Saturday, October 23, 2021
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पैगंबर मोहम्मद के कार्टून पर टीचर सस्पेंड क्यों, नौकरी दो उन्हें… कट्टरपंथियों के खिलाफ हजारों लोगों का अभियान

पैगंबर मोहम्मद के कार्टून दिखाने पर मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ और प्रदर्शन के कारण टीचर के सस्पेंड कर दिया गया। मौत के खतरे के बाद टीचर को अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।

ब्रिटेन के वेस्ट यॉर्कशायर (West Yorkshire) के एक स्कूल में व्यंग्य मैग्जीन शार्ली एब्दो (Charlie Hebdo) में प्रकाशित हुए पैगंबर मोहम्मद के विवादित कार्टून दिखाने पर मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ ने वहाँ स्कूल के बाहर प्रदर्शन करते हुए उस टीचर के सस्पेंशन की माँग की। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि स्कूल के हेडमास्टर को स्वयं इस संबंध में माफी माँगनी पड़ी और प्रदर्शनकारियों की बात मानते हुए टीचर को निलंबित कर दिया गया। वहीं मौत के खतरे के बाद उसे अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक अब उनके कुछ छात्रों ने उनकी नौकरी बचाने के लिए एक याचिका शुरू की है, जिस पर 13,000 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। उनकी नौकरी बचाने के अभियान का समर्थन करने वाले लोगों ने उन्हें एक ‘अच्छे इंसान’ और ‘मेहनती शिक्षक’ बताते हुए कहा कि वे ‘सभी धर्मों का सम्मान करने वाले’ हैं। अन्य ने जोर देकर कहा कि स्कूल को उनके द्वारा खड़े होना चाहिए, उन्हें ‘कट्टरपंथी’ द्वारा ‘तंग’ किया जा रहा है।

एक मुस्लिम माता-पिता ने याचिका पर हस्ताक्षर किया, जिसका नाम मोहम्मद जे था। उन्होंने कहा, “मैं स्कूल और संबंधित शिक्षक के लिए अपना समर्थन देना चाहूँगा। उन्होंने मेरी बेटी को पढ़ाया है और वह उनके बारे में बहुत बात करती है। मुझे उन्हें उसे फिर से पढ़ाते हुए देखने में कोई संकोच नहीं होगा। मुझे विश्वास है कि शिक्षक का कोई अपराध नहीं था और मुझे उम्मीद है कि जाँच के बाद वह स्कूल में वापस लौट आएँगे।”

एक अन्य हस्ताक्षरकर्ता ने कहा, “उनसे कई छात्र प्यार करते हैं, जिसमें मुस्लिम और गैर मुस्लिम दोनों हैं। बाटली ग्रामर अपने खुद के एक के लिए खड़े हो जाओ। एक अच्छे शिक्षक को मत खोओ।”

शिक्षा सचिव गेविन विलियमसन ने विरोध प्रदर्शन की निंदा की है और कहा है कि स्कूलों को कक्षा में ‘चुनौतीपूर्ण या विवादास्पद’ सामग्री दिखाने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए। समुदाय के सचिव रॉबर्ट जेनरिक ने कहा कि यह बहुत परेशान करने वाला था कि शिक्षक को छिपने के लिए मजबूर किया गया है।

शिक्षा विभाग के प्रवक्ता ने इस प्रकार धमकियाँ देने वाले और कोरोना वायरस प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले प्रदर्शन की आलोचना की और इसे किसी भी कीमत पर अस्वीकार्य कहा। प्रवक्ता ने कहा कि विद्यालय अपने पाठ्यक्रम में, मुद्दे, विचार और सामग्रियों को शामिल करने के लिए स्वतंत्र हैं चाहे वे चुनौतीपूर्ण हों या फिर विवादित… उन्हें विभिन्न आस्था और विश्वासों के लोगों के बीच सम्मान और सहिष्णुता को बढ़ावा देने की आवश्यकता के साथ इसे संतुलित करना चाहिए, जिसमें यह तय किया जाए कि कक्षा में किस सामग्री का उपयोग करना है।

शिक्षक के पड़ोसी ने बताया कि उन्होंने कल सुबह 9.30 बजे अपना घर छोड़ दिया। वो एक काले वाहन में सवार होकर चले गए। उनकी खुद की गाड़ी अभी भी घर के पास खड़ी है। वे जल्दी में लग रहे थे और वे कल रात वापस नहीं आए। 

द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, बैटले ग्रामर स्कूल के हेड गैरी किबल ने, मजहबी शिक्षा का पाठ पढ़ाने के दौरान एक टीचर द्वारा इस्तेमाल शार्ली एब्दो के आपत्तिजनक कार्टून पर छात्रों के अभिभावकों से माफी माँगी। किबल ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह इस मामले में आगे पड़ताल बैठाएँगे। 

अभिभावकों को भेजे गए ईमेल में उन्होंने लिखा, “जाँच में ये साफ है कि पाठ पढ़ाने के दौरान इस्तेमाल किए गए संसाधन बिलकुल गलत थे और स्कूल के एक समुदाय के सदस्यों को आहत करने वाले थे। इस गलती के लिए हम ईमानदारी से और पूर्णत: माफी माँगते हैं।”

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले पेरिस में 47 वर्षीय इतिहास के एक टीचर सैमुअल पैटी का स्कूल के बाहर गला रेत दिया गया था। उनकी गलती बस इतनी थी कि क्लास में ‘शार्ली एब्दो’ अख़बार में प्रकाशित पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाया था। इसी बात पर हत्यारे ने अल्लाह हू अकबर चिल्लाते हुए घटना को अंजाम दिया था।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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