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तालिबान ने ह्यूमन राइट्स विभाग को भंग किया, संविधान वाले डिपार्टमेंट पर भी लटकाया ताला: कहा – ये सब गैर जरूरी

“ये विभाग बहुत जरूरी नहीं थे और इन्हें बजट में शामिल नहीं किया गया था। इसलिए इन्हें भंग कर दिया गया है।”

तालिबान ने अफगानिस्तान में मानवाधिकार संस्थानों को खत्म करने का फैसला किया है। इसके अलावा 4 प्रमुख विभागों पर भी तालिबान ने ताला लटका दिया है। मानवीय अपराधों के लिए कुख्यात तालिबान की सरकार के इस फैसले पर सवाल उठ रहे हैं। तालिबान सरकार का कहना है कि उसके पास फंड की कमी है, ऐसे में इन विभागों का संचालन कर पाना आसान नहीं होगा। तालिबान ने कहा कि देश घाटे का सामना कर रहा है, इसलिए इन्हें बंद किया गया है। यही नहीं, तालिबान ने मानवाधिकार आयोग जैसे विभाग को गैर-जरूरी करार दिया है।

तालिबान सरकार के उप-प्रवक्ता इनामुल्लाह समांगनी ने कहा, “ये विभाग बहुत जरूरी नहीं थे और इन्हें बजट में शामिल नहीं किया गया था। इसलिए इन्हें भंग कर दिया गया है।” मानवाधिकार आयोग के अलावा जिस विभाग को भंग किया गया, वह है संविधान को लागू करने के लिए बना आयोग। तालिबान ने बीते साल अगस्त में अफगानिस्तान की सत्ता सँभाली थी।

तब तालिबान ने दावा किया था कि वह अपने गवर्नेंस मॉडल में उदारता को शामिल करेगा। हालाँकि मानवाधिकार और संविधान से जुड़े विभागों को भंग कर तालिबान ने अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। 

यही नहीं मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की चिंताएं भी तालिबान के इस कदम से बढ़ गई हैं। तालिबान ने जिन 5 विभागों को बंद किया है, उनमें राष्ट्रीय पुनर्गठन उच्च परिषद और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद भी शामिल हैं। अफगानिस्तान की सत्ता सँभालने के बाद तालिबान सरकार ने पहली बार बजट पेश किया है और उसने कई संस्थाओं के लिए फंडिंग में कटौती कर दी है।

तालिबान का कहना है कि उन्होंने जरूरी उद्देश्यों को हासिल करने के लिए बजट को पेश किया है। हालाँकि तालिबान ने कहा कि यदि आने वाले वक्त में इन विभागों की जरूरत पड़ती है तो इन्हें फिर से शुरू किया जा सकता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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