Saturday, October 23, 2021
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बैंक, दवा और हथियार बनाने वाली कंपनी… सबमें घुसे हैं चायनीज, भारत में भी: 19.5 लाख लोगों के डेटा लीक से खुलासा

लीक डेटा कहता है कि चीनी वामपंथी Pfizer और Astrazeneca जैसी कंपनियों में भी काम कर रहे हैं। ये दोनों ही कंपनी कोरोना वैक्सीन तैयार करने में लगी हुई है। भारत और अन्य देशों में इनकी घुसपैठ दूतावासों के जरिए...

चीन की वामपंथी पार्टी के लोग अब विदेशों में भी अपनी पैठ बना रहे हैं। और यह काम वो विभिन्न संगठनों में तकनीकी दक्षता, कौशल या फिर राजनीतिक साठ-गाँठ के जरिए कर रहे हैं। 19 लाख 50 हजार चायनीज वामपंथियों की लीक हुई डेटाबेस से यह जानकारी सामने आई है।

चायनीज कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के रजिस्टर्ड और कट्टर कार्यकर्ताओं की दुनिया के टॉप संस्थानों में घुसपैठ का अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि वो ब्रिटिश राजदूत ऑफिस, यूनिवर्सिटी और कई नामी कंपनियों तक में ये काम कर हैं।

हाल में सीसीपी के रिकॉर्ड लीक होने के बाद पता चला है कि इनकी घुसपैठ तो भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के वाणिज्य दूतावासों में भी हैं। वो भी छोटे-मोटे पद पर नहीं बल्कि प्रतिष्ठित पदों पर। जैसे कहीं ये सीनियर पद पर हैं तो कहीं विशेषज्ञ के तौर पर या फिर कहीं सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। बेहद सुनियोजित ढंग से इन्हें पिछले एक दशक से इन दूतावासों में शंघाई के जरिए घुसा कर रखा गया है।

लीक हुई लिस्ट में इन चीनी वामपंथियों की पोजिशन (पद), बर्थ डेट (जन्म तारीख) और जातीयता जैसी जानकारियाँ शामिल हैं। द ऑस्ट्रेलियन की पड़ताल बताती है कि कम से कम 10 वाणिज्य दूतावासों में वरिष्ठ राजनीतिक और सरकारी मामलों के विशेषज्ञ, क्लर्क, आर्थिक सलाहकार और कार्यकारी सहायक के रूप में सीसीपी सदस्य कार्यरत हैं।

विदेशी विशेषज्ञों की मानें तो ये स्टेट स्पॉन्सर जासूसों का समूह हो सकता है। लीक डेटा कहता है कि सीसीपी वामपंथी Boeing, Pfizer और Astrazeneca जैसी कंपनियों में भी काम कर रहे हैं। इनमें Boeing अमेरिकन कंपनी है, जो रक्षा संबंधी कॉन्ट्रैक्ट लेती है जबकि Pfizer और Astrazeneca दवाइयों की कंपनी है, जो कोरोना वैक्सीन तैयार करने में लगातार लगी हुई हैं।

ऑस्ट्रेलिया की मल्टीनेशनल बैंकिंग कंपनी, द ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड बैंकिंग ग्रुप, की भी कम से कम एक ब्रांच में सीसीपी सदस्यों की घुसपैठ है। बैंकिंग कंपनी का कहना है कि हालाँकि वह कर्मचारियों की राजनीतिक झुकाव में हस्तक्षेप नहीं करता और इस बात का भी कोई सबूत नहीं है कि सीसीपी का हर सदस्य चीनी सरकार का जासूस है, लेकिन अब ये नए खुलासे सुरक्षा संबंधी चिंता को बढ़ाने वाले हैं।

सीसीपी के साथ वर्तमान में 92 मिलियन (9 करोड़ 20 लाख लोग) सदस्य जुड़े हुए हैं और वह पार्टी के हित में काम करने की कसमें खाते हैं। साथ ही साथ खुद को पार्टी के लिए कुर्बान करने के लिए भी हमेशा तत्पर रहते हैं। ऐसे में वॉल्वो, सिटीबैंक, एचएसबीसी, आईकेईए, फॉक्सवेगन, जैगुआर, लैंड रोवर और मर्सेडीज़ बेंज जैसी मशहूर कंपनियों में इनकी भूमिका पाई गई है।

