‘मोदी है तो मुमकिन है’ नारे के पीछे है यह वजह, बताया अरुण जेटली ने

प्रधानमंत्री और सरकार ने दुनिया को दिखा दिया है कि भारत में एक ईमानदार सरकार चलाना संभव है। भारत ने 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के एयर स्ट्राइक के माध्यमों से यह प्रदर्शित किया कि केवल देश के भीतर ही नहीं बल्कि विश्व स्तर पर आतंकवाद का जवाब देने में पूरी तरह से सक्षम है।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपनी ‘एजेंडा 2019’ श्रृंखला का चौथा भाग फेसबुक पर साझा किया, जहाँ उन्होंने बीजेपी के सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार की विभिन्न उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। अपने ब्लॉग में उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में पिछले 5 वर्षों में सरकार की उपलब्धि पर प्रकाश डाला। आइए आपको बताते हैं वित्त मंत्री ने अपने ब्लॉग में किन-किन उपलब्धियों के बारे में बताया:

Arun Jaitley ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಗುರುವಾರ, ಮಾರ್ಚ್ 14, 2019

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले पाँच वर्षों के दौरान अपने अथक परिश्रम का प्रदर्शन चौबीसों घंटे काम करके किया। अपनी लगातार नई बातों को सीखने की इच्छा के कारण, प्रधानमंत्री न केवल एक प्रभावशाली विद्यार्थी साबित हुए हैं बल्कि उन्होंने विदेश नीति, आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर भी अपनी पकड़ मज़बूत की। नीतिगत मुद्दों पर, वे अपनी टीम, मंत्रियों और सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ घंटों बैठते हैं और महत्वपूर्ण मामलों के संबंध में निर्णय लेते हैं। एक कर्ता के रूप में उनकी छवि अब अधिकतर भारतीयों द्वारा स्वीकार कर ली गई है। इसलिए, बीजेपी ने आगामी चुनावों के लिए एक प्रभावी नारा ‘मोदी है तो मुमकिन है – Modi makes it possible’ चुना है।

इस दिशा में कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को नीचे सूचीबद्ध किया गया है:

