अपमानित करते, अपहरण करते और उनकी हत्या करते हुए और शवों का अपमान करते हुए वीडियो अपलोड किए। उन्होंने महिलाओं और उनके शवों को युद्ध की लूट के रूप में प्रदर्शित किया। कुछ क्लिप में आतंकवादियों और गाजावासियों को जश्न मनाते हुए दिखाया गया।

इसके अलावा, फुटेज में बेरहमी से क्षत-विक्षत और जलाए गए शव दिखाए गए। रिपोर्ट में कहा गया है, “हमास और उसके सहयोगियों ने घायल महिलाओं, लड़कियों और बुजुर्ग महिलाओं के हिंसक रूप से अपमानित और अपहरण किए जाने के फुटेज भी प्रसारित किए। हमले का समय सुबह-सुबह होने के कारण इनमें से कई पीड़ितों को उनके रात के कपड़ों में ही ले जाया गया, जिससे वे ज्यादा कष्ट महसूस कर रहे थे।”

रिपोर्ट में नोवा संगीत समारोह में बचे एक व्यक्ति का बयान भी शामिल किया गया। उसने बताया कि उन लोगों ने एक महिला को वाहन से बाहर निकाला, उसके कपड़े जबरदस्ती उतार दिए और उसके साथ बलात्कार किया। उन्होंने उसे बार-बार चाकू मारा, जिससे उसकी मौत हो गई। उसकी मृत्यु के बाद भी उन्होंने उसके साथ बलात्कार करना जारी रखा। यह क्रूरता और हिंसा की भयावहता को दर्शाता है।

एक चश्मदीद राज कोहेन ने बताया, “मैंने उन्हें उसके साथ बलात्कार करते देखा। बलात्कार करते समय हमने उसकी चीखें सुनीं। फिर उन्होंने उसकी हत्या कर दी और उसके बेजान हो जाने के बाद भी उसके साथ दोबारा बलात्कार किया। मैंने उन्हें उसके साथ बलात्कार करते देखा।”

यहूदी राज्य को झकझोर देने वाला वह क्रूर हमला

शुरुआती हमलों में दो गर्भवती महिलाएँ, 28 वर्षीय नित्जान रहुम और 23 वर्षीय एस अबू-रशीद भी निशाना बनीं। अबू-रशीद तो बच गईं, लेकिन उनका बच्चा, रहुम और उनका अजन्मा बच्चा, तीनों ही मारे गए। हमले के तुरंत बाद यौन उत्पीड़न के बारे में गवाहों के बयान और विवरण सामने आए।

रिपोर्ट में बताया गया है, “शुरुआती दिनों से ही पीड़ितों, बचाव कर्मियों, चिकित्सा विशेषज्ञों और मुर्दाघर के कर्मचारियों की रिपोर्टों से संकेत मिल रहे थे कि इन हमलों में यौन हिंसा शामिल है। कई पीड़ित को मौत के बाद ही इन अपराधों से मुक्ति मिली। अनेक मामलों में, पीड़ितों की हत्या हमलों के दौरान या बाद में की गई, और उनके शव क्षत-विक्षत, अधजली अवस्था में बरामद किए गए। यह असाधारण क्रूरता से भरी यौन हिंसा के पैटर्न को दर्शाता है।”

रिपोर्ट में एक घटना के बारे में बताया गया है। इसमें कहा गया है, “22 वर्षीय शानी लूक एक पिकअप ट्रक के पीछे मुँह के बल लेटी हुई, आंशिक रूप से नग्न, घायल अवस्था में थी। उसे गाजा की सड़कों पर सशस्त्र अपराधियों ने उसी अवस्था में घुमाया। इस दौरान उसके शरीर पर थूकते और नारे लगाते हुए अपराधी देखे गए।”

हमले के बाद के महीनों में हमास ने अनगिनत वीडियो जारी किए । इनमें निर्दोष बंदी अपनी जान बचाने की गुहार लगाते या शव दिखाते नजर आए। उन्होंने कुछ मामलों में पीड़ितों के परिवार वालों से सीधे संपर्क किया, जिससे उनका दुख और बढ़ गया। इन कार्रवाइयों ने आतंकी हमले के प्रभाव को और बढ़ा दिया, जिससे दर्द और सदमा और भी गहरा गया।