लीक डेटा बताता है कि शंघाई के मिशन में कई देशों में सीसीपी सदस्य नियुक्त किए गए हैं। इसके अलावा रिपोर्ट कहती है कि विदेश मंत्रालय और व्यापार विभाग सीधे चीनी सरकारी एजेंसी शंघाई के माध्यम से स्टाफ को रखता है। चीन की सरकारी एजेंसी, द शंघाई फॉरेन एजेंसी सर्विस डिपार्टमेंट के पास कम से कम 12 सक्रिय सीसीपी ब्रांच हैं, जिनमें 249 सदस्य हैं।

इस एजेंसी की वेबसाइट जुलाई 2020 से शंघाई में ऑस्ट्रेलियाई, यूएस, इथियोपियाई, ब्राजील, चिली और हॉन्गकॉन्ग के वाणिज्य दूतावासों के लिए नौकरी को सूचीबद्ध कर रही है। अपने रेफरेंस से इन जगहों पर नियुक्तियाँ करती है।

द ऑस्ट्रेलियन की रिपोर्ट में सैमुअल आर्मस्ट्रॉन्ग के बयान का हवाला देते हुए इस एजेंसी पर संदेह जताया गया है कि ये एक सुनियोजित और स्टेट स्पॉन्सर जासूसी समूह है। इसके अलावा एक अन्य एजेंसी ने भी कहा है कि जितने भी सीसीपी सदस्य विदेशी दूतावासों में काम कर रहे हैं, वह सब जासूस हैं।

लीक हुए डेटाबेस से यह भी पता चला कि एक CCP सदस्य ने व्यापार और अर्थशास्त्र के नीति सलाहकार के रूप में चार साल तक शंघाई में न्यूजीलैंड के वाणिज्य दूतावास के लिए काम किया। बाकी, 6 सीसीपी सदस्यों ने शंघाई में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास में एक राजनीतिक विशेषज्ञ, एक पर्यवेक्षक और एक सहायक सहित विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।

इसके अलावा शंघाई में ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास में वर्तमान में एक वरिष्ठ अधिकारी है, जो द ऑस्ट्रेलियन के अनुसार, डिप्लोमैटिक कवर के तहत काम करने वाले एमआई 6 अधिकारियों के पास काम करता है। बता दें कि M16 ब्रिटिश की खूफिया एजेंसी है।

ऐसे ही स्विस एंबेसी में भी व्यापार अधिकारी और स्टेशन का डिप्टी हेड सीसीपी सदस्य है जबकि जर्मन दूतावास में सीसीपी सदस्य एक क्लर्क के रूप में है। इटली के दूतावास में 12 साल से एक सीसीपी सदस्य है। वहीं साउथ अफ्रीका में एक सीसीपी सदस्य करीब 16 साल बिता चुका है। एक अन्य सीसीपी सदस्य ने वरिष्ठ राजनीतिक और सरकारी मामलों के विशेषज्ञ होने के नाते यूएस दूतावास में 8 साल बिताए और इसके बाद वह ब्रिटेन दूतावास चला गया।

रिपोर्ट का कहना है कि सीसीपी सदस्यों का डेटा लीक होने से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कार्य करने के तरीके का खुलासा हुआ है कि कैसे वह कंपनियों और सरकारी एजेंसियों में अपनी ब्रांच स्थापित कर रहे हैं।

बता दें कि ये डेटाबेस साल 2016 के अप्रैल में शंघाई सर्वर से कलेक्ट किया गया था। यही लीक डेटा बाद में कई मीडिया समूहों, जैसे- द ऑस्ट्रेलियन, द मेल ऑन संडे इन ब्रिटेन, डि स्टैंडर्ड इन बेल्जियम और स्वीडन जर्नलिस्ट में बाँटा गया और इसी के आधार पर अब यह जानकारी आई है।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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