Sunday, April 5, 2020
होम देश-समाज 'पगला गए हो क्या?' दि प्रिंट के शिवम विज ने पहले फ़र्ज़ी बयान छापा,...

‘पगला गए हो क्या?’ दि प्रिंट के शिवम विज ने पहले फ़र्ज़ी बयान छापा, पकड़े जाने पर की बेहूदगी

दि प्रिंट कश्मीर पर एक लेख लिखता है जिसमें वो किसी का 10 साल पुराना बयान संदर्भ से परे ऐसे छापता है मानो वह बयान शिवम विज ने परसों लिया था। झूठ पकड़ा गया तो बेचारे वही करने लगे जिसके लिए मशहूर हैं: बेहूदगी!

ये भी पढ़ें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

शिवम विज नाम के एक पत्रकार हैं। खुद को लिबरल थिंकर कहते हैं। शेखर गुप्ता के द प्रिंट के लिए काम करते हैं। लेकिन हकीकत में यह झूठ फ़ैलाने की ज़िम्मेदारी लेकर खुलेआम घूमने वाले शख्स हैं। यह आरोप निराधार नहीं है। क्यों? क्योंकि विज साहब ने कश्मीरी पंडितों पर एक रिपोर्ट लिखी। इस रिपोर्ट में अपना एजेंडा थोपने के लिए उन्होंने अरविन्द गिगू से बातचीत को जबरन डाल दिया। वैसे तो शिवम विज द प्रिंट के कॉन्ट्रीब्यूटिंग एडिटर हैं लेकिन अपने पद को बदनाम करने में अपनी संस्था से भी दो कदम आगे हैं। कश्मीरी पंडितों की अपनी रिपोर्ट में शिवम ने जिस लेक्चरर के हवाले से झूठ फैलाने की कोशिश की, उन्हीं के बेटे सिद्धार्थ ने उसे अपने पिता के नाम से चलाई जा रही उस भ्रामक लाइन को हटाने के लिए कहा है।

फिलहाल तो द प्रिंट के संपादक शेखर गुप्ता ने यह नहीं कहा है कि असफलताओं के लिए खुद को जिम्मेदार मानने की ज़रूरत है, लेकिन 2007 में जब वो इंडियन एक्सप्रेस के साथ थे, तब उन्होंने ये बातें कहीं थीं। उन्होंने अनिल विज के संदर्भ में ये बातें कतई नहीं कही है। वैसे चीजों को तोड़-मरोड़ कर अपने तरीके से गढ़कर पेश करना द प्रिंट की पुरानी आदत रही है। अपनी इस बेशर्मी के लिए उसे लताड़ा भी जाता रहा है। चूँकि द प्रिंट दशकों पुराने उद्धरणों को वर्तमान परिदृश्यों के लिए जिम्मेदार मानता है, इसलिए हमने सोचा कि यह देखना काफी मजेदार होगा कि समय कैसे बदलता है।

शिवम विज के लेख का हिस्सा

बता दें कि शिवम विज ने कश्मीरी पंडितों पर अपनी एक रिपोर्ट में लिखा था, “अरविन्द गिगू कश्मीर के एक रिटायर्ड अंग्रेजी लेक्चरर हैं, जो 1991 के कश्मीर घाटी पलायन में निकलकर जम्मू आ गए और अब वहीं फ्लैट लेकर रहते हैं। उन्होंने कहा कि अब वे यहीं रहते हैं क्योंकि उनके ज़्यादातर दोस्त यहीं हैं। यही कारण है कि वह दिल्ली में अपने बेटे के साथ नहीं रहते। शिवम ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि सालों बाद जब वह श्रीनगर गए तो उन्हें एक बाहरी जैसा महसूस हुआ, वहाँ वे अब किसी को नहीं जानते।”

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

शिवम विज ने अपने प्रोपेगेंडा को हवा देने के लिए के लिए अरविन्द गिगू के नाम का सहारा लिया और कहा कि उन्होंने जो भी कहा है, वो उनके हवाले से कहा है। हालाँकि अरविन्द गिगू के बेटे सिद्धार्थ गूगू ने इसे सिरे से नकारते हुए, शिवम विज को झूठा करार देते हुए कहा कि उनके पिता ने इस तरह का कोई बयान नहीं दिया था। सिद्धार्थ ने तो यहाँ तक कह दिया कि उनके पिता ने तो कभी द प्रिंट के साथ बात ही नहीं की है। 

सिद्धार्थ गिगू के इस टिप्पणी के बाद शेखर गुप्ता ने शिवम विज द्वारा लिखे गए रिपोर्ट को सही बताते हुए वकालत की। शेखर गुप्ता ने द प्रिंट का नेतृत्व करते हुए दावा किया कि यह बयान सटीक है और 2010 में अरविंद गिगू के साथ विज की मीटिंग से लिया गया है। शिवम विज ने भी इसी तरह का ट्वीट किया। शिवम विज के ट्विटर हैंडल को चेक करने पर उनकी बेशर्मी और भी स्पष्ट हो जाती है।