शवों का अंतिम संस्कार करने वाले शेरोन लॉफर के मुताबिक, कई बार इन खूबसूरत युवतियों की आंखों में गोली मारी जाती थी, जिससे उनके चेहरे विकृत हो जाते थे। उनकी मौत इससे नहीं होती थी, बल्कि दिल में गोली लगने से होती थी।

रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र के अनुमान वाले रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। इसमें आतंकवादियों द्वारा किए गए यौन शोषण और हिंसा सहित अपराधों की गंभीरता को रेखांकित किया गया है। इसमें खुलासा किया गया है कि हमास को अगस्त 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव की ब्लैकलिस्ट में शामिल किया गया था, जिसमें उन पक्षों की पहचान की जाती है जिन पर सशस्त्र संघर्ष के दौरान व्यवस्थित बलात्कार और अन्य प्रकार की यौन हिंसा करने या उसके लिए जिम्मेदार होने के पक्के सबूत होते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, “इस सूची में शामिल होने का मतलब यह है कि संयुक्त राष्ट्र ने भी 7 अक्टूबर के हमलों के दौरान और बंधकों के खिलाफ हमास द्वारा किए गए ऐसे उल्लंघनों के पर्याप्त सबूतों की पुष्टि की है।”

आयोग ने अपहरणकर्ताओं को पीड़ितों को नियंत्रित करने, नागरिक क्षेत्रों में घुसपैठ करने और हिब्रू भाषा में निर्देश जारी करने के तरीके बताने वाले विभिन्न सामरिक नियमावली, नोटबुक, चेकलिस्ट, नक्शे, किताबें और दूसरे संसाधनों की जाँच की। इन सामग्रियों में धार्मिक हिंसा और घृणा परोसा गया था।

रिपोर्ट में इस बात पर जोर डाला गया है कि “इन सामग्रियों में अरबी से हिब्रू में अनुवादित वाक्यांशों की सूचियाँ भी शामिल हैं, जिनमें आदेशात्मक और अपमानजनक निर्देश (उदाहरण के लिए पीड़ितों को अपनी पैंट उतारने या अपने कपड़े उतारने, लेट जाने, अपने पैर फैलाने का आदेश देना) शामिल हैं।”

रिपोर्ट के मुताबिक, “इन वैचारिक सामग्रियों में यहूदी लोगों और इजरायली नागरिकों, जिनमें महिलाएँ, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं, के खिलाफ एक अंतर्निहित अमानवीय कथा शामिल थी, जिन्हें कुछ ग्रंथों और बयानों में हिंसा के वैध शिकार के रूप में दर्शाया गया था।” दरअसल हमास यहूदी समुदाय के खिलाफ हिंसा का समर्थन करता है।

इस नरसंहार और घृणित कृत्यों को न केवल फिल्माया गया, बल्कि धार्मिक अभिव्यक्तियों और जोश के साथ महिमामंडित भी किया गया।

इस्लामी आतंकवाद का भयंकर चेहरा

पीड़ितों और गवाहों ने इस्लामी आतंकवाद की कहानी बयान की। नोवा संगीत समारोह में मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने हमले के दौरान सात अन्य लोगों के साथ छिप कर जान बचाई। उसने बताया कि उसने अपने छिपने की जगह के पास तीन अलग-अलग स्थानों से बलात्कार की तीन घटनाओं को देखा।

उन्होंने चीखते-चिल्लाते पीड़ितों को एक-दूसरे को सौंप दिया और फिर उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी और फिर जश्न मनाया। चश्मदीद के मुताबिक, “मुझे नहीं पता कि सामान्य बलात्कार क्या होता है, लेकिन वहाँ जो आवाजें सुनाई दे रही थीं, वे वैसी नहीं थीं। वहाँ हँसी-मज़ाक हो रहा था। चुटकुले चल रहे थे। वे एक-दूसरे को चुटकुले सुना रहे थे। यह सब मजे के लिए किया जा रहा था। वे जश्न मना रहे थे। वे सचमुच इस बात का जश्न मना रहे थे,”

