Tuesday, June 15, 2021
Home रिपोर्ट राष्ट्रीय सुरक्षा कारगिल के 20 साल: देश का ऐसा शूरवीर, जिसे मारने के लिए पाकिस्तान ने...

कारगिल के 20 साल: देश का ऐसा शूरवीर, जिसे मारने के लिए पाकिस्तान ने चलाया ‘ऑपरेशन शेरशाह’

माँ-बाप के लिए लव, साथी जवानों के लिए शेरशाह और यह दिल माँगे मोर नारे को हिन्दुस्तानी फ़ौज का मंत्र बनाने वाले कैप्टन विक्रम बत्रा के बलिदान को 20 साल हो चुके हैं। लेकिन आज भी उनका कमरा वैसा ही है, जैसा छोड़ कर वे जंगे मैदान में गए थे। जुड़वाँ भाई आज भी उनकी तस्वीर को सलामी दे कर ही घर से निकलते हैं।

कारगिल का युद्ध शांति की पीठ पर धोखे से भोंके गए एक खंजर की कहानी है। इस युद्ध का अंत पाकिस्तान की हार और भारत की विजय के साथ हुआ। लेकिन, इस विजय की क़ीमत बहुत बड़ी थी। हमारे देश के कई जाँबाज़ जवानों को इस युद्ध में वीरगति मिली। इस लेख में हम आपको उस वीर सपूत के बारे में बताएँगे जिन्होंने ‘ये दिल माँगे मोर’ नारे को हिन्दुस्तानी फ़ौज का मंत्र बना दिया था। हम बात कर रहे हैं… 13 जम्मू-कश्मीर राइफ़ल्स के बलिदानी कैप्टन विक्रम बत्रा की।

विक्रम बत्रा का जन्म 9 सितंबर 1974 को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा ज़िले के एक छोटे-से शहर पालमपुर में हुआ था। दो बहनों के बाद, जुड़वा बेटे यानी विक्रम बत्रा और विशाल बत्रा का जन्म पिता गिरधारी लाल बत्रा (जीएल बत्रा) और माँ कमल कांता बत्रा के लिए ढेरों ख़ुशियाँ लेकर आया था। रामायण का पाठ करने वाली माँ ने अपने दोनों बेटों को लव-कुश का नाम दिया और अपने घर का नाम रखा लव-कुश विला। विक्रम बत्रा का बचपन आम बच्चों जैसा ही था। लेकिन एक कहावत है- पूत के पाँव पालने में ही दिख जाते हैं…और पिता जीएल बत्रा को यह भान हो चुका था कि लव यानी विक्रम बत्रा में कुछ तो अलग है।

पालमपुर के बाद कॉलेज की पढ़ाई के लिए विक्रम चंडीगढ़ चले गए। उनका सिलेक्शन मर्चेंट नेवी और इंडियन आर्मी दोनों में हुआ। एक तरफ आराम की ज़िदगी थी तो दूसरी तरफ, देश के लिए कुछ करने का जज़्बा। विक्रम बत्रा की माँ कमल कांता को आज भी वह दिन याद है जब उनके बेटे ने अपना फ़ैसला सुनाते हुए कहा, “माँ पैसा ही सब कुछ नहीं होता, मुझे देश के लिए कुछ करना है” इस बात पर विक्रम बत्रा के माता-पिता को आज भी बड़ा फक्र है।

पाकिस्तान की नीयत में ही खोट

विक्रम बत्रा बतौर लेफ्टिनेंट 13 जम्मू-कश्मीर राइफ़ल्स का हिस्सा बन गए और उनकी पोस्टिंग द्रास सेक्टर के कारगिल में हुई। भारत हमेशा से ही शांति का दूत रहा है, 1999 में भी भारत शांति ही चाहता था। शांति का संदेश लेकर ही तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लाहौर की बस यात्रा की थी। लेकिन पाकिस्तान की नीयत जैसी आज है वैसी ही तब भी थी। धोखा देने की नीयत। उसने चुपचाप जम्मू-कश्मीर के कारगिल में द्रास सेक्टर की पहाड़ियों में अपना क़ब्ज़ा जमा लिया। वहाँ अपने बंकर्स बना लिए। उसका इरादा भारत पर एक बड़ा हमला करने की थी। लेकिन, धोखे के इस दॉंव को हमारे जवानों ने विफल कर दिया।

‘शेरशाह’ यानी ‘शेरशाह ऑफ़ कारगिल’