  • इतिहास में पहली बार, लगातार पाँच साल तक, भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था रहा – यानी वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत एक ‘स्वीट स्पॉट’ बनकर उभरा।
  • पिछले पाँच वर्षों से, न तो प्रत्यक्ष और न ही अप्रत्यक्ष कर दरों में वृद्धि हुई। इसके विपरीत, वे कम हो गए। पाँच लाख रुपये तक की शुद्ध आय वाले लोगों को आयकर से छूट दी गई है। GST काउंसिल की हर बैठक से पहले, राष्ट्र यह अनुमान लगाता है कि कौन से कर कम होने वाले हैं। ₹40 लाख तक के टर्नओवर वाले छोटे व्यवसायों को जीएसटी से छूट प्राप्त है। ₹1.5 करोड़ तक के टर्नओवर वाले लोग एक प्रतिशत जीएसटी का भुगतान कर सकते हैं। क़िफ़ायती आवास पर अब एक प्रतिशत कर लगाया गया है। करों के बोझ को कम करते हुए, कर आधार का विस्तार हुआ है और संग्रह तेजी से बढ़ा है।
  • बीस महीने की अवधि में, गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) का सबसे सरल कार्यान्वयन हुआ है। संविधान संशोधन, कराधान कानून इसके अधीन हैं, नियम और शुल्क सभी क्रमशः संसद और जीएसटी परिषद द्वारा सर्वसम्मति से तय किए गए हैं। किसी ने कल्पना नहीं की थी कि भारत कराधान की दर कम करेगा और कर संग्रह बढ़ाएगा।
  • 2014 में, हर रोज सात किलोमीटर राजमार्गों का निर्माण किया गया। आज वह आँकड़ा तीस किलोमीटर प्रतिदिन है यानी साल में दस हजार किलोमीटर से ज़्यादा। भारत दुनिया में सबसे बड़ा राजमार्ग डेवलपर बन गया है।
  • 2014 में, केवल 38 प्रतिशत ग्रामीण घर स्वच्छता से जुड़े थे। आज 99 प्रतिशत ग्रामीण घर स्वच्छता से जुड़े हुए हैं।
  • 91 प्रतिशत गाँव अब ग्रामीण सड़कों से जुड़े हैं। ग्रामीण सड़कों पर खर्च तीन गुना बढ़ा दिया गया।
  • भारत में पचास करोड़ गरीब लोगों को प्रति वर्ष आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रति परिवार ₹5 लाख तक के अस्पताल उपचार का आश्वासन दिया गया। यह योजना 23 सितंबर, 2018 को लागू की गई थी और ताज़ा आंकड़ों के अनुसार 15.27 लाख रोगियों का इलाज कैशलेस आधार पर किया जा चुका है।
  • सबसे गरीब बीपीएल परिवारों के आठ करोड़ परिवारों को रसोई गैस के चूल्हे और सिलेंडर उपलब्ध कराए गए। भारत के गरीबों ने खाना पकाने की प्राचीन प्रणाली से पारिस्थितिक रूप से अनुकूल और अधिक आधुनिक प्रणाली से स्नातक किया।
  • भारत में सभी इच्छुक घरों (100 प्रतिशत) का विद्युतीकरण किया गया।
  • प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत लगभग पैंतीस करोड़ बैंक खाते हर घर को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ते हुए खोले गए। यह दुनिया में अब तक की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन योजना है।
  • स्वरोजगार और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत सोलह करोड़ से अधिक ऋण दिए गए। लाभार्थियों में से 54% अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/ अन्य पिछड़ा वर्ग/ अल्पसंख्यक हैं। इसके अलावा, लाभार्थियों में 72% महिलाएँ हैं।
  • 2014 में, भारत में वाणिज्यिक उड़ानों के साथ 65 कार्यात्मक हवाई अड्डे थे। वर्तमान में वाणिज्यिक उड़ानों के साथ 101 हवाई अड्डे हैं। आने वाले समय में यह आँकड़ा बहुत जल्द 50 और बढ़ने की संभावना है।
  • भारतीय रेलवे अब सुपरफास्ट 160 किलोमीटर प्रति घंटे की ट्रेन और लोकोमोटिव के युग में प्रवेश कर चुकी है जो घरेलू रूप से निर्मित हैं। बहुत जल्द बुलेट ट्रेन का सपना साकार होगा। रेल यात्रा में गुणवत्ता की सुविधा में काफी सुधार हुआ है।
  • दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) ने लेनदार-देनदार संबंध के पैटर्न को बदल दिया गया है। अब लेनदारों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए डिफ़ॉल्ट प्रबंधन को नियंत्रण से बाहर फेंकना और अंततः अपने ऋण को रियलाइज़ कराना संभव हो गया है।
  • आधार – विशिष्ट पहचान संख्या, ने यह संभव कर दिया है कि सभी कमजोर वर्गों को राज्य द्वारा दिए गए लाभ सीधे और तत्काल प्रबाव से बिना किसी नुकसान के उन तक पहुँचें।
  • ग्रामीण बुनियादी ढांचे के निर्माण के अलावा, 22 फसलों वाले किसानों को लागत का 50% से अधिक एमएसपी का आश्वासन दिया गया। सब्सिडी वाली फसल बीमा योजना के अलावा, 12 करोड़ छोटे और मध्यम किसानों को आय सहायता के रूप में वार्षिक ₹6000/- दिए जाएँगे। कल 2.77 करोड़ किसानों को पहली किस्त मिल चुकी है।
  • किसानों को ₹75,000 करोड़ की आय सहायता के अलावा, मनरेगा पर ₹60,000 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। यह संसाधनों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक पहुँचाने का काम करता है।
  • ₹1 करोड़ 4 लाख करोड़ तक के खर्चे से सस्ता और रियायती खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। कोई भी भारतीय भूखा नहीं सोएगा।
  • ग्रामीण भारत के प्रत्येक BPL परिवार के पास 2022 तक एक घर होगा। हर साल पचास लाख घर बनाए जा रहे हैं।
  • किसानों सहित असंगठित क्षेत्र का श्रमिक अब एक योजना के तहत ₹3000 पेंशन का हक़दार होगा, इसमें सरकार 50% का योगदान करती है। इससे दस करोड़ परिवारों को फ़ायदा होगा।
  • यूपीए सरकार के दौरान मुद्रास्फीति, जो 10.4 प्रतिशत थी, आज 2.5 प्रतिशत से भी कम है।
  • प्रधानमंत्री और सरकार ने दुनिया को दिखा दिया है कि भारत में एक ईमानदार सरकार चलाना संभव है।
  • इतिहास में पहली बार, ग़ैर-आरक्षित श्रेणियों के आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के लिए सार्वजनिक रोज़गार और शैक्षणिक संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया।
  • भारत ने 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के एयर स्ट्राइक के माध्यमों से यह प्रदर्शित किया कि केवल देश के भीतर ही नहीं बल्कि विश्व स्तर पर आतंकवाद का जवाब देने में पूरी तरह से सक्षम है और इसके लिए आतंक पर हमला करने के अपरंपरागत तरीकों को भी अपनाने के लिए भी तैयार है।
- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