उन्होंने आगे बताया, “एक और घटना यह थी कि मैंने किसी को चिल्लाते हुए सुना, ‘उसे मत छुओ, ऐसा मत करो,’ और फिर उन्होंने उसकी प्रेमिका के साथ उसकी आँखों के सामने बलात्कार किया।” इसके बाद उस जोड़े का भी वही हश्र हुआ।

उसने खुद के सुरक्षित बचने के बाद के मंजर को याद करते हुए कई बातें की, जो उसके साथ बचे एक और व्यक्ति ने पुष्टि की। उसने कहा, “वहाँ एक भी शव ऐसा नहीं था, जिसकी मौत सामान्य तरीके से हुई हो। हर एक शव को यातनाएँ दी गई थीं। लोगों को बाँधकर प्रताड़ित किया गया था। आप देख सकते हैं कि वे प्रतिक्रिया देने में असमर्थ थे। कुछ लोगों के सिर के पिछले हिस्से में गोली लगी थी और उन्हें बाँधा गया था। महिलाओं के हाथ पीछे बाँधे गए थे। और यह स्पष्ट था कि उनके साथ यौन दुर्व्यवहार किया गया था। उनके प्राइवेट पार्ट पर खून, घाव और कटे के निशान थे। एक महिला ऐसी थी, मानो उसका पूरा निचला शरीर फट गया हो।”

एक पुरुष ने भी ऐसा ही अनुभव साझा किया। उसके मुताबिक, कम से कम 5 कट्टरपंथियों ने उसके साथ रेप किया और यातनाएँ दीं। पॉलीग्राफ टेस्ट से इसकी पुष्टि हुई। उसने बताया, “हम पर हर तरह का अत्याचार किया गया। उन्होंने हमारे चेहरे पर थूका, हमें अपमानित किया, यहूदियों के बारे में अपशब्द कहे।

एक समय ऐसा आया जब मुझे सिर जमीन की ओर कर उल्टा खड़ा कर दिया गया। पहले तो मैंने विरोध किया, लेकिन फिर मेरे सिर पर इतनी जोर से मारी कि मुझे लगा जैसे मैं अपना आपा खो बैठा हूँ। जितना ज़्यादा मैंने विरोध किया, उतना ही ज़्यादा उन्होंने मुझे पीटा। उन्होंने मेरे प्राइवेट पार्ट को घायल कर दिया। मुझे बेल्ट से पीटा गया। वे मुझ पर हँसे भी। उनमें से एक ने चाकू निकाला और तरह-तरह की बातों पर हँसने लगा। मैंने उसे छोड़ने की भीख माँगी और कहा कि मुझे अकेला छोड़ दो। मुझे नहीं पता कि उन्होंने ऐसा करने से पहले क्या लिया था, वे जानवरों जैसे थे।”

गवाह ने बताया कि उसने अपने पीछे महिलाओं के सामूहिक बलात्कार की चीखें भी सुनीं। उसके सिर पर बंदूक तान दी और जान से मारने की धमकियाँ देने के साथ-साथ प्राइवेट पार्ट काटने की चेतावनी भी दी। यह अमानवीय व्यवहार तब तक जारी रहा जब तक वह बेहोश नहीं हो गया। उसके साथ क्या हुआ था, उसे नहीं पता।

एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया जो अपने एक दोस्त को बचाने की कोशिश कर रहा था। उसके मुताबिक, “मुझे जीप याद है, उसमें एक महिला का शव था जिसने काले रंग की पोशाक पहनी हुई थी। उसके गाल में गोली लगी थी और वह उसी स्थिति में जम गई थी। उसके कपड़े ऊपर उठी हुई थी और अंडरगार्मेट नहीं पहना था, इसलिए नहीं कि वह जल गया था, बल्कि उसे उतार दिया गया था। उसके पैर फैले हुए थे और प्राइवेट पार्ट खुले हुए थे। उसके पति का शव कार के दूसरी तरफ था, जाहिर तौर पर वह उसका पति ही था। मुझे उस समय यह पता नहीं था। एक और शव था जो राख में तब्दील हो चुका था। वह अब इंसान जैसा भी नहीं लग रहा था,”

