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इस्लाम के नाम पर सत्ता हथियाने के दिन लद गए, ये नया पाकिस्तान है: इमरान खान

इमरान खान ने कहा है कि 'आजादी मार्च' में शामिल लोगों के नेता उनसे नरमी की उम्मीद नहीं रखें। उन्होंने कहा कि मौलाना फजलुर रहमान के रहते पाकिस्तान को किसी विदेशी साजिश की जरूरत नहीं है।

मौलाना फजलुर रहमान की चेतावनी के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि इस्लाम पर सत्ता हथियाने के दिन लद चुके हैं। गिलगिट-बाल्टिस्तान में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद में ‘आजादी मार्च’ के लिए जुटने वाले लोगों को जितने खाने की जरूरत होगी वे मुहैया कराएँगे। लेकिन, उनके नेता उनसे किसी नरमी की उम्मीद न रखें।
मौलाना फजलुर रहमान का आजादी मार्च 27 अक्तबूर को शुरू हो शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुॅंचा था। उन्होंने इमरान से दो दिन में इस्तीफा देने या गंभीर नतीजे भुगतने की चेतावनी दी है।

इसके जवाब में इमरान ने कहा,

“वे दिन बीत गए हैं, जब सत्ता हासिल करने के लिए इस्लाम का इस्तेमाल किया जाता था। यह एक नया पाकिस्तान है। आप जब तक आप चाहते हैं, तब तक प्रदर्शन करें। जब आपका भोजन खत्म हो जाएगा, हम और भिजवा देंगे। लेकिन हम आपको एक एनआरओ नहीं देंगे।”

उनकी यह टिप्पणी पीएमएल-एन के अध्यक्ष शहबाज शरीफ के इस्लामाबाद में आजादी मार्च में शामिल होने से कुछ समय पहले आई थी। डॉन की ख़बर के अनुसार, आज़ादी मार्च पर खेद जताते हुए उन्होंने कहा, “हम आपकी आज़ादी का जश्न मना रहे हैं जबकि एक आज़ादी मार्च इस्लामाबाद में जारी है। वे किससे आज़ादी हासिल करना चाहते हैं?” प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा, “मैं चाहता हूँ कि मीडिया वहाँ जाए और उन लोगों से पूछें, जिन्हें वे खुद से मुक्त करना चाहते हैं।” उन्होंने कहा कि उनके सभी विरोधी उनके विचारों और उद्देश्यों से निराश हैं।

उन्होंने कहा, “जब मौलाना फ़ज़लुर रहमान वहाँ (इस्लामाबाद) हैं तो हमें विदेशी साज़िशों की कोई ज़रूरत नहीं है। भारतीय मीडिया जिस तरह से इस मार्च का जश्न मना रहा है, उससे लगता है कि रहमान खुद एक भारतीय हैं।” प्रधानमंत्री ने वोटों के बँटवारे के लिए इस्लाम के इस्तेमाल पर अफ़सोस जताया। उन्होंने कहा, “युवाओं को गुमराह किया जाएगा। वे सोचेंगे कि वह (मौलाना) इस्लाम के कार्यवाहक हैं। इस्लाम में आने के बजाय, उन्हें देखकर लोग धर्म छोड़ देंगे।”

इमरान ने कहा, “यह सोशल मीडिया का युग है। लोगों को पता है कि आपके बयानों में कोई दम नहीं है। लोगों को अभी भी याद है कि पीपीटी और पीएमएल-एन ने क्या कहा था जब पीटीआई ने 2014 में एक धरना दिया था।”

प्रधानमंत्री ने यह टिप्पणी भी की कि प्रदर्शनकारियों में ​​असफ़ंदरियार (वली) भी हैं, जो हर समय JUI-F के खिलाफ बोलते थे। प्रधानमंत्री ने यह भी पूछा कि पीपीपी नेता बिलावल भुट्टो-जरदारी जो आमतौर पर खुद को प्रगतिशील बताते हैं वे कैसे एक दक्षिणपंथी इस्लामवादी पार्टी के साथ हाथ मिला रहे हैं। उन्होंने कहा, “बिलावल, जो खुद को उदारवादी कहते हैं, जलसा में भी शामिल हो गए हैं। उनके बारे में केवल ‘उदार’ बात यह है कि ऐसा लगता है  वह उदारवादी रूप से भ्रष्ट है।”

इमरान खान ने इस्लामाबाद में एकत्रित सभी दलों को बताना चाहिए कि उनका असली मकसद क्या है। वे डरे हुए हैं। उन्हें भय हो रहा है कि उनके भ्रष्टाचार के मामले सबके सामने आ जाएँगे। इमरान ने कहा कि उन्होंने नया पाकिस्तान बनाने की कसम खाई है। वे इसे ऐसा मुल्क नहीं बनने देंगे, जहॉं चोर महल में रह सकें। गलत करने वाले जेल जाएंगे और उनको देख कर दूसरा ऐसा करने से डरेंगे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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