Thursday, December 3, 2020
Home देश-समाज कॉन्ग्रेस ने 60 साल तक लुटेरों को शरण दी, BJP ने सिर्फ 66 मामलों...

कॉन्ग्रेस ने 60 साल तक लुटेरों को शरण दी, BJP ने सिर्फ 66 मामलों से ही वसूले ₹80,000 करोड़

मार्च 2019 तक, कई रेजॉल्युशन प्रस्ताव सॉल्व होने के करीब हैं। अंतिम चरणों में 1.80 लाख करोड़ रुपए रिकवरी की उम्मीद है। 52,000 करोड़ रुपए एस्सार स्टील लिमिटेड से और भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड से 18,000 करोड़ रुपए रिकवरी की उम्मीद है।

इस लेख का उद्देश्य एनडीए सरकार द्वारा न्याय देने और लेनदारों (creditors) को बकाया राशि वसूलने के लिए शुरू की गई, नई दिवाला और दिवालियापन कानून, 2016 (new Insolvency and Bankruptcy Code, 2016) की दक्षता का मूल्यांकन है। अब तक ऐसी कई दिवालिया कंपनियों ने कॉन्ग्रेस शासन के दौरान बने उलझाऊ कानून की शरण लेकर खुद को बचाते आ रहे थे।

इनसॉल्वेंसी रेजोल्युशन प्रक्रिया में कॉन्ग्रेस के समय के शामिल कानून

  • बीमार औद्योगिक कंपनी अधिनियम, 1985 (The Sick Industrial Companies Act, 1985)
  • वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण और सुरक्षा हित अधिनियम, 2002 का प्रवर्तन (The Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002)
  • बैंक और वित्तीय संस्थान अधिनियम, 1993 के कारण ऋण की वसूली (The Recovery of Debt Due to Banks and Financial Institutions Act, 1993)
  • कंपनी अधिनियम, 2013 (The Companies Act, 2013

कई कानूनी रास्ते और एक थकाऊ लम्बी कोर्ट प्रणाली के कारण भारत गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों का एक बड़ा ढेर बन चुका है। बैंकरप्सी कोड भारत में क्रेडिट को अधिक आसानी से प्रवाहित करने और अपने दावों के त्वरित निपटान के लिए निवेशकों में विश्वास पैदा करने का प्रयास है। कोड कॉरपोरेट संस्थाओं और व्यक्तियों के दिवालिया होने से संबंधित मौजूदा कानूनों को एकल कानून में समेकित करता है।

इस कानून ने लेनदारों (creditors) के वैधानिक अधिकारों के प्रवर्तन से संबंधित कानून को एकीकृत किया है और लेनदारों के अधिकारों को समाप्त किए बिना एक देनदार (debtor) कंपनी को अपने ऋण को बनाए रखने के लिए पुनर्जीवित किया जा सकता है।

इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड: – NDA Vs UPA

कॉन्ग्रेस ने कमर्शियल इन्सॉल्वेंसी को सुलझाने की जो पुरातन व्यवस्था की विरासत छोड़ी थी, उसके तहत कंपनी अधिनियम में कंपनी को बंद करने का प्रावधान था यदि वह अपने ऋण का भुगतान करने में असमर्थ थी। इसके अतिरिक्त, कॉन्ग्रेस सरकार ने बीमार कंपनियों के पुनर्वास के लिए 1980 के दशक में SICA लागू किया था। यह उन कंपनियों पर लागू होता है जिनकी निवल संपत्ति (Net Worth) नकारात्मक हो गई है।

यह कानून पूरी तरह से विफल साबित हुआ। यद्यपि यह कानून पुनर्वास के लिए बनाया गया था, लेकिन कई बीमार कंपनियों को लेनदारों के खिलाफ एक सुरक्षात्मक लोहे ढाल की तरह उपयोग किया गया। ऋण वसूली न्यायाधिकरण बैंकों को सभी बकाया राशि की वसूली के लिए सक्षम बनाने के लिए बनाया गया था। लेकिन ये भी कर्ज वसूलने के लिए अत्यधिक कुशल तंत्र साबित नहीं हुए हैं। गैर-कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी के लिए प्रांतीय इन्सॉल्वेंसी एक्ट लागू था। यह सभी कानून अप्रभावी था और उपयोग न होने के कारण भी अपनी उपयोगिता खो चुके थे।

अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने SARFAESI कानून बनाया था जो पहले के कानून से काफी बेहतर साबित हुआ था। वर्ष 2000 में, एनपीए ने दोहरे अंको के साथ  उछाल भरी थी। SARFESI कानून और RBI द्वारा विवेकपूर्ण ब्याज दर प्रबंधन दोनों की वजह से NPA को नीचे लाने में मदद मिली।

इसके बाद, 2008 और 2014 के बीच, बैंकों ने अंधाधुंध उधार दिए। इससे एनपीए का प्रतिशत बहुत ज़्यादा बढ़ गया, जो आरबीआई के एसेट क्वालिटी रिव्यू द्वारा उजागर किया गया था। इस पर एनडीए सरकार द्वारा शीघ्र कार्रवाई की गई। एक विशेषज्ञ समिति नियुक्त की गई, जिसने 2015 में आईबीसी की सिफारिश करते हुए अपनी रिपोर्ट सबमिट की।

इसके बाद, एक विधेयक लोकसभा में पेश किया गया और संसद की संयुक्त समिति को रेफर किया गया। संसदीय समिति ने इस विधेयक पर अपने सुझाव दिए और विधेयक में कुछ बदलावों की सिफारिश करते हुए एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। IBC को मई 2016 में संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित किया गया था। यह आर्थिक विधायी परिवर्तन संसद द्वारा किया गया था।

तुरंत, एनसीएलटी का गठन किया गया, इनसॉल्वेंसी बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया की स्थापना की गई और नियमों को तैयार किया गया। 2016 के अंत तक कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी के मामले एनसीएलटी द्वारा देखे जा रहे थे।

IBC प्रक्रिया के माध्यम से शुरुआत बेहद संतोषजनक रही है। इसने ऋणी-लेनदार संबंध को बदल दिया है। लेनदार अब देनदार का पीछा नहीं करता है। एनसीएलटी के गठन और आईबीसी के कार्यान्वयन पर इसकी कार्यक्षमता ने कानून में सुधार की आवश्यकता की तरफ ध्यान आकर्षित किया था। तब से दो विधायी हस्तक्षेप हुए हैं।

अब एनसीएलटी उच्च विश्वसनीयता का एक विश्वसनीय मंच बन गया है। जो कंपनियों को इंसॉल्वेंसी की तरफ ले जाते हैं, उन्हें ही प्रबंधन से बाहर निकाल दिया जाता है। नए प्रबंधन का चयन एक ईमानदार और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत होती है। जिसमें कोई राजनीतिक या सरकारी हस्तक्षेप नहीं हुआ हो।

दिवालिया कंपनियों में डूबे धन की वसूली तीन तरीकों से हुई

सबसे पहले, धारा 29 (ए) की शुरुआत के बाद कंपनियां रेड लाइन को पार नहीं करने के लिए भुगतान कर रही हैं. साथ  ही इसे एनसीएलटी को रेफर कर दिया जाता है। नतीजतन, बैंकों को संभावित देनदारों से धन प्राप्त होना शुरू हो जाता है जो डिफ़ॉल्टर घोषित होने से बचने के लिए भुगतान करते हैं। बकाएदारों को भी पता है कि एक बार जब वे IBC में आ गए तो वे निश्चित रूप से धारा 29 (A) के कारण प्रबंधन से बाहर हो जाएँगे।

दूसरे, एक बार लेनदार की एक याचिका एनसीएलटी के समक्ष दायर कर दी जाती है, तो देनदार पहले स्तर पर ही भुगतान करना शुरू कर देते हैं ताकि दिवालिया होने की घोषणा न हो।

तीसरा, कई बड़े दिवालिया मामलों को पहले ही हल कर लिया गया है और कई हल होने के करीब हैं। जिनका निराकरण नहीं किया जा सकता है वे परिसमापन (liquidation) की ओर अग्रसर हैं और बैंकों को परिसमापन मूल्य प्राप्त हो रहा है।

अब तक

  • 1322 मामले एनसीएलटी द्वारा लिए गए हैं
  • प्रवेश से पहले (pre-admission stage) के चरण में 4452 मामलों का निस्तारण किया गया है
  • 66 को स्थगन (adjudication) के बाद सुलझा लिया गया है
  • परिसमापन (liquidation) के लिए 260 मामलों को आदेश दिया गया है
  • अभी तक 66 रिज़ॉल्यूशन के मामलों में, लेनदारों द्वारा लगभग 80,000 करोड़ रुपए की वसूली हो चुकी है

