Sunday, September 27, 2020
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रवीश ‘कौन जात हो’ के कठिन सवाल चार्टर्ड प्लेन और 100 रुपए के दलित पानी बोतल में खो गए

रवीश ने अखिलेश से यह नहीं पूछा कि वो जिस जहाज से उड़ते हैं, उसका पैसा कहाँ से आता है। रवीश ने ये सब नहीं पूछा क्योंकि रवीश को ये चार्टर्ड प्लेन वाली हवाई यात्रा याद रहेगी। वो भी अब कह सकेंगे कि वो भी ‘हवाई जर्नलिज़्म’ कर चुके हैं।

मेरी दिली तमन्ना है कि भाजपा हार जाए, नरेंद्र मोदी पदच्युत हो जाएँ और वो रवीश कुमार को साक्षात्कार दे दें।

दरअसल मुझसे रवीश कुमार की तड़प देखी नहीं जाती। मोदी और भाजपा द्वारा नज़रअंदाज करने पर रवीश आजकल न केवल उल जलूल लिख रहे हैं बल्कि अपने ही बनाए उसूलों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं।

मुझे याद है ‘साहित्य आज-तक’ के एक कार्यक्रम में रवीश कुमार ने कहा था – “ये जो नेता हेलिकॉप्टर पर चढ़कर चुनाव में घूमता है, कहाँ से? आप कहते क्यों नहीं कि ये सब चोर हैं। चोर हैं ये सब। बिना चोरी संभव है क्या ये सब?” – तालियों से गूँज उठा था वो हॉल रवीश के इस वक्तव्य से। रवीश आम दिलों की धड़कन बन कर बोलने की कोशिश करते हैं। वो मँहगे कपड़ों, ऐशो आराम के सामान और अन्य फालतू खर्चों पर गाहे-बगाहे सवाल उठाते रहे हैं।

ऐसे में 7 मई को आलीशान जहाज़ में अखिलेश यादव का साक्षात्कार लेते रवीश ख़टके। तकरीबन 100 रुपए की पानी की बोतल लिए मायावती के साथ बैठे थे रवीश। अपने प्राइम टाइम के लंबे उद्घोषणाओं और स्वनिर्धारित वसूलों की खातिर क्या अखिलेश जी का साक्षात्कार उन्हें जमीन पर उतार कर नहीं लेना चाहिए था? ज़मीन के आदमी को जमीन पर ला कर बात करने का अलग आनंद भी आता और रवीश जी अपने कहे पर टीके भी रहते। 10 रुपए की बिसल्लरी (नकली बिसलेरी) न सही 15 रुपए का एक्वाफीना ही पी लेते… इतनी महँगी पानी की बोतल पीने वाली दलित समाज की रहनुमा मायावती से वो सवाल क्यों नहीं पूछ पाए। क्या ये सारे धारदार सवाल उन्होंने सिर्फ नरेन्द्र मोदी के लिए बचा रखे हैं? या फ़िर हाथी के दाँत दिखाने के और खाने के और वाली बात सिद्ध कर रहे वो?

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कठिन सवालों में यह सवाल कहाँ था कि मायावती सुप्रीम कोर्ट को जो जवाब दे रही है 6000 करोड़ रुपयों की मूर्तियों पर वो कितना जायज है। यह सवाल कहीं नहीं दिखा कि स्टेज पर अखिलेश ने जो योगी का डुप्लीकेट खड़ा करके उपहास किया, उसमें राजनीति कितनी थी? यह सवाल किसी ने नहीं सुना कि मायावती गेस्ट हाउस कांड को भुला कर मुलायम के साथ स्टेज पर खड़े होने में असहज महसूस करती हैं या नहीं। कठिन सवालों में यह सवाल भी गायब था कि पिछले साल के दलित आंदोलन को अफ़वाहों के दम पर हवा दी गई, जिसमें ग़रीबों के दुकानों का नुकसान तो हुआ ही, करीब 12 लोगों की हत्या भी हुई। रवीश ने अखिलेश से यह नहीं पूछा कि वो जिस जहाज से उड़ते हैं, उसका पैसा कहाँ से आता है। रवीश ने ये सब नहीं पूछा क्योंकि रवीश को ये चार्टर्ड प्लेन वाली हवाई यात्रा याद रहेगी। वो भी अब कह सकेंगे कि वो भी ‘हवाई जर्नलिज़्म’ कर चुके हैं।

