Homeरिपोर्टसीएम के निर्देश पर बिहार में मछलियों पर लगे बैन पर मिली राहत

सीएम के निर्देश पर बिहार में मछलियों पर लगे बैन पर मिली राहत

ज़िन्दा मछलियों पर लगा बैन हटा दिया गया हैं । लेकिन, मृत मछलियों की सभी किस्मों की बिक्री, परिवहन और भंडारण पर 15 दिन का लंबा प्रतिबंध जारी रहेगा।

मुख्यमंत्री नितीश कुमार के निर्देश पर बिहार की राजधानी पटना में मछलियों पर लगा बैन आंशिक रूप से हटा दिया गया है। मछिलयों पर लगे बैन के दौरान मछली विक्रेताओं के भारी विरोध प्रदर्शन के कारण नीतीश सरकार के मंत्री मदन साहनी ने सीएम से मुलाकात कर इस बैन को हटाने का आग्रह किया था।

रिपोर्ट के अनुसार, ज़िन्दा मछलियों पर लगा बैन हटा दिया गया हैं क्योंकि ज़िन्दा मछलियों में किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं पायी गई है। लेकिन, मृत मछलियों की सभी किस्मों की बिक्री, परिवहन और भंडारण पर 15 दिन का लंबा प्रतिबंध जारी रहेगा।

मालूम हो कि बिहार में आंध्र प्रदेश, बंगाल सहित अन्य राज्यों से आने वाली मछलियों पर सरकार ने 14 जनवरी को बैन लगा दिया था क्योंकि इन मछलियों में जानलेवा रसायन पाया गया था। सरकार ने 14 जनवरी को आदेश ज़ारी कर बिहार के अंदर किसी भी तरह की मछली की खरीद बिक्री और उसके खाने पर रोक लगा दी थी। आदेश का पालन नहीं करने वालों पर 10 लाख रुपए जुर्माना और 7 साल तक की सज़ा का प्रावधान किया था। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 59 के तहत, जो असुरक्षित भोजन के लिए दंड से संबंधित है।

बता दें कि बिहार सरकार के इस निर्णय के ख़िलाफ़ मछली व्यापारियों ने कड़ा विरोध दर्ज़ कराया था। उन्होंने कहा कि उन्हें ये बातें अख़बारों से माध्यम से पता चलीं। राज्य सरकार के इस निर्णय के ख़िलाफ़ विरोध दर्ज़ कराने के लिए क़रीब 500 मछली व्यापारियों ने पटना की मछली मंडी में शनिवार (जनवरी 12, 2019) को एक बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में व्यापारियों ने बिहार सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस फार्मलिन की बात सरकारी महक़मों द्वारा की जा रही है, वो सरासर झूठी और बेबुनियाद है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

मुफ्त इलाज का ढकोसला और महँगे मेडिकल बिल: कहाँ खर्च हो रहा है आम आदमी का पैसा?

सरकार ने उन दवाओं को इस प्राइस कंट्रोल से बाहर रखा है जिन्हें कंपनियाँ 'पेशेंट असिस्टेंस प्रोग्राम' (PAPs) के तहत भारी छूट पर देती हैं।

आर्कबिशप पीटर मचाडो कौन हैं, जो चाहता है धर्मांतरण विरोधी कानून और गोहत्या कानून में बदलाव: कर्नाटक में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे से क्या...

आर्कबिशप की कॉन्ग्रेस अध्यक्ष खड़गे से मुलाकात के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। बैंगलुरु में हुई इस मुलाकात के बाद आर्कबिशप ने खुद अपनी माँगों को सार्वजनिक किया।
- विज्ञापन -