एक अन्य व्यक्ति के मुताबिक, “उन्होंने लोगों को कारों से घसीटकर बाहर निकाला। उन्होंने शवों को बेहद क्रूरता से क्षत-विक्षत किया। उन्होंने हथियारों से लोगों को काटा। औजार उनके शरीरों में धँसे हुए थे। हम शायद 50 मीटर और आगे बढ़े। दोनों तरफ पेड़ थे। सब कुछ जल चुका था। शव सड़क के किनारे पड़े थे और था बहुत सारा सामान”।

रिपोर्ट में कहा गया है, “नोवा संगीत समारोह के कुछ बचे हुए कर्मचारियों ने महिला पीड़ितों को देखने की सूचना दी है जो नग्न या आंशिक रूप से नग्न अवस्था में थीं। कुछ मामलों में बिना अंडरवियर के भी थीं। पीड़ित महिलाएँ पैर फैलाकर लेटी हुई थीं और उनके गुप्तांगों पर चोटों के निशान थे।” शव आधे कटे हुए, बेरहमी से क्षत-विक्षत पाए गए और कुछ विशेष स्थानों पर उन्हें एक साथ ढेर करके जला दिया गया था।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “जले हुए शव, झुलसे हुए शव, क्षत-विक्षत शव पूरे इलाके में फैले हुए थे। जली हुई गाड़ियाँ इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त थीं कि कल्पना भी नहीं की जा सकती,”

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “एक स्वयंसेवक ने नग्न नागरिकों के शवों की बरामदगी के मामलों का वर्णन किया, जिनमें एक महिला पीड़ित भी शामिल थी, जिसके शरीर पर गंभीर चोट के निशान थे। एक पुरुष पीड़ित नग्न अवस्था में मिला था जिसके शरीर पर लंबे समय तक पीड़ा और मृत्यु से पहले दुर्व्यवहार के संकेत थे।”

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आतंकवादियों ने किस तरह निर्दयतापूर्वक बंधकों को सताया, घायल किया और यातनाएँ दी। आयोग और विशेषज्ञों द्वारा कई वीडियो का विश्लेषण किया गया, जो उस दिन की क्रूरता को दर्शाते हैं। इनमें एक उदाहरण ऐसा मिला, जिसमें पीड़ितों को मारने से पहले उनके गुप्तांगों में हथियार डाले गए थे।

रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया, “नोवा स्थल पर यौन हिंसा के सबूत, समीक्षा किए गए गवाहों के बयान और फोटो-वीडियों समेत दूसरे दस्तावेजों के आधार पर कहा जा सकता है कि महिलाओं को असाधारण रूप से क्रूर तरीकों से निशाना बनाया गया। इसमें अत्यधिक यौन हिंसा, अंग-भंग और क्रूरता शामिल है, जो दर्शाता है कि उन पर इसलिए हमला किया गया क्योंकि वे महिलाएं थीं और लिंग-आधारित हिंसा हमलों का अहम हिस्सा था। दस्तावेज यह भी दर्शाते हैं कि पुरुष पीड़ितों को भी यौन हिंसा और अंग-भंग का शिकार बनाया गया, जिसमें कपड़े उतारना और जननांगों को निशाना बनाना शामिल है। उन्हें नपुंसक बनाए गए और अपमानित किया गया।”

कुछ फिलिस्तीनियों ने असाधारण हिंसा में दिया आतंकियों का साथ

आयोग ने जो सबूत जमा किए और गवाहों के बयानों की समीक्षा की, उसमें यह बात भी सामने आया कि कई फिलिस्तीनी नागरिकों ने सशस्त्र आतंकवादियों के साथ किबुत्जिमों पर हमले में भाग लिया, जिससे नरसंहार और विनाश ज्यादा हुआ।

एक व्यक्ति ने 9 अक्टूबर को बे’एरी का दौरा करने के बाद बताया, “जब हम अंदर गए, तो वहाँ एक अस्पताल के बिस्तर पर एक शव था। मुझे समझ आया कि वह एक महिला थी। कमरे में चाकू, स्केलपेल, हथौड़ा, कुल्हाड़ी, स्क्रूड्राइवर, औजार और घरेलू उपकरण बिखरे पड़े थे। ये सभी चीजें शव में धंसी हुई थीं। शव पूरी तरह से क्षत-विक्षत था।”