विक्रम बत्रा और उनके साथियों को श्रीनगर लेह हाईवे के करीब प्वाइंट 5410 को हर हाल में दुश्मन से वापस छीनना था। इस लड़ाई में विक्रम बत्रा ने अपने अदम्य साहस का परिचय दिया और बताया कि जज़्बा किसे कहते हैं, हिम्मत किसे कहते हैं। 20 जून 1999 की सुबह 3:30 बजे विक्रम बत्रा और उनके साथियों ने इस महत्वपूर्ण चोटी पर फिर से तिरंगा लहरा दिया। इस जीत के बाद विक्रम बत्रा ने कहा था, “यह दिल माँगे मोर।” और उसी वक़्त से यह नारा बन गया हिंदुस्तानी फ़ौज का मंत्र। विक्रम बत्रा के जज़्बे को देखते हुए यूनिट ने उनको नया नाम दिया ‘शेरशाह’ यानी ‘शेरशाह ऑफ़ कारगिल’

पाकिस्तानी फ़ौज में विक्रम बत्रा का काफ़ी ख़ौफ़ था। इस हद तक था कि उन्हें मारने के लिए उन्होंने जो योजना बनाई उसका नाम ‘ऑपरेशन शेरशाह’ रखा।

युद्ध में विक्रम बत्रा का काम अभी पूरा नहीं हुआ था। अभी और ऐसे कई इलाके थे जिन पर दुश्मन का क़ब्ज़ा था। उनका अगला टारगेट प्वाइंट 4875 से पाकिस्तानियों को मार भगाना था। इस ऑपरेशन पर निकलने से पहले उन्होंने अपनी माँ से बात की थी। इसके अलावा, उन्होंने अपने जुड़वा भाई विशाल बत्रा को भी एक चिट्ठी लिखी थी।

धोखे से वार   

कैप्टन बत्रा अपने साथियों के साथ प्वाइंट 4875 को दुश्मन के क़ब्ज़े से छुड़ाने निकल गए। दरअसल, यह एक ऐसी जगह थी जहाँ से श्रीनगर लेह राजमार्ग पर दुश्मन अपना दबदबा बनाए रख सकता था। इसे खाली कराना बहुत जरूरी था। लेकिन, वहाँ पहुँचना बेहद जोख़िम भरा था। 17,000 फीट की ऊँची पहाड़ी और सीधी चढ़ाई कोई आसान काम नहीं था। लेकिन आसान काम विक्रम बत्रा को पसंद भी कहाँ था। गोलियाँ चल रही थीं, गोले बरस रहे थे। लेकिन, विक्रम बत्रा और उनके साथियों के पाँव एक क्षण के लिए भी नहीं डगमगाए, क्योंकि रुकना तो उन्होंने सीखा ही नहीं था। यह लड़ाई क़रीब 36 घंटे तक चली। 7 जुलाई 1999 को लड़ी गई इस लड़ाई में अपने जूनियर लेफ्टिनेंट नवीन को बचाते हुए विक्रम बत्रा वीरगति को प्राप्त हो गए।

माँ ने आज भी वैसा ही रखा है लव का कमरा

माँ ने विक्रम बत्रा के कमरे को आज भी वैसा ही रखा हुआ है जैसा उनके बलिदान से पहले था। विक्रम के जुड़वा भाई विशाल आज भी उनकी तस्वीर को सैल्यूट किए बिना घर से नहीं निकलते। उन्हें उस वक़्त बेहद गर्व महसूस होता है जब कोई कहता कि तुम विक्रम की तरह दिखते हो। विशाल आज जिस मुक़ाम पर हैं उसका पूरा श्रेय वो विक्रम बत्रा को ही देते हैं। लोग उन्हें विशाल बत्रा के तौर पर नहीं, बल्कि विक्रम बत्रा के भाई के तौर पर जानते हैं।

उनका कहना है कि भाई की याद तो हर पल आती है। वो हमारे रोम-रोम में बसा हुआ है। विक्रम के पिता का कहना है कि एक बेटे के तौर पर उसने हमारा जीवन धन्य कर दिया है। एक पिता को अपने बेटे से और क्या चाहिए।

कैप्टन बत्रा की बहन सीमा बत्रा सेठी की तो आज भी अपने भाई के बारे में बातें करते हुए आँखें डबडबा जाती है। भावुक होकर उन्होंने बताया वो हमारा रोल मॉडल है। मेरी ईश्वर से यही प्रार्थना है कि दुनिया में हर बहन को ऐसा ही भाई मिले…।

विक्रम बत्रा की माँ का कहना है कि देश के युवाओं को आर्मी ज्वॉइन करनी चाहिए और जब भी देश के लिए बलिदान होने का मौक़ा मिले तो उसे गँवाना नहीं चाहिए। 26 जनवरी 2000 को विक्रम बत्रा को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।


  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा किए गए जमीन के सौदे की पूरी सच्चाई, AAP के खोखले दावों की पूरी पड़ताल

