Homeदेश-समाजपद्म पुरस्कार: गुमनाम लेकिन महान लोगों के नाम से... अवॉर्ड ख़ुद हुआ सम्मानित!

पद्म पुरस्कार: गुमनाम लेकिन महान लोगों के नाम से… अवॉर्ड ख़ुद हुआ सम्मानित!

पद्म पुरस्कार जो कभी राजनीति और लॉबीयिंग के आरोप तले दब जाती थी, आज गुमनाम लेकिन महान व कर्मठ लोगों के साथ जुड़ने से और भी सम्मानीय हो गया है।

केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस से पहले पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। सरकार ने इन पुरस्कारों के तहत 4 हस्तियों को पद्म विभूषण, 14 को पद्म भूषण जबकि 94 लोगों को पद्मश्री पुरस्कारों के लिए चयनित किया है। इस साल पद्म पुरस्कारों के घोषणा की सबसे अच्छी बात यह है कि देश भर के जिन लोगों को इस पुरस्कार के लिए चयनित किया गया, उनमें से ज्यादातर लोग ऐसे हैं, जो गुमनाम हैं।

इस साल पद्म पुरस्कार के लिए चुने गए ज्यादातर लोग मीडिया की चकाचौंध से दूर रहकर ईमानदारी से अपना काम कर रहे थे। सरकार ने देश के इन महान लोगों को पद्म पुरस्कार देकर एक तरह से उनके जज्बे को सलाम किया है। आइए ऐसे ही कुछ महान लोगों के बारे में जानते हैं –

जमुना टुडू झारखंड की ‘लेडी टार्जन’

जमुना टुडू जमशेदपुर के चाकुलिया की रहने वाली हैं। जमुना को जंगल माफ़ियाओं से लड़कर अपना जंगल बचान के लिए 2013 में ‘फिलिप्स ब्रेवरी अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जा चुका है। जमुना टुडू अपने क्षेत्र के जंगलों की हिफ़ाज़त के लिए अपने साथियों के साथ सुबह ही कुल्हाड़ी हाथ में लिए निकल जाती हैं, इसके बाद शाम को ही वापस घर लौटती हैं।

इस बीच यदि कोई माफ़िया जंगल में लकड़ी काटने के लिए आता है तो उसको टार्जन लेडी की चुनौती का सामना करना पड़ता है। कई बार जमुना माफ़ियाओं से लड़ते हुए ज़ख़्मी होकर घर लौटी हैं। यही वजह है कि सरकार ने जमुना के हिम्मत और हौसले को देखते हुए उन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया है।

लिस्ट में हजारीबाग के बुलु इमाम का भी नाम

देश भर के चुनिंदा लोगों को दिए जाने वाले इस राष्ट्रीय पुरस्कार की लिस्ट में हजारीबाग के बुलु इमाम का भी नाम है। 76 साल के बुलु ने सोहराय व कोहबर कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का काम किया है। बुलु देश-विदेश में 50 से अधिक प्रदर्शनी लगा चुके हैं। बुलु इमाम को इससे पहले गाँधी शांति पुरस्कार भी दिया चुका है।

मुज़फ्फरपुर वाली किसान चाची

मुज़फ्फरपुर के राजकुमारी देवी की शादी महज़ 13 साल में हो गई। बचपन से अपने ही परिवार की बंदिशों में पलने-बढ़ने और शादी के बाद ससुराल में दहलीज़ से बाहर पैर रखना भी उनके लिए गुनाह माना जाता था। लेकिन परिवार की माली हालत ने राजकुमारी को घर से निकलने के लिए मजबूर कर दिया है। घर और बाहर के लोगों की ताना सुनना राजकुमारी के लिए आम हो गया था। इन सबके बावजूद अपने मज़बूत इरादे की ताक़त पर राजकुमारी घर में अचार व मोरब्बा तैयार करती थीं और साइकिल से तैयार माल को बाजार में ले जाकर बेचती थीं। आज वही राजकुमारी गाँव की दर्जनों महिलाओं को रोज़गार दे रही हैं। वर्तमान समय में राजकुमारी देवी 16 तरह के प्रोडक्ट को तैयार करती हैं। सरकार ने राजकुमारी देवी के हिम्मत व हौसला के लिए इस पुरस्कार में उनका भी नाम जोड़ दिया है।

ओमेश कुमार भारती भी लिस्ट में

पेशे से डॉक्टर ओमेश पिछले 17 सालों से एंटी रैबीज़ वैक्सीन पर काम कर रहे थे। कुत्तों के काटने पर लोगों के इलाज को सस्ता बनाने के लिए डॉ भारती इस प्रयास में लगे हुए थे। डॉ भारती के इस रिसर्च के महत्व को समझते हुए ‘वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन’ ने 2018 में उनके शोध को मान्यता दे दी। कभी 35,000 रुपए में रैबीज़ का इलाज डॉ भारती के शोध के बाद महज़ 350 रुपए में संभव हो पाया है। भारत सरकार ने डॉ भारती के रिसर्च के महत्व को समझते हुए उन्हें पद्म पुरस्कार की लिस्ट में शामिल किया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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