रिपोर्ट के मुताबिक, “किबुत्ज में अन्य स्थानों की तरह ही, महिला पीड़ितों के शव कमर से नीचे पूरी तरह या आंशिक रूप से नग्न थे। उनके हाथ पीछे बंधे हुए थे और उन्हें गोली मारी गई थी। मिशन टीम ने प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी एकत्र की, जिन्होंने बताया कि उन्हें नग्न अवस्था में, हाथ पीछे बंधे हुए और सिर में गोली के घावों वाली महिलाओं के शव मिले थे,”

इसमें आगे कहा गया है, “हालाँकि इन पीड़ितों के खिलाफ यौन हिंसा की पुष्टि इस समय संभव नहीं है, लेकिन उपलब्ध परिस्थितिजन्य जानकारी, विशेष रूप से बार-बार मिलने वाली महिला पीड़ितों के नग्न अवस्था में, बंधे हुए और गोली मारे जाने की घटना, यह संकेत देती है कि यौन हिंसा, अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार की गई थी।” लोगों को उनके निहत्थे परिवारों की उपस्थिति में या तो गोली मारकर हत्या कर दी गई या उनका अपहरण कर लिया गया।

संघर्ष में यौन हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि ने कहा, “यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि किबुत्ज़ रीम में यौन हिंसा हुई, जिसमें बलात्कार भी शामिल है। इसमें किबुत्ज़ रीम के प्रवेश द्वार पर बम शेल्टर के बाहर एक महिला के साथ हुआ बलात्कार भी शामिल है, जिसकी पुष्टि गवाहों के बयानों और डिजिटल सामग्री से हुई है। संयुक्त राष्ट्र के जाँच आयोग (स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय जांच आयोग) ने भी किबुत्ज में कई महिलाओं और पुरुषों के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों को दर्ज किया है।”

इसके अलावा, हमास द्वारा किबुत्ज नाहल ओज पर हमले के बाद जारी किए गए वीडियो में एक युवा छात्र के साथ दुर्व्यवहार और उसके आंशिक रूप से नग्न शरीर को दर्शाया गया था।

लगातार आ रही भयावह दृश्यों ने रोंगटे खड़े किए

हालाँकि मुख्य निशाना इजरायल के नागरिक और यहूदी थे, फिर भी इजरायली सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।

रिपोर्ट में कहा गया है, “सैन्य ठिकानों पर हमले में हिंसा चरम पर दिखी। यौन यातना, शवों को जलाना और अपमानित करना, अंग-भंग करना, जननांगों को काटना और सिर धड़ से अलग करना शामिल है।” आयोग ने वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य सामग्री के माध्यम से भी इसकी पुष्टि की।

इसमें बताया गया, “अन्य हमला वाली जगहों की तरह, इन स्थानों पर भी यौन और लिंग आधारित हिंसा और पीड़ितों की हत्या कर दी गई। हालाँकि हमास के अपने दस्तावेजों से मिले साक्ष्य, बचे और रिहा किए गए बंधक, गवाहों के बयान से पता चलता है कि इन स्थलों पर पुरुषों और महिलाओं दोनों के खिलाफ यौन और लिंग आधारित हिंसा की घटनाएँ हुईं।”

गवाहों के बयानों के मुताबिक, प्रत्यक्षदर्शियों ने भयानक दृश्य देखे, जैसे कि महिला पीड़ितों के चेहरे जानबूझकर विकृत और क्षत-विक्षत किए गए थे, शरीर खून से लथपथ थे और महिलाओं के गुप्तांगों में गोलियां मारी गई थीं। रिपोर्ट में कहा गया है, “गवाहों ने मुर्दाघरों में महिला सैनिकों के शवों की स्थिति का भी वर्णन किया, उनके कपड़े और पैंट बुरी तरह फटे हुए थे और शवों पर ऐसे घाव थे, जो मृत्यु से पहले और मृत्यु के बाद दोनों ही समय अत्यधिक हिंसा के संकेत देते थे।”

इमारत के बाहर छिपी एक अधिकारी ने किसी के साथ बलात्कार होने की आवाज सुनने का दावा किया। बाद में बाहर आकर उसने एक महिला सैनिक का नग्न शरीर देखा और उसे ढँक दिया। उसने यह भी कहा कि उसने एक पुरुष का शव देखा जिसका गुप्तांग क्षत-विक्षत था।

