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नाइजीरिया के चर्च में ‘मुस्लिम आतंकियों’ ने ईसाइयों पर ताबड़तोड़ बरसाई गोलियाँ: 50 की मौत, कई घायल, पादरी का भी हुआ अपहरण

चर्च में हुए भीषण हमले को लेकर सांसद अडेमी ओलेमी का मानना है कि ये हमला मुस्लिम फुलानी आतंकवादियों द्वारा किया गया था। इन आतंकियों को डकैत भी कहा जाता है। इन आतंकियों ने लगातार उत्तरी नाइजीरिया समेत देश के कई हिस्सों को दहलाया है।

अफ्रीकी देश नाइजीरिया (Nigeria Church Attack) से दुखद घटना प्रकाश में आई है। जहाँ दक्षिण-पश्चिमी नाइजीरिया के ओवो शहर में स्थित कैथोलिक चर्च में रविवार (5 जून 2022) को बंदूकधारियों ने प्रेयर के दौरान जमकर गोलीबारी की, जिसमें कम से कम 50 लोगों की मौत (Death) हो गई। हमलावरों ने चर्च के अंदर धमाका भी किया। विधायक ओगुनमोलासुयी ओलुवोले ने कहा कि इस हमले में मारे गए लोगों में बच्चे भी शामिल हैं।

ओलुवोले के मुताबिक, ओवो के इतिहास में पहले कभी ऐसी घटना नहीं हुई। नाइजीरिया के निचले विधायी सदन में ओवो क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले एडेलेगबे टिमिलीन ने कहा कि हमलावरों ने चर्च के मुख्य पादरी का भी अपहरण कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 11:30 बजे घटी। हालाँकि, हमलावरों का पता नहीं चल सका है। घटना स्थल से जो तस्वीरें सामने आई हैं, उनमें वहाँ पर खून से लथपथ लोगों को जमीन पर पड़े थे।

इस नृशंस हमले की कड़ी निंदा करते हुए नाइजीरियाई राष्ट्रपति मुहम्मदु बुहारी ने कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए ये देश बुरे लोगों के सामने कभी नहीं झुकेगा। अंधकार कभी भी प्रकाश पर विजय नहीं पा सकेगा। उन्होंने कहा कि आखिर में नाइजीरिया ही जीतेगा।

अधिकारियों का कहना है कि रविवार को पेंटेकोस्ट के दिन ईसाई धर्म को मानने वाले चर्च में इकट्ठे हुए थे। उसी दौरान उन्हें निशाना बनाया किया। घायलों का इलाज करने वाले डॉक्टरों, स्थानीय अधिकारियों और स्वयंसेवकों ने कहा कि मरने वालों की संख्या कम से कम 50 थी। जबकि इस हमले में दर्जनों लोग घायल भी हुए हैं।

फुलानी आतंकियों पर शक

कैथोलिक चर्च में हुए भीषण हमले को लेकर सांसद अडेमी ओलेमी का मानना है कि ये हमला मुस्लिम फुलानी आतंकवादियों द्वारा किया गया था। इन आतंकियों को डकैत भी कहा जाता है। इन आतंकियों ने लगातार उत्तरी नाइजीरिया समेत देश के कई हिस्सों को दहलाया है।

इस आतंकी संगठन का उदय चरवाहों और स्थानीय समुदायों के बीच जमीन तक पहुँच को लेकर और खेतों पर अतिक्रमण के बीच ऐतिहासिक संघर्ष के कारण हुआ है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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