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कोरोना वायरस ने 3200 नहीं, 42 हजार की ली है जान, 24 घंटे जलाई जा रही है शव: रिपोर्ट्स में स्थानीय लोगों का दावा

हुबेई प्रांत के अधिकारियों के उलट स्थानीयों ने बताया कि दर्शाए गए आँकड़ों से अधिक निवासी अपने घरों में बिन जाँच के ही मर गए। स्थानीयों के अनुसार चीनी अधिकारियों ने जो दावा किया है। वो गलत है। 42 हजार लोगों की मौत का आँकड़ा चीन सरकार द्वारा जारी किए गए 3304 लोगों की मौत के आँकड़े से करीब दस गुना ज्यादा है।

चीन के वुहान में कोरोना वायरस के कारण मरने वालों की संख्या पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस बीच विदेशी मीडिया पोर्टल पर एक चौंकाने वाली खबर आई है। जिसके अनुसार वहाँ के स्थानीय लोगों ने चीनी अधिकारियों के दिए बयान के उलट दावा किया है। दरअसल, इनका कहना है कि वहाँ वास्तविकता में 42 हजार लोग कोरोना के कारण मरे हैं। जबकि चीनी अधिकारियों का कहना है कि 30 मार्च तक सिर्फ़ 3200 लोगों की मौत इस वायरस से हुई है और 81000 के करीब इससे संक्रमित हुए है।

डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबिक, हुबेई प्रांत के अधिकारियों के उलट स्थानीयों ने बताया कि दर्शाए गए आँकड़ों से अधिक निवासी अपने घरों में बिन जाँच के ही मर गए। स्थानीयों के अनुसार चीनी अधिकारियों ने जो दावा किया है। वो गलत है। 42 हजार लोगों की मौत का आँकड़ा चीन सरकार द्वारा जारी किए गए 3304 लोगों की मौत के आँकड़े से करीब दस गुना ज्यादा है। 

वुहान निवासियों का कहना है कि चीन के 7 शहरों में अलग-अलग फ्यूनरल होम से हर दिन 500 परिवारों को कोरोनावायरस से मरने वाले लोगों के अस्थि कलश सौंपे जा रहे हैं। यानी हर दिन 3500 लोगों को अस्थि कलश दिए जा रहे हैं। वहीं, हांकू, वुचांग और हनयांग में लोगों को कहा गया है कि उन्‍हें 5 अप्रैल तक अस्थि कलश दिए जाएँगे। इसी दिन किंग मिंग महोत्‍सव शुरू होने जा रहा है जिसमें लोग अपने पूर्वजों की कब्र पर जाते हैं।

तो, अगर इस तरह से अनुमान लगाएँ तो मालूम पड़ेगा 12 दिनों में 42 हजार अस्थि कलश वितरित किए जाएँगे। जबकि इससे पहले की रिपोर्ट में कहा गया था कि हांकू में ही केवल दो बार में 5000 हजार अस्थि कलश मृतकों के परिवार को दिए गए थे। 

गौरतलब है ये खबरें ऐसे समय पर आई हैं जब करीब दो महीने के लॉकडाउन के बाद जनता को छूट दी गई और जिन लोगों के पास ग्रीन हेल्‍थ सर्टिफिकेट है, उन्‍हें जाने की अनुमति दी गई है।

स्थानीय पूछ रहे हैं सवाल

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वुहान के रहने वाले झांग कहते हैं कि चीन सरकार की ओर से दिया गया मौतों का आधिकारिक आँकड़ा सही नहीं है क्‍योंकि लाशों को जलाने वाले 24 घंटे काम कर रहे हैं। उन्‍होंने सवाल किया कि अगर इतनी कम मौतें हुई हैं तो अंतिम संस्‍कार करने वालों को 24 घंटे काम क्‍यों करना पड़ रहा है।

वहीं, वुहान के रहने वाले माओ ने कहा कि संभवत: अधिकारी धीरे-धीरे मौतों का सही आँकड़ा जारी कर रहे हैं। यह जानबूझकर है या बिना जानबूझकर, मालूम नहीं। लेकिन शायद ऐसा इसलिए है ताकि लोग धीरे-धीरे वास्‍तविकता को स्‍वीकार कर लें।

सूत्रों का दावा- कोरोना से मरने वाली संख्या इटली-अमेरिका को भी कर गई पार

इधर, हुबेई प्रांत के एक सूत्र ने कहा कि कई लोग तो बिना आधिकारिक रूप से इलाज के ही अपने घरों में मर गए। उन्‍होंने कहा कि एक महीने में ही 28 हजार लोगों का अंतिम संस्‍कार किया गया। इस बीच अगर चीन के आधिकारिक आँकड़ों को मानें तो इटली और अमेरिका अब चीन से भी आगे न‍िकल चुके हैं। इटली में 10 हजार लोगों की मौत हो गई है जबकि 97 हजार लोग संक्रमित हैं।


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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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