Friday, November 27, 2020
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‘सीरिया की जेलों में बंद ISIS जिहादियों को बिना किसी मुकदमे के दी जा सकती है फाँसी’

असद की इस टिप्पणी का ज़िक्र पेरिस मैच पत्रिका में उनके एक साक्षात्कार में की गई थी। सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेस, जिन्होंने मार्च में अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन की मदद से ISIS को हराया था, वर्तमान में 2,000 विदेशियों सहित 10,000 से अधिक आतंकवादियों को पकड़ रखा है।

सीरिया में जेलों में बंद जिहादियों को बिना किसी मुक़दमे के फाँसी की सज़ा दी जा सकती है। राष्ट्रपति बशर अल-असद ने कहा कि वह विशेष आतंकवादी अदालतें स्थापित कर रहे हैं, जहाँ क़ैदियों को ‘सीरियाई क़ानून’ के अधीन किया जाएगा। सीरिया में इस्लामिक स्टेट (IS) का सदस्य होने पर फाँसी की सज़ा का प्रावधान है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, हज़ारों क़ैदियों को गुपचुप तरीके से कुख्यात सैदनया जेल के अंदर दमिश्क के पास मार दिया गया है। कहा जाता है कि यातना और भुखमरी से हज़ारों लोग वहाँ मारे गए थे।

क़ैदियों को नियमित रूप से बेरहमी से पीटा जाता है, उन पर विद्युत और यौन हमले किए जाते हैं। कुछ को जानवरों की तरह काम करने और एक दूसरे को मारने तक के लिए मजबूर किया गया।

असद की इस टिप्पणी का ज़िक्र पेरिस मैच पत्रिका में उनके एक साक्षात्कार में की गई थी। सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेस, जिन्होंने मार्च में अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन की मदद से ISIS को हराया था, वर्तमान में 2,000 विदेशियों सहित 10,000 से अधिक आतंकवादियों को पकड़ रखा है।

ख़बर के अनुसार, अधिकांश सीरियाई और इराक़ी हैं, जिन्हें जेलों के भीतर रखा जा रहा है, जिनमें तथाकथित जिहादी जैक सहित लगभग 2,000 विदेशी शामिल हैं।

अक्टूबर में, एक आतंकी को टीवी समाचार रिपोर्ट में सीरियाई नरकहोल जेल की फ़र्श पर धमाके करते देखा गया था। उसे उसके माता-पिता ने भी देखा था। जैक लेट्स नाम के इस शख़्स का फुटेज भी सामने आया था, जिसमें उसने ख़ुद को “ब्रिटेन का दुश्मन” घोषित कर दिया था। 23 वर्षीय जैक ने सीरिया में ISIS में शामिल होने के लिए एक आलीशान मध्यवर्गीय जीवन छोड़ दिया था। लेकिन, उसे कुर्द बलों द्वारा पकड़ लिया गया था।

पकड़े जाने के बाद, उसने नम्रतापूर्वक अपने ऑक्सफ़ोर्ड शायर घर में यह कहते हुए वापस जाने की गुहार लगाई कि उसका “ब्रिटेनियों को उड़ाने का कोई इरादा नहीं है।”

हालाँकि, ब्रिटेन लौटने की उसकी संभावनाओं पर ज़ोरदार प्रहार हुआ, जब एसडीएफ ने अमेरिका द्वारा त्याग दिए जाने के बाद मदद के लिए असद का रुख़ किया। अधिकांश यूरोपीय देश अपने नागरिकों को वापस लेने से इनकार कर रहे हैं और इराक में कई फ्रांसीसी ISIS क़ैदियों को पहले ही मौत की सज़ा दी जा चुकी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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