Sunday, April 14, 2024
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कश्मीर में सुरक्षाबलों ने तीन महीने में मार गिराए 48 आतंकी, अलगाववाद से लेकर आतंकवाद पर पैनी नज़र

सुरक्षा एजेंसियों को सूचना मिली है कि प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी व जेकेएलएफ के सदस्यों ने नाम बदलकर गुपचुप तरीके से अपनी गतिविधि शुरू की है। वे स्थानीय लोगों को चुनाव से दूर करने की कोशिश कर रहे हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी जा रही है।

लोकसभा चुनाव की घड़ियाँ नजदीक हैं। सरकार के पास इस समय कई चुनौतियाँ हैं। खासतौर से जम्मू-कश्मीर में जहाँ अभी भी कई आतंकी रह-रह कर सक्रीय भूमिका में आ रहे हैं। अलगाववादियों पर कार्रवाई के बाद से वो भी चुनाव में माहौल बिगाड़ने के लिए सक्रीय हैं। इस समय कश्मीर में सुरक्षा बल अपना दोहरा दायित्व निभा रहे हैं। एक तरफ घाटी में लोक सभा चुनाव और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरा माने जा रहे आतंकियों को ढेर करने का सिलसिला जारी है। अब तक हुए सर्च अभियान और मुठभेड़ में तीन महीने में 48 आतंकियों को सुरक्षा बल मौत के घाट उतार चुके हैं।

दूसरी तरफ आम कश्मीरियों को सुरक्षाबल समझा और यकीन दिला रहे हैं कि उनके विकास और बेहतरी के लिए चुनाव प्रक्रिया में भाग लेना जरूरी है। किसी से भी डरने की जरूरत नहीं है। सुरक्षा बल से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि आम लोग चुनावों में दिलचस्पी ले रहे हैं लेकिन भय और दहशत का माहौल खत्म करना सुरक्षा बलों की पहली जिम्मेदारी है और हम इस अभियान में जुटे हैं।

घाटी में आतंकी गुटों का साथ देने वालों को भी स्पष्ट रूप से आगाह किया जा रहा है कि अगर वे मुख्यधारा से अलग सोच के साथ खड़े होंगे तो उन्हें दुष्परिणाम भुगतना पड़ेगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीआरपीएफ के हवाले से कहा गया कि तीन महीने में सुरक्षा बल उच्च स्तर से मिले संदेश के मुताबिक आतंकियों को ठिकाने लगाने में जुटे हैं। करीब 90 दिन के भीतर जिन 48 आतंकियों को मार गिराने में सफलता मिली है, उनमें जैश के अलावा स्थानीय आतंकी भी शामिल हैं।

सुरक्षा एजेंसियों को सूचना मिली है कि प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी व जेकेएलएफ के सदस्यों ने नाम बदलकर गुपचुप तरीके से अपनी गतिविधि शुरू की है। वे स्थानीय लोगों को चुनाव से दूर करने की कोशिश कर रहे हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बलों से जुड़े सूत्रों ने कहा कि चुनाव के दौरान आतंकवादी गुट अलगाववादी नेताओं के साथ मिलीभगत करके बड़े पैमाने पर हिंसा की साजिश रच रहे हैं। इसके चलते शांतिपूर्ण चुनाव कराना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती है। सुरक्षा एजेंसियों ने खुफिया एजेंसियों की मदद से पूरे घाटी में सघन अभियान शुरू किया है। हर इलाके में सक्रिय आतंकी व अलगाववादी गुटों की गतिविधि खंगाली जा रही है। जिस पर भी लोकसभा चुनाव के दौरान हिंसा या अराजकता फैलाने का संदेह है या जिनकी ऐसी हिस्ट्री रही है, उन्हें हिरासत में भी लिया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बलों के अधिकारियों ने कहा कि घाटी में सुरक्षा बल आतंकियों व अलगाववादी गुटों की हर रणनीति का जवाब देने को तैयार हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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