Homeरिपोर्टमीडियापत्रकार आजकल खुद ही बन जाते हैं पुलिस, वकील और जज: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

पत्रकार आजकल खुद ही बन जाते हैं पुलिस, वकील और जज: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

"पत्रकारों को अपने कर्तव्य के निर्वहन के दौरान कई तरह का काम करना पड़ता है। मगर इन दिनों वे अक्सर एक साथ जाँचकर्ता, अभियोजक और न्यायाधीश की भूमिका निभाने लगते हैं।"

राजधानी दिल्ली में सोमवार (जनवरी 20, 2019) को पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पत्रकारों को रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पत्रकारिता के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वाले पत्रकारों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया। इस दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पत्रकारिता के मौजूदा हालात पर चिंता जाहिर की। 

उन्होंने कहा, “पत्रकारिता एक कठिन दौर से गुजर रही है। फर्जी खबरें नए खतरे के रूप में सामने आई हैं, जिसका प्रसार करने वाले खुद को पत्रकार के रूप में पेश कर इस महान पेशे को कलंकित करते हैं।”

राष्ट्रपति ने कहा, “ब्रेकिंग न्यूज सिंड्रोम के शोर-शराबे में संयम और जिम्मेदारी के मूलभूत सिद्धांत की अनदेखी की जा रही है। पुराने लोग फाइव डब्ल्यू एंड एच (what, when, why, where, who and how) के मूलभूत सिद्धांतों को याद रखते थे, जिनका जवाब देना किसी सूचना के खबर की परिभाषा में आने के लिए अनिवार्य था।”

उन्होंने आगे कहा कि पत्रकारों को अपने कर्तव्य के निर्वहन के दौरान कई तरह का काम करना पड़ता है। मगर इन दिनों वे अक्सर एक साथ जाँचकर्ता, अभियोजक और न्यायाधीश की भूमिका निभाने लगते हैं।

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, ‘सच्चाई तक पहुँचने के लिए एक समय में कई भूमिका निभाने की खातिर पत्रकारों को काफी आंतरिक शक्ति और अद्भुत जुनून की आवश्यकता होती है। पत्रकारों की बहुमुखी प्रतिभा प्रशंसनीय है। लेकिन वह मुझे यह पूछने के लिए प्रेरित करता है कि क्या इस तरह की व्यापक शक्ति के इस्तेमाल से वास्तविक जवाबदेही होती है?”

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद पत्रकारों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सत्य की खोज निश्चित रूप से कठिन है। यह कहना आसान है और करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि हमारे जैसा लोकतंत्र तथ्यों के उजागर होने और उन पर बहस करने की इच्छा पर निर्भर करता है। लोकतंत्र तभी सार्थक है, जब नागरिक अच्छी तरह से जानकार हो।

उन्होंने कहा कि सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को उजागर करने वाली खबरों की अनदेखी की जाती है और उनका स्थान तुच्छ बातों ने ले लिया है। वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करने में मदद के बजाय कुछ पत्रकार रेटिंग पाने और ध्यान खींचने के लिए अतार्किक तरीके से काम करते हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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