इस घटना से थोड़ा पिछे जाते हैं। बेगूसराय और कन्हैया सबको याद है। रवीश कुमार को संपूर्ण भारत में कन्हैया सबसे मजबूत उम्मीदवार लगा प्रधानमंत्री व भाजपा के खिलाफ। पहुँच गए लाव लश्कर समेत उनका महिमामंडन करने… एक और केजरीवाल को जन्म देने की कोशिश करने। स्टूडियो में आदर्शवादी बात करने वाले रवीश ने यहाँ भी वो सवाल नहीं पूछे जो शायद मोदी मात्र के लिए बचा कर रखा है उन्होंने। उन्होंने कन्हैया को कितने साल में डिग्री मिली नहीं पूछा… और ना ही ये कि कन्हैया बार-बार चंद्रशेखर के हत्यारे दल के नेता का पैर पकड़ने क्यों जाते हैं?

इसी बेगूसराय से जुड़ी एक और बात को समझने के लिए आइए थोड़ा और पीछे चलते हैं। जेएनयू में चुनाव का दौर था वो। एक ग़रीब किंतु अच्छा पढ़ा-लिखा वक़्ता लड़का अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार था। उसकी प्रतिभा के कायल हो रहे थे जेएनयू से जुड़े नए-पुराने लोग भी। रवीश कुमार ने भी इस लड़के की तारीफ की और प्राइम टाइम में कई फुटेज भी दिखाए। हालाँकि ये लड़का हार गया किंतु रवीश समेत कई लोग प्रभावित थे इससे। विडम्बना देखिए कि यही लड़का जयंत जिग्याशु राजद के उम्मीदवार के लिए इसी बेगूसराय में प्रचार कर रहा था किंतु रवीश जी एन वक़्त पर उसकी प्रतिभा को भुला गए। एक प्रतिभावान और संभावना से भरे लड़के से मिलकर शायद वो खुद से कोई मुश्क़िल सवाल नहीं पूछना चाहते थे।

हमने-आपने सबने देखा है रवीश रुआंसे मुँह पर कटीली मुस्कान लिए कैमरे के सामने कहते हैं – क्या आडवाणी अकेले में रोते होंगे? यही रवीश कभी राहुल गाँधी से यह नहीं पूछ पाए कि पार्टी में आपसे अधिक अनुभवी और विद्वान जयराम रमेश, मणिशंकर अय्यर, शशि थरूर, पवन बंसल आदि-आदि क्यों उपेक्षित हैं? देश के लोकतंत्र की चिंता से पूर्व परिवार की चाटुकारिता से परहेज करते हुए क्यों राहुल गाँधी अपने दल में लोकतंत्र नहीं ला पाते?

कुल मिलाकर रवीश वास्तविकता में मुश्क़िल सवाल न तो सामने वाले से पूछते हैं और न ही खुद से… उन्हें बड़े जहाज़, मंच पर जाकर फोटोबाजी और महँगे प्रसाधन से भी परहेज नहीं। ऐसे में मोदी जी को बिना झिझक… प्रधानमंत्री रहते रवीश के सामने बैठ कर कहना चाहिए – ‘पांडे जी तुम हमसे कम नहीं हो स्यापा करने में बे… हें हें हें हें’!

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Praveen Kumarhttps://praveenjhaacharya.blogspot.com
बेलौन का मैथिल

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