अंसारी को जमीन का मालिकाना मिलने के बाद मंदिर ट्रस्ट और अंसारी के बीच बिक्री समझौता हुआ। अंसारी ने जमीन को 18.5 करोड़ रुपए में ट्रस्ट को बेचने की सहमति जताई।

2030 तक 2.6 करोड़ एकड़ बंजर जमीन का होगा कायाकल्प, 10 साल में बढ़ा 30 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र: UN वर्चुअल संवाद में PM...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र में मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे पर उच्च स्तरीय वर्चुअल कार्यक्रम को संबोधित किया।

ट्रस्ट द्वारा जमीन के सौदे में घोटाले का आरोप एक सुनियोजित दुष्प्रचार, समाज में उत्पन्न हुई भ्रम की स्थिति: चंपत राय

पारदर्शिता के विषय में चंपत राय ने कहा कि तीर्थ क्षेत्र का प्रथम दिवस से ही निर्णय रहा है कि सभी भुगतान बैंक से सीधे खाते में ही किए जाएँगे, सम्बन्धित भूमि की क्रय प्रक्रिया में भी इसी निर्णय का पालन हुआ है।

श्रीराम मंदिर के लिए सदियों तक मुगलों से सैकड़ों लड़ाई लड़े तो कॉन्ग्रेस-लेफ्ट-आप इकोसिस्टम से एक और सही

जो कुछ भी शुरू किया गया है वह हवन कुंड में हड्डी डालने जैसा है पर सदियों से लड़ी गई सैकड़ों लड़ाई के साथ एक लड़ाई और सही।

महाराष्ट्र में अब अकेले ही चुनाव लड़ेगी कॉन्ग्रेस, नाना पटोले ने सीएम उम्मीदवार बनने की जताई इच्छा

पटोले ने अमरावती में कहा, ''2024 के चुनाव में कॉन्ग्रेस महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। केवल कॉन्ग्रेस की विचारधारा ही देश को बचा सकती है।''

चीन की वुहान लैब में जिंदा चमगादड़ों को पिंजरे के अंदर कैद करके रखा जाता था: वीडियो से हुआ बड़ा खुलासा

वीडियो ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के उस दावे को भी खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि चमगादड़ों को लैब में रखना और कोरोना के वुहान लैब से पैदा होने की बात करना महज एक 'साजिश' है।

प्रचलित ख़बरें

राम मंदिर में अड़ंगा डालने में लगी AAP, ट्रस्ट को बदनाम करने की कोशिश: जानिए, ‘जमीन घोटाले’ की हकीकत

राम मंदिर जजमेंट और योगी सरकार द्वारा कई विकास परियोजनाओं की घोषणाओं के कारण 2 साल में अयोध्या में जमीन के दाम बढ़े हैं। जानिए क्यों निराधार हैं संजय सिंह के आरोप।

‘हिंदुओं को 1 सेकेंड के लिए भी खुश नहीं देख सकता’: वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप से पहले घृणा की बैटिंग

भारत के पूर्व तेज़ गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद ने कहा कि जीते कोई भी, लेकिन ये ट्वीट ये बताता है कि इस व्यक्ति की सोच कितनी तुच्छ और घृणास्पद है।

सिख विधवा के पति का दोस्त था महफूज, सहारा देने के नाम पर धर्मांतरण करा किया निकाह; दो बेटों का भी करा दिया खतना

रामपुर जिले के बेरुआ गाँव के महफूज ने एक सिख महिला की पति की मौत के बाद सहारा देने के नाम पर धर्मांतरण कर उसके साथ निकाह कर लिया।

केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिर होने वाली थी पिटाई? लोगों से पहले ही उतरवा लिए गए जूते-चप्पल: रिपोर्ट

केजरीवाल पर हमले की घटनाएँ कोई नई बात नहीं है और उन्हें थप्पड़ मारने के अलावा स्याही, मिर्ची पाउडर और जूते-चप्पल फेंकने की घटनाएँ भी सामने आ चुकी हैं।

6 साल के पोते के सामने 60 साल की दादी को चारपाई से बाँधा, TMC के गुंडों ने किया रेप: बंगाल हिंसा की पीड़िताओं...

बंगाल हिंसा की गैंगरेप पीड़िताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बताया है कि किस तरह टीएमसी के गुंडों ने उन्हें प्रताड़ित किया।

इब्राहिम ने पड़ोसी गंगाधर की गाय चुराकर काट डाला, मांस बाजार में बेचा: CCTV फुटेज से हुआ खुलासा

इब्राहिम की गाय को जबरदस्ती घसीटने की घिनौनी हरकत सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। गाय के मालिक ने मालपे पुलिस स्टेशन में आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
103,898FollowersFollow
393,000SubscribersSubscribe