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नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री बनीं सुशीला कार्की, राष्ट्रपति के सामने ली पद की शपथ: संसद भंग करने की रखी थी शर्त, जानें-पूर्व चीफ जस्टिस के बारे में सब कुछ

नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने शुक्रवार रात को शीतल निवास में शपथ ले ली और वे अंतरिम प्रधानमंत्री बन गईं। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संसद भंग कर दी और कार्की को जिम्मेदारी सौंपी।

नेपाल में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच बड़ी खबर आ गई है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने शुक्रवार (12 सितंबर 2024) की रात करीब 9.30 बजे शीतल निवास में शपथ ग्रहण कर ली है और वे अंतरिम प्रधानमंत्री बन गई हैं। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संसद भंग करने का फैसला लिया और कार्की को अंतरिम सरकार का नेतृत्व सौंप दिया। संविधान की धारा 61 के तहत यह नियुक्ति की गई है, जो राष्ट्रपति के अधिकारों से जुड़ी है।

राष्ट्रपति पौडेल ने सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल के साथ कई दौर की बैठकों के बाद यह फैसला लिया। पौडेल निवास पर हुई आखिरी मीटिंग में कार्की को बुलाया गया और उन्होंने जिम्मेदारी स्वीकार कर ली। जेन-जेड कोर कमेटी ने कहा कि वे कैबिनेट में जगह नहीं लेंगे, बल्कि सरकार की निगरानी करेंगे।

शपथग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति रामसहाय यादव, प्रधान न्यायाधीश प्रकाश सिंह रावत मौजूद रहे। वहाँ पर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ बाबूराम भट्टराई, प्रधान सेनापति जनरल अशोक राज सिग्देल, मुख्य सचिव एकनारायण अर्याल भी मौजूद रहे। इसके अलावा काठमांडू के मेयर बालेन शाह भी शपथग्रहण समारोह में उपस्थित रहे।

सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं। 2016 में उन्होंने यह पद संभाला था और अपने छोटे से कार्यकाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। वे ईमानदार और निष्पक्ष न्याय के लिए जानी जाती हैं। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएट करने वाली कार्की को सभी प्रमुख राजनीतिक दलों और जेन-जेड समूहों की सहमति से चुना गया।

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नई अंतरिम सरकार से भारत-नेपाल रिश्ते मजबूत होने की उम्मीद है। रात 12 बजे से इमरजेंसी लगाने की घोषणा हो सकती है। जेन-जेड ने 6 महीने में चुनाव कराने की माँग की है, जिसे स्वीकार किया गया। नेपाल में स्थिरता लौटने की उम्मीद है, लेकिन हिंसा और विदेशी साजिशों की आशंका बनी हुई है।

गौरतलब है कि जेन-जेड युवा प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार, सोशल मीडिया बैन और बेरोजगारी के खिलाफ 8-9 सितंबर को हिंसक विरोध प्रदर्शन किए थे। इन प्रदर्शनों में संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली के आवास पर आग लगा दी गई थी। अब तक 51 लोगों की मौत हो चुकी है और 1000 से ज्यादा लोग घायल हैं। जेल ब्रेक में 15,000 कैदी फरार हो गए हैं, जिससे काठमांडू में कर्फ्यू लगा हुआ है।

इस बीच, पूर्व पीएम ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ने संसद भंग का विरोध किया है। पार्टी महासचिव शंकर पोखरेल ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और समर्थकों से सड़कों पर उतरने की अपील की।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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