संयुक्त राष्ट्र जाँच आयोग ने जो वीडियो जारी किया था, उसमें छह अपराधी एक दीवार के पास खड़े दिखाई दे रहे हैं। फर्श पर चार शव पड़े हैं। एक महिला का शव आंशिक रूप से धुंधला है और ऐसा प्रतीत होता है कि उसे सफेद चादर से ढका गया है। धुंधला होने के बावजूद, शरीर का निचला हिस्सा नग्न दिखाई देता है। एक अन्य वीडियो में अपराधी उसी महिला के ऊपर खड़े होकर ‘ईश्वर महान है’ चिल्ला रहे हैं।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “उनकी फोरेंसिक समीक्षा हत्याओं के पैमाने और पीड़ितों पर किए गए अत्यधिक बर्बरता को रेखांकित करती है। कई शवों की स्थिति यौन विकृति के पैटर्न को बताती हैं साथ ही क्रूरता को उजागर करती है।”

दूसरी ओर गवाहों ने खुलासा किया, “महिला पीड़ित खून से लथपथ, फटे कपड़ों में या आंशिक रूप से नग्न अवस्था में, केवल खून से सने हुए अंडरवियर पहने हुए पहुंचीं,” उन्होंने आगे बताया कि “महिला सैनिकों को गुप्तांग, योनि या स्तन में गोली मारी गई थी। ऐसा प्रतीत होता है कि पीड़ितों के एक ग्रुप का सुनियोजित तरीके से जननांगों को निशाना बनाया गया।”

एक गवाह माना है कि उसने महिला कर्मियों के ऐसे शव देखे थे, जिन पर यौन हिंसा के सबूत थे। कई के गुप्तांगों पर घाव थे और उसने ऐसे शव का वर्णन किया जिन पर यौन शोषण के संकेत थे। इनमें हड्डियों के फ्रैक्चर, शरीर में डाली गई वस्तुएँ, साथ ही ऐसे शव जिनके जननांगों को काटकर अलग किए गए थे, शामिल थे।”

इसमें बताया गया है कि प्रारंभिक बचाव दल ने यह भी बताया कि महिलाओं के शव नग्न अवस्था में अलग-अलग कमरों में रखे गए थे, जिन पर शारीरिक शोषण और यौन हिंसा के निशान थे।”

संयुक्त राष्ट्र जांच आयोग ने भी गवाहों द्वारा बताई गई ऐसी ही घटनाओं को दर्ज किया। एक व्यक्ति ने बताया, “महिलाओं के साथ क्रूरता की गई थी और यह स्पष्ट था कि उनके साथ क्या हुआ था। जब हमने उन्हें पाया तो वे अलग-थलग थीं, उनके कपड़े उतार दिए गए थे और वे आत्मसमर्पण की स्थिति में थीं।”

पैथोलॉटिस्ट ने पाया कि जननांगों में आग लगाने के लिए ज्वलनशील पदार्थों का इस्तेमाल किया गया होगा, क्योंकि कई शवों, जिनमें अधिकतर महिलाएं थीं, के गुप्तांगों पर ‘जलने’ के सबूत थे।

अपहरण के बाद नाबालिग बंधकों को भी यौन शोषण सहना पड़ा

कमीशन की जाँच के मुताबिक, गाजा में बंधक बना कर रखे गए लोगों के साथ भयानक क्रूरता की गई थी। उनके साथ यौन हिंसा का घृणित रूप देखने को मिला। गवाहों के बयान , चिकित्सीय जाँच रिपोर्ट और रिसर्च से पता चलता है कि यौन हिंसा अपहरण के पहले दिन से लेकर उनकी रिहाई या हत्या तक, हर दिन किए गए।

7 अक्टूबर को अगवा किए गए और बाद में रिहा किए गए लगभग सभी बंधकों ने अपनी कैद के दौरान यौन और लिंग आधारित हिंसा की बात कही। बंधकों के बयानों से पता चला कि घरों, टनेल और अन्य ठिकानों पर, जहाँ इन्हें अक्सर रखा जाता था, वहाँ अत्याचार किए जाते थे और यौन उत्पीड़न होता था।