द प्रिंट ने किया शिवम विज का बचाव

दरअसल द प्रिंट और शिवम विज का सोचना यह है कि एक दशक पुरानी बात, जब समय और परिस्थितियाँ अलग थीं, उस समय की घटनाओं और परिस्थितियों का हवाला देते हुए आज के समय में वो अपने प्रोपेगेंडा को फैलाने में इस्तेमाल कर सकते हैं। द प्रिंट और शिवम विज द्वारा हेकड़ीपन और अक्खड़पने के बेशर्म प्रदर्शन के बाद द प्रिंट ने चुपके से उस पैराग्राफ को बदल दिया जहाँ अरविंद गिगू का हवाला दिया गया था।

शिवम विज की बेशर्मी

शिवम विज ने दावा किया कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट में जो जानकारी साझा किया है, वो बिल्कुल सटीक है। उनका कहना है कि यह जानकारी 2010 से 2012 में लिया गया था। यानी कि जिस उद्धरण की वो बात कर रहे हैं, वो लगभग एक दशक पहले का है, जब कश्मीर में आतंकवाद अपने चरम पर था। वहीं जब सिद्दार्थ गिगू, विज से इसको लेकर सवाल किया, तो विज बेशर्मी पर उतर आते हैं और बोलते हैं, “क्या वह पागल हो गया है?”

द प्रिंट के लेख में किया गया बदलाव

द प्रिंट का मानना है कि यह पूरी तरह से उचित है कि 2007 में शेखर गुप्ता के बयान को वर्तमान संदर्भ में, बिना वर्तमान परिस्थिति की परवाह किए इस्तेमाल किया जा सकता है। 2007 में शेखर गुप्ता ने इंडियन एक्सप्रेस के कर्मचारियों को 2751 शब्द का एक ईमेल लिखा था, जिसमें कहा गया था कि समूह खुद को “एक बड़ी छलांग के लिए” तैयार है। इसे एक ईमानदार आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता है और हमारी विफलताओं और कमजोरियों को स्वीकार करने की आवश्यकता है। उन्होंने आगे लिखा, “एक साल में जब मीडिया उद्योग में लगभग 25% की वृद्धि हुई है, हमारे राजस्व में 3% की गिरावट आई है। इसका मतलब है कि हम अपने लक्ष्य (लाभ) से पिछड़ रहे हैं।”

शेखर गुप्ता उस समय इंडियन एक्सप्रेस समूह के प्रधान संपादक थे। इस दौरान उन्होंने शीर्ष प्रबंधन टीम के सदस्यों से उस वर्ष के लिए वेतन फ्रीज करने का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि वो मार्केट में पिछड़ रहे हैं। इसलिए उन्होंने खुद भी वेतन के एक महत्वपूर्ण हिस्से को तब तक न लेने का फैसला किया है जब तक कि वो इसमें कुछ वास्तविक सुधार नहीं देखते। 

शेखर गुप्ता और उनके वर्तमान मीडिया हाउस द प्रिंट, गलतियों को स्वीकार न करने के बहुत ही बेशर्म हो गया है। हमारे विचार से द प्रिंट के संपादकीय मानकों को देखते हुए शिवज विज द्वारा किए गए बेहूदगी को आज आसानी से शेखर गुप्ता को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

- ऑपइंडिया की मदद करें -
Support OpIndia by making a monetary contribution

ख़ास ख़बरें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

ताज़ा ख़बरें

लेटरहेड पर राष्ट्रीय प्रतीक का इस्तेमाल: पूर्व त्रिपुरा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पर FIR

रॉय के लेटरहेड में देखा जा सकता है कि फिलहाल वो किसी आधिकारिक पद पर नहीं हैं। बावजूद वह अपने लेटरहेड पर राष्ट्रीय प्रतीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। कानूनन किसी व्यक्ति और निजी संगठन के लिए इसका उपयोग प्रतिबंधित है।

कश्मीर में पिता को दिल का दौरा, मुंबई से साइकिल पर निकल पड़े आरिफ: CRPF और गुजरात पुलिस बनी फरिश्ता

आरिफ ने बताया कि वो रात भर साइकिल चला कर गुजरात-राजस्थान सीमा तक पहुँचे थे। अगली सुबह गुजरात पुलिस के कुछ जवान उन्हें मिले। उन्होंने उनके लिए न सिर्फ़ जम्मू-कश्मीर जाने का प्रबंध किया, बल्कि भोजन की भी व्यवस्था की।

तबलीगियों पर युवक ने की टिप्पणी, मो. सोना ने गोली मार हत्या की: CM योगी ने दिया रासुका लगाने का निर्देश