ऊपर बताई गई उपलब्धियों के माध्यम से यह समझा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में चल रही केंद्र सरकार ने कई क्षेत्रों में संघर्ष करते हुए अपने विकास के लक्ष्यों को पूरा किया। ऐसे में एक सवाल उठना ज़रूरी बन पड़ता है कि क्या इससे पहले किसी सरकार ने इतना काम किया है? यह वही सरकारी तंत्र था, वही राजनीतिक व्यवस्था, वही कार्यान्वयन उपकरण जो सरकार के पास पहले भी मौजूद थे। अपनी कुशल राजनीति का परिचय देते हुए मोदी सरकार ने अपने विकास संबंधी सभी लक्ष्यों की प्राप्ति की।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

ये पढ़ना का भूलें

लिबरल गिरोह दोबारा सक्रिय, EVM पर लगातार फैला रहा है अफवाह, EC दे रही करारा जवाब

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

राजदीप सरदेसाई

राजदीप भी पलट गए? विपक्ष के EVM दावे को फ़रेब कहा… एट टू राजदीप?

राजदीप ने यहाँ तक कहा कि मोदी के यहाँ से चुनाव लड़ने की वजह से वाराणसी की सीट VVIP संसदीय सीट में बदल चुकी है। जिसका असर वहाँ पर हो रहे परिवर्तन के रूप में देखा जा सकता है।
उत्तर प्रदेश, ईवीएम

‘चौकीदार’ बने सपा-बसपा के कार्यकर्ता, टेंट लगा कर और दूरबीन लेकर कर रहे हैं रतजगा

इन्होंने सीसीटीवी भी लगा रखे हैं। एक अतिरिक्त टेंट में मॉनिटर स्क्रीन लगाया गया है, जिसमें सीसीटीवी फुटेज पर लगातार नज़र रखी जा रही है और हर आने-जाने वालों पर गौर किया जा रहा है। नाइट विजन टेक्नोलॉजी और दूरबीन का भी प्रयोग किया जा रहा है।
बरखा दत्त

बरखा दत्त का दु:ख : ‘मेनस्ट्रीम मीडिया अब चुनावों को प्रभावित नहीं कर पाएगा’

बरखा ने कॉन्ग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि अगर एक्जिट पोल के आँकड़ें सही साबित हुए, तो यह कॉन्ग्रेस पार्टी के 'अस्तित्व पर संकट' साबित हो सकता है।
ओपी राजभर

