Thursday, January 20, 2022
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पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले मुश्ताक ने खोले कई राज

इन दोनों ने जम्मू के नगरोटा, सतवारी के आर्मी स्टेशन, कालू चक आदि की भी वीडियोग्राफी कर पाकिस्तान भेजी थी।

आर्मी स्टेशन रत्नूचक की जानकारी पाकिस्तान भेजने के आरोप में कल (मई 29, 2019) जिन दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। उनसे पूछताछ में अहम खुलासे हुए हैं। जाँच में इनके पास से दो मोबाइल बरामद किए गए, जिनमें एक दर्जन से ज्यादा नंबर पाकिस्तान के हैं। संदिग्धों ने इनमें से एक नंबर पर स्टेशन की वीडियो बनाकर भेजी थी। पूछताछ में मालूम चला है कि वीडियोग्राफी की योजना हिमाचल प्रदेश के शिमला में बनाई गई थी, क्योंकि दोनों संदिग्ध शिमला में ही एक दूसरे के संपर्क में आए थे। शिमला में ही डोडा के रहने वाले मुश्ताक ने और कठुआ के रहने वाले नदीम अख्तर में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दिन के लिए काम करने की सहमति बनी थी।

डोडा से मजदूरों को हिमाचल प्रदेश ले जाने वाला मुश्ताक पेशे से ठेकेदार है। शिमला में उसका संपर्क नदीम से हुआ था और उसने उसे हिजबुल के लिए काम करने के लिए तैयार किया। साथ ही, मुश्ताक कई अन्य युवकों को भी हिजबुल के लिए काम करने के लिए तैयार कर रहा था। अमर उजाला की ख़बर के मुताबिक मुश्ताक का एक चचेरा भाई शाहनवाज खान कुछ समय पहले पीओके के कोटली जाकर आतंकी बन गया था।

शाहनवाज और मुश्ताक में लगातार बात होती रहती है। नदीम को अपने साथ जोड़ने के लिए उसने शाहनवाज के नाम का ही सहारा लिया। मुश्ताक ने नदीम को बताया कि अगर वह हिजबुल के लिए काम करेगा तो उसे मोटी रकम मिलेगी। इसके बाद ही दोनों के बीच सहमति बनी और दोनों हिजबुल के लिए काम करने लगे। मुश्ताक के खाते में आतंकी संगठन से पैसे भी आने शुरू हो गए। दोनों मिलकर आर्मी स्टेशनों की जानकारी पीओके भेजने लगे।

इन दोनों संदिग्धों से लगातार तमाम सुरक्षा एजेंसियाँ पूछताछ कर रही हैं। पूछताछ में इन लोगों ने कुछ और लोगों के नाम बताए हैं, जिनको पकड़ने के लिए बुधवार (29 मई) को पुलिस ने कई इलाकों में छापेमारी की। इनसे पूछताछ में पता चला कि इन दोनों को पाकिस्तान में जानकारी भेजने के लिए मोटी रकम मिलती थी। खबरों के मुताबिक शाहनवाज ने रत्नूचक आर्मी स्टेशन की रेकी (टोह लेना) करने का काम मुश्ताक को दिया था। इसी कार्य के लिए मुश्ताक और नदीम विशेष तौर पर शिमला से जम्मू आए थे। यहाँ आकर दोनों ने रेकी भी की थी और अपने मोबाइल फोन से जम्मू के सैन्य ठिकानों की जानकारी पीओके में बैठे हैंडलर को भी भेजी थी।

जानकारी प्राप्त होते ही वहाँ बैठे हैंडलर इन्हें थंब्स अप का साइन भेजते थे, जिससे यह सुनिश्चित होता था कि भेजे गए फोटो और वीडियो देख लिए गए हैं। बताया जा रहा है कि इन दोनों ने जम्मू के नगरोटा, सतवारी के आर्मी स्टेशन, कालू चक आदि की भी वीडियोग्राफी कर रेकी की थी।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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