15 अगस्त से पहले कश्मीर घाटी के सरकारी कर्मचारी पंडितों को आतंकियों ने धमकाना शुरू कर दिया है। ऑनलाइन उनके नाम और फोन नंबर जारी कर दोबारा कश्मीर में नहीं आने की चेतावनी दी गई है।
घाटी में कश्मीरी पंडितों की आबादी ना के बराबर बची है। अब वो भी खौफ में जीवन जी रहे हैं। क्योंकि उन्हें भी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी ग्रुप TRF से जान से मारने की धमकियाँ मिल रही है।
अनुपम खेर ने इस कविता में विस्थापित हुए कश्मीरी पंडितों के दर्द बयां किया। कैप्शन में उन्होंने बताया कि ये कविता एक विस्थापित कश्मीरी पंडित सुनयना काचरू की है।