एनसीएलटी डेटाबेस के अनुसार, पूर्व प्रवेश स्तर पर निपटाए गए 4452 मामलों में, जाहिर तौर पर तय की गई राशि लगभग 2.02 लाख करोड़ रुपए थी। भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड और एस्सार स्टील इंडिया लिमिटेड जैसे बड़े 12 मामलों में से कुछ रिज़ॉल्यूशन के उन्नत चरणों में हैं और इस वित्तीय वर्ष में हल होने की संभावना है, जिसमें लगभग 70,000 करोड़ रुपए प्राप्त होने की उम्मीद है।

मार्च 2019 तक, कई रेजॉल्युशन प्रस्ताव सॉल्व होने के करीब हैं। अंतिम चरणों में 1.80 लाख करोड़ रुपए रिकवरी की उम्मीद है। 52,000 करोड़ रुपए एस्सार स्टील लिमिटेड से और भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड से 18,000 करोड़ रुपए रिकवरी की उम्मीद है। अन्य तनावग्रस्त कंपनियों में मोनेट इस्पात, एमटेक ऑटो और रूचि सोया शामिल हैं।

एनपीए के मानक खातों में रूपांतरण में वृद्धि और एनपीए श्रेणी में आने वाले नए खातों में गिरावट, ऋण और उधार व्यवहार में एक निश्चित सुधार दिखाती है।

Insolvency and Bankruptcy code: आगे क्या

यह स्पष्ट है कि भारत सरकार भारत में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने के अपने उद्देश्य में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। विधायिका, RBI, SEBI और न्यायपालिका ने एक एकीकृत मोर्चा प्रस्तुत किया है, जो भारत में अब तक अभूतपूर्व है। किसी भी तरह की स्पष्ट खामियों को जल्द से जल्द सुलझाया जा रहा है और कानून तेजी से विकसित हो रहा है।

इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 के कार्यान्वयन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इन चुनौतियों का प्रभावी संशोधनों के साथ सामना किया गया है। IBC एक सराहनीय कार्य कर रहा है, और उन सभी अधिकारियों को उचित श्रेय दिए जाने की आवश्यकता है जिन्होंने इस कानून को लागू करने के लिए लगन से काम किया है।

यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है, कि, 2019 में, भारत ने पहले ही दुनिया भर में खुदरा निवेश के लिए शीर्ष 30 विकासशील देशों में अपना स्थान सुरक्षित कर लिया है और भारत में इन्सॉल्वेंसी रेजॉल्युशन एक अधिक सुव्यवस्थित, समेकित और शीघ्रतापूर्ण समाधान के रूप में उभरा है। यह देखने की जरूरत है कि क्या इन उपायों का इस्तेमाल बैंकिंग प्रणाली पर तनावग्रस्त परिसंपत्तियों (stressed assets) के बोझ को कम करने के लिए किया जा सकता है और क्या भारत इन्सॉल्वेंसी रेजॉल्युशन के मामले में अन्य विकसित राष्ट्रों के समकक्ष आ सकता है।

धैर्य रॉय के मूल अंग्रेजी लेख का अनुवाद रवि अग्रहरि ने किया है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Dhairya Roy
Head - Project Management Office (Projects, Corporate Relations and Media), for Minister of Finance & Planning, Forests - Government of Maharashtra.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

कैसा दिखता है वैज्ञानिक कृषि वाला खेत: अजीत भारती का वीडियो | Raj Narayan’s farm and training centre, Keshabe

इस दौरान हमने जानने की कोशिश की कि ये किस तरह से कृषि, गौपालन आदि करते हैं और इसे समाज में भी ले जाने की कोशिश करते हैं।

चिंतित मत होइए, यहाँ से कुछ ले नहीं जा रहे, नया फिल्म सिटी बना रहे हैं: CM योगी का संजय राउत को करारा जवाब

सीएम योगी ने कहा कि मुंबई फिल्म उद्योग वहीं बना रहेगा और एक नई फिल्म सिटी को उत्तर प्रदेश में नए परिवेश में नई आवश्यकताओं के अनुसार विकसित किया जाएगा।

‘अब्बा कहीं जाते थे तो मैं बीमार हो जाती थी’ से ‘अब्बा घरेलू हिंसा करते हैं’: शेहला रशीद की आपबीती

शेहला का एक पुराने ट्वीट का स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है। इसमें शेहला ने लिखा है कि बचपन में जब कभी उनके अब्बा कहीं बाहर जाते थे तो वह बीमार हो जाती थी।

‘अवार्ड वापसी’ की घरवापसी: किसानों के प्रदर्शन के बीच पंजाब के पूर्व खिलाड़ियों ने पुरस्कार लौटने की दी धमकी

पद्म श्री और अर्जुन अवार्डी पहलवान करतार सिंह, अर्जुन अवार्डी बास्केटबॉल खिलाड़ी सज्जन सिंह चीमा और अर्जुन अवार्डी हॉकी खिलाड़ी राजबीर कौर उन लोगों में से हैं जो अपने पुरस्कार वापस करना चाहते हैं।

‘किसी भी केंद्रीय मंत्री को महाराष्ट्र में घुसने नहीं देंगे’: उद्धव के पार्टनर ने दी धमकी, ‘किसान आंदोलन’ का किया समर्थन

उन्होंने आरोप लगाया कि सुधार के नाम पर केंद्र कॉर्पोरेट और बड़े औद्योगिक संस्थानों को शक्तियाँ देना चाहती है।

‘बॉलीवुड को कहीं और ले जाना आसान नहीं’: मुंबई पहुँचे CM योगी अक्षय से मिले, महाराष्ट्र की तीनों सत्ताधारी पार्टियों ने किया विरोध

योगी आदित्यनाथ इसी सिलसिले में मुंबई भी पहुँचे हुए हैं, इसीलिए शिवसेना और ज्यादा चिढ़ी हुई है। वहाँ अभिनेता अक्षय कुमार ने उनसे मुलाकात की।

प्रचलित ख़बरें

‘गुजराती कसम खा कर पलट जाते हैं, औरंगजेब की तरह BJP नेताओं की कब्रों पर थूकेंगे लोग’: क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता की धमकी

जब उनसे पूछा गया कि इस 'किसान आंदोलन' में इंदिरा गाँधी की हत्या को याद कराते हुए पीएम मोदी को भी धमकी दी गई है, तो उन्होंने कहा कि जिसने जो बोया है, वो वही काटेगा।

‘दिल्ली और जालंधर किसके साथ गई थी?’ – सवाल सुनते ही लाइव शो से भागी शेहला रशीद, कहा – ‘मेरा अब्बा लालची है’

'ABP न्यूज़' पर शेहला रशीद अपने पिता अब्दुल शोरा के आरोपों पर सफाई देने आईं, लेकिन कठिन सवालों का जवाब देने के बजाए फोन रख कर भाग खड़ी हुईं।

‘हिंदू लड़की को गर्भवती करने से 10 बार मदीना जाने का सवाब मिलता है’: कुणाल बन ताहिर ने की शादी, फिर लात मार गर्भ...

“मुझे तुमसे शादी नहीं करनी थी। मेरा मजहब लव जिहाद में विश्वास रखता है, शादी में नहीं। एक हिंदू को गर्भवती करने से हमें दस बार मदीना शरीफ जाने का सवाब मिलता है।”

‘जो ट्विटर पर आलोचना करेंगे, उन सब पर कार्रवाई करोगे?’ बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र की उद्धव सरकार पर दागा सवाल

बॉम्बे हाई कोर्ट ने ट्विटर यूजर सुनैना होली की गिरफ़्तारी के मामले में सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार से कड़े सवाल पूछे हैं।

दुर्घटना में घायल पिता के लिए ‘नजदीकी’ अखिलेश यादव से मदद की गुहार… लेकिन आगे आई योगी सरकार

उत्तर प्रदेश में दुर्घटनाग्रस्त एक व्यक्ति की बेटी ने मदद के लिए गुहार तो लगाई अखिलेश यादव से, लेकिन मदद के लिए योगी सरकार आगे आई।

‘शिहाब ने मेरे शौहर को मुझसे दूर किया, अश्लील संदेश भेजे, जान से मारने की धमकी दी’: कर्नाटक में असिया बनी शांति की पीड़ा

आसिया का कहना है कि उसके पति को कहीं छुपा दिया गया है और उसका मोबाइल बंद कर दिया गया है। जब वह अपने पति के परिवार के घर गई, तो उसे शिहाब ने हत्या की धमकी दी थी।

गौभक्त और आर्य समाजी धर्मपाल गुलाटी का निधन: विभाजन के बाद तांगा चलाने को मजबूर, मेहनत से खड़ा किया MDH

मसालों की कंपनी महाशय दी हट्टी (MDH) के मालिक धर्मपाल गुलाटी का निधन हो गया है। धर्मपाल गुलाटी 98 वर्ष के थे। पद्म भूषण से सम्मानित...
00:30:45

कैसा दिखता है वैज्ञानिक कृषि वाला खेत: अजीत भारती का वीडियो | Raj Narayan’s farm and training centre, Keshabe

इस दौरान हमने जानने की कोशिश की कि ये किस तरह से कृषि, गौपालन आदि करते हैं और इसे समाज में भी ले जाने की कोशिश करते हैं।

चिंतित मत होइए, यहाँ से कुछ ले नहीं जा रहे, नया फिल्म सिटी बना रहे हैं: CM योगी का संजय राउत को करारा जवाब

सीएम योगी ने कहा कि मुंबई फिल्म उद्योग वहीं बना रहेगा और एक नई फिल्म सिटी को उत्तर प्रदेश में नए परिवेश में नई आवश्यकताओं के अनुसार विकसित किया जाएगा।

NGT ने क्रिसमस और न्यू ईयर पर दी पटाखे चलाने की छूट, दिवाली में लागू था पूर्ण प्रतिबंध

एनजीटी ने कहा है कि क्रिसमस और न्यू ईयर के मद्देनजर देश के उन इलाकों में जहाँ एयर क्वालिटी मॉडरेट स्तर पर है, वहाँ पटाखे रात को 11:55 बजे से 12.30 तक यानी 35 मिनट के लिए चलाने की अनुमित होगी।

बब्बू और छब्बू मियाँ: दर्जी और पेंटर भाई कैसे बन गए भूमाफिया?

खजराना थाना क्षेत्र में बब्बू और छब्बू ने अवैध रूप से तीन आलीशान मकान बना लिया था। जिसको नगर निगम और पुलिस ने पहले नोटिस जारी करके खाली करवाया। फिर जेसीबी और पोकलेन की मदद से जमीदोंज कर दिया।

‘अब्बा कहीं जाते थे तो मैं बीमार हो जाती थी’ से ‘अब्बा घरेलू हिंसा करते हैं’: शेहला रशीद की आपबीती

शेहला का एक पुराने ट्वीट का स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है। इसमें शेहला ने लिखा है कि बचपन में जब कभी उनके अब्बा कहीं बाहर जाते थे तो वह बीमार हो जाती थी।

‘अवार्ड वापसी’ की घरवापसी: किसानों के प्रदर्शन के बीच पंजाब के पूर्व खिलाड़ियों ने पुरस्कार लौटने की दी धमकी

पद्म श्री और अर्जुन अवार्डी पहलवान करतार सिंह, अर्जुन अवार्डी बास्केटबॉल खिलाड़ी सज्जन सिंह चीमा और अर्जुन अवार्डी हॉकी खिलाड़ी राजबीर कौर उन लोगों में से हैं जो अपने पुरस्कार वापस करना चाहते हैं।

‘जो इस्लाम में प्रतिबंधित, जिन्ना ने वह सब कुछ किया’: उनके नाम पर बनी शराब की बोतल गिन्ना वायरल, लोगों ने जमकर लिए मजे

लेबल पर लिखा गया है कि एमए जिन्ना को कभी भी यह मंजूर नहीं होगा जबकि उन्होंने पूल बिलियर्ड्स, सिगार, पोर्क सॉसेज के साथ-साथ बढ़िया स्कॉच व्हिस्की और शराब का आनंद लिया।

‘शिहाब ने मेरे शौहर को मुझसे दूर किया, अश्लील संदेश भेजे, जान से मारने की धमकी दी’: कर्नाटक में असिया बनी शांति की पीड़ा

आसिया का कहना है कि उसके पति को कहीं छुपा दिया गया है और उसका मोबाइल बंद कर दिया गया है। जब वह अपने पति के परिवार के घर गई, तो उसे शिहाब ने हत्या की धमकी दी थी।

सड़क से अतिक्रