Tuesday, August 9, 2022
Homeरिपोर्टराष्ट्रीय सुरक्षामणिपुर में सेना के काफिले पर आतंकी हमला: कर्नल और सेना के कई जवान...

मणिपुर में सेना के काफिले पर आतंकी हमला: कर्नल और सेना के कई जवान हुए बलिदान, CO के परिवार के सदस्यों की भी मौत

मणिपुर की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का गठन 1978 में किया गया था। स्वतंत्र मणिपुर की माँग करने वाले इस संगठन को भारत सरकार ने आतंकी संगठन घोषित कर रखा है। इससे पहले भी मणिपुर में यह संगठन धोखे से भारतीय सुरक्षाबलों पर हमले करता रहा है।

मणिपुर में शनिवार (13 नवंबर 2021) को सेना के काफिले पर उग्रवादियों ने बड़ा हमला कर दिया है। यह हमला चुराचांदपुर जिले के सिनघाट सब-डिवीजन में हुआ है। इस हमले में कर्नल और उनके परिवार के सदस्य भी शहीद हो गए हैं। बताया जा रहा है कि सेना की टुकड़ी पर घात लगाकर बैठे आतंकियों ने हमला किया है।

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस घटना पर शोक व्यक्ति किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर कहा, “मणिपुर के चुराचांदपुर में असम राइफल्स के काफिले पर कायराना हमला बेहद दर्दनाक और निंदनीय है। देश ने 46 असम राइफल्स के सीओ और उनके परिवार के दो सदस्यों सहित 5 बहादुर सैनिकों को खो दिया है। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएँ। जल्द ही दोषियों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाएगा।”

असम राइफल्स यूनिट के काफिले में क्विक रिएक्शन टीम के साथ ही कमांडिंग ऑफिसर और उनका परिवार भी शामिल था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आतंकी हमले में सीओ और उनके परिवार के दो सदस्यों तथा क्विक एक्शन टीम के तीन जवानों की मौत हो गई। हमले के पीछे मणिपुर की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है।

मणिपुर के सीएम बिरेन सिंह ने ट्वीट कर घटना पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा, ”46 असम राइफल्स के काफिले पर कायरतापूर्ण हमले की मैं कड़ी निंदा करता हूँ। इसमें सीओ और उनके परिवार समेत कुछ कर्मियों की मौत हो गई। राज्य सुरक्षाबल और अर्धसैनिक बल पहले से ही आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चला रहे हैं। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।”

बता दें कि मणिपुर की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का गठन 1978 में किया गया था। स्वतंत्र मणिपुर की माँग करने वाले इस संगठन को भारत सरकार ने आतंकी संगठन घोषित कर रखा है। इससे पहले भी मणिपुर में यह संगठन धोखे से भारतीय सुरक्षाबलों पर हमले करता रहा है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

कोउ नृप होउ हमहि (जनता) ही हानी… नीतीश इधर रहें या उधर जाएँ, बिहार घुट-घुटकर ही जीता रहेगा

बिहार सियासी तौर पर अभिशप्त है। फिर भी जंगलराज की छाया से दूर रहने का सुकून था। हालिया राजनीतिक हलचल उस सुकून पर हमले जैसा है।

जिस जेल में रखा गया ‘आतंकी’ उसके कमोड पर बैठ बीती पार्थ चटर्जी की रात, सब्जी-चावल के लिए रोए: अर्पिता मुखर्जी का भी बुरा...

SSC स्कैम में फँसे पार्थ चटर्जी के लिए जेल में रात गुजारना काफी दिक्कत भरा रहा। उन्होंने पूरी रात कमोड पर बैठकर बिताई, वहीं उनके साथ कैदियों ने गाली-गलौच की।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
212,463FollowersFollow
416,000SubscribersSubscribe