एक पीड़िता ने बताया, “वे मुझे एक कमरे में ले गए। कमरे के दरवाजे पर दो आदमी बंदूकें लिए खड़े थे। एक आदमी ने मेरे सारे कपड़े उतारना शुरू कर दिया। एक ने मेरे जूते उतारे, दूसरे ने मेरी बालियां उतारीं और तीसरे ने मेरे शरीर से गहने निकाल लिए। लगभग 15 लोग एक साथ मुझे छू रहे थे, जब तक कि उन्होंने मेरे सारे कपड़े नहीं काट दिए। और फिर मैं वहां नग्न पड़ी थी, पूरी तरह नग्न। ऐसा लगा जैसे मैं अपने शरीर से बाहर निकल गई हूँ, जैसे मैं सब कुछ ऊपर से देख रही हूँ।”

उसका अपहरणकर्ताओं ने बार-बार यौन उत्पीड़न किया। उसे बताया गया कि इजरायल में उसे मृत मान लिया गया है और वह अपना बाकी जीवन एक यौन दासी के रूप में बिताएगी। गाजा में 482 दिनों तक रहीं एक अन्य पीड़िता ने भी इसी तरह के दर्दनाक अनुभव का वर्णन किया। रिपोर्ट में बताया गया है, “उसने लंबे समय तक अकेली भूखे रहने और शारीरिक शोषण सहने की जानकारी दी। उसने बताया कि बार-बार हुए यौन उत्पीड़न और कैद की स्थितियों के कारण उसने कई बार आत्महत्या करने का प्रयास किया।”

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है, “बंधक बनाए गए पुरुष सदस्यों को भी यौन हिंसा, यौन यातना और यौन अपमान का शिकार होना पड़ा।” इसमें आगे बताया गया है, “वापस लौटे एक ही परिवार के दो नाबालिग बंधकों ने बताया कि उन्हें एक-दूसरे के साथ यौन क्रियाएं करने के लिए मजबूर किया गया था। अपहरणकर्ताओं ने कथित तौर पर उन्हें अपने कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया और फिर उनके गुप्तांगों को छुआ और कोड़े मारे।”

रिपोर्ट में आतंकवादियों द्वारा बंधकों के साथ की गई यौन हिंसा और दुर्व्यवहार की भयावह कहानियाँ थीं। उन्हें इतनी बुरी तरह पीटा गया कि वे बेहोश हो गए। इन भयानक कृत्यों को दस्तावेजों में दर्ज किया गया। रिपोर्ट में खुलासा हुआ, “लौट रहे कई बंधकों ने बताया कि कैद के दौरान उन्हें और अन्य कैदियों को रोने या आवाज निकालने की मनाही थी। कुछ मामलों में यौन शोषण किए जाने के बाद महिलाओं को मुस्कुराने और खुश दिखने के लिए कहा गया था।

यह रिपोर्ट हमले की 10000 से अधिक तस्वीरों और वीडियो क्लिप के साथ-साथ पीड़ितों, गवाहों, छुड़ाए गए बंधकों, विशेषज्ञों और परिवार के सदस्यों के साथ 430 से अधिक आधिकारिक और अनौपचारिक साक्षात्कारों, बयानों और मुलाकातों पर आधारित है। अमेरिकी तकनीकी कार्यकारी और समाजसेवी शेरिल सैंडबर्ग, जिन्होंने हमास के दरिंदों द्वारा किए गए यौन शोषण के बारे में दुनिया को बताया है और पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन, दोनों ने इस रिपोर्ट के निष्कर्षों का समर्थन किया है।

आयोग की अध्यक्ष कोचाव एल्कायम-लेवी ने जेरूसलम पोस्ट से बात करते हुए रिपोर्ट को लेकर कहा कि उन्होंने पीड़ितों की वीडियो रिकॉर्डिंग इसलिए की, ताकि दुनिया को पता चले कि क्या हो रहा है। हमें सब कुछ उजागर करना बेहद जरूरी लगा। यह असाधारण क्रूरता, यौन आतंक था, और मुझे लगता है कि इसका एक महत्वपूर्ण पहलू डिजिटल दस्तावेजीकरण था यानी अपराधों का महिमामंडन किया जाना।

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Rukma Rathore
Rukma Rathore
Accidental journalist who is still trying to learn the tricks of the trade. Nearing three years in the profession.

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