1. लोटन निषाद चाय की दुकान पर जाते हैं। 2. तबलीगी जमातियों और कोरोना संक्रमण को लेकर टिप्पणी करते हैं। 3. पास में ही मोहम्मद सोना बैठा होता है। 4. दोनों के बीच विवाद होता है, मारपीट शुरू होती है। 5. मो. सोना तमंचे से फायर कर लोटन निषाद की जान ले लेता है।

Covid-19: एकजुटता दिखाने के लिए आज पूरा देश जलाएगा दीया, संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3374

दुनियाभर में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों की संख्या 12 लाख के पार (12,03,460) हो गई है। संक्रमितों में से अब तक 64,772 लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में अब तक 77 लोग संक्रमण की वजह से जान गॅंवा चुके हैं।

‘हम कोरोना वायरस में विश्वास नहीं करते, हमें अल्लाह पर विश्वास है’ – 37 मौतों के बाद भी खुली हैं मस्जिदें

“सरकार और पुलिस डर की भावना पैदा करने के लिए ऐसे बयान दे रही है। कुछ नहीं होगा। कराची 20 मिलियन का शहर है, सरकार हर नुक्कड़ या हर सभा में अपना फैसला लागू नहीं कर सकती है।”

पहले चाकू पर थूक लगाया, फिर तरबूज काटा… और उसके बाद लोगों को बेचा: अब्दुल, अहमद सहित 3 पर FIR

चाकू पर थूक लगाकर तरबूज काटकर बेचने की शिकायत पर बैतूल बाजार पुलिस ने 3 लोगों के खिलाफ FIR कर लिया है। पुलिस ने उनका तरबूज से भरा ऑटो भी जब्त कर लिया गया। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने इस घटना को देखा, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

प्रचलित ख़बरें

फलों पर थूकने वाले शेरू मियाँ पर FIR पर बेटी ने कहा- अब्बू नोट गिनने की आदत के कारण ऐसा करते हैं

फल बेचने वाले शेरू मियाँ का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा था, जिसमें वो फलों पर थूक लगाते हुए देखे जा रहे थे। इसके बाद पुलिस ने उन पर कार्रवाई कर गिरफ्तार कर लिया, जबकि उनकी बेटी फिजा का कुछ और ही कहना है।

वैष्णो देवी गए 145 को हुआ कोरोना: पत्रकार अली ने फैलाया झूठ, कमलेश तिवारी की हत्या का मनाया था जश्न

कई लोग मीडिया पर आरोप लगा रहे थे कि जब किसी हिन्दू धार्मिक स्थल में श्रद्धालु होते हैं तो उन्हें 'फँसा हुआ' बताया जाता है जबकि मस्जिद के मामले में 'छिपा हुआ' कहा जाता है। इसके बाद फेक न्यूज़ का दौर शुरू हुआ, जिसे अली सोहराब जैसों ने हज़ारों तक फैलाया।

नर्सों के सामने नंगे हुए जमाती: वायर की आरफा खानम का दिल है कि मानता नहीं

आरफा की मानें तो नर्सें झूठ बोल रही हैं और प्रोपेगेंडा में शामिल हैं। तबलीगी जमात वाले नीच हरकत कर ही नहीं सकते, क्योंकि वे नि:स्वार्थ भाव से मजहब की सेवा कर रहे हैं। इसके लिए दुनियादारी, यहॉं तक कि अपने परिवार से भी दूर रहते हैं।

मधुबनी, कैमूर, सिवान में सामूहिक नमाज: मस्जिद के बाहर लाठी लेकर औरतें दे रही थी पहरा

अंधाराठाढ़ी प्रखंड के हरना गॉंव में सामूहिक रूप से नमाज अदा की गई। यहॉं से तबलीगी जमात के 11 सदस्य क्वारंटाइन में भेजे गए हैं। बताया जाता है कि वे भी नमाज में शामिल थे। पुरुष जब भीतर नमाज अदा कर रहे थे दर्जनों औरतें लाठी और मिर्च पाउडर लेकर बाहर खड़ी थीं।

हिन्दू %ट कबाड़ रहे हैं, तुम्हारी पीठ पर… छाप दूँगा: जमातियों की ख़बर से बौखलाए ज़ीशान की धमकी

"अपनी पीठ मजबूत करके रखो। चिंता मत करो, तुम्हारी सारी राजनीति मैं निकाल दूँगा। और जितनी %ट तुम्हारी होगी, उतना उखाड़ लेना मेरा। जब बात से समझ न आए तो लात का यूज कर लेना चाहिए। क्योंकि तुम ऐसे नहीं मानोगे।"

ऑपइंडिया के सारे लेख, आपके ई-मेल पे पाएं

दिन भर के सारे आर्टिकल्स की लिस्ट अब ई-मेल पे! सब्सक्राइब करने के बाद रोज़ सुबह आपको एक ई-मेल भेजा जाएगा

हमसे जुड़ें

172,457FansLike
53,654FollowersFollow
212,000SubscribersSubscribe
Advertisements