इतना सीधा नहीं है ओपी राजभर को हटाने के पीछे का गणित, समझें शाह के व्यूह की तिलिस्मी संरचना

ये कहानी है एक ऐसे नेता को अप्रासंगिक बना देने की, जिसके पीछे अमित शाह की रणनीति और योगी के कड़े तेवर थे। इस कहानी के तीन किरदार हैं, तीनों एक से बढ़ कर एक। जानिए कैसे भाजपा ने योजना बना कर, धीमे-धीमे अमल कर ओपी राजभर को निकाल बाहर किया।
क्या अभी भी 'अर्बन नक्सली' नहीं है आप?

चुनाव परिणामों को लेकर AAP नेता ने दी दंगों, गृह युद्ध की धमकी

भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी के अनुमान के बाद से विपक्षी नेताओं में हिंसा की धमकी की बाढ़ सी आ गई है।

यूट्यूब पर लोग KRK, दीपक कलाल और रवीश को ही देखते हैं और कारण बस एक ही है

रवीश अब अपने दर्शकों से लगभग ब्रेकअप को उतारू प्रेमिका की तरह ब्लॉक करने लगे हैं, वो कहने लगे हैं कि तुम्हारी ही सब गलती थी, तुमने मुझे TRP नहीं दी, तुमने मेरे एजेंडा को प्राथमिकता नहीं माना। जब मुझे तुम्हारी जरूरत थी, तब तुम देशभक्त हो गए।
अशोक लवासा

अशोक लवासा: कॉन्ग्रेस घोटालों से पुराने सम्बन्ध, चुनाव आयोग के कमिश्नर हैं

ऑपइंडिया के पास शुंगलू कमिटी का वह रिपोर्ट है जिसमें अशोक लवासा की बेटी और बेटे के अनुचित लाभ उठाने की बात कही गई है। शुंगलू कमिटी ने ये साफ बताया है कि सिलेक्शन कमिटी ने अन्वी लवासा के प्रोजेक्ट ऑफिसर (PO) के रूप में चयन में उन्हें उनके पॉवरफुल संबंधों की वजह से फेवर किया गया।
आदित्यनाथ ने बदल दी है यूपी पुलिस की सूरत

UP पुलिस का खौफ: किडनैपर ने पुलिस को देखकर खुद को मार ली गोली

कभी सपा के जंगलराज में भागीदार के रूप में बदनाम रही यूपी की पुलिस ने अपराधियों में आज कैसा खौफ बैठा दिया है, इसकी एक बानगी अभी-अभी सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश में एक बिजनेसमैन के बच्चे को अगवा करने वाले अपराधी ने उत्तर प्रदेश पुलिस...
उपेंद्र कुशवाहा

‘सड़कों पर बहेगा खून अगर मनमुताबिक चुनाव परिणाम न आए, समर्थक हथियार उठाने को तैयार’

एग्जिट पोल को ‘गप’ करार देने से शुरू हुआ विपक्ष का स्तर अब खुलेआम हिंसा करने और खून बहाने तक आ गया है। उपेंद्र कुशवाहा ने मतदान परिणाम मनमुताबिक न होने पर सड़कों पर खून बहा देने की धमकी दी है। इस संभावित हिंसा का ठीकरा वे नीतीश और केंद्र की मोदी सरकार के सर भी फोड़ा है।
संजय सिंह

AAP नेता संजय सिंह का अर्नब गोस्वामी पर फूटा ग़ुस्सा- पागलखाने जाएँ, जेल जाएँ या डूब मरें!

AAP के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी की एक वीडियो क्लिप ट्विटर पर शेयर की। इसमें अर्नब EVM हैकिंग को लेकर विपक्षी दलों पर तंज कसते नज़र आए। इसी वीडियो के जवाब में पागलखाने से लेकर डूब मरने तक की बात लिखी गई।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

41,529फैंसलाइक करें
7,970फॉलोवर्सफॉलो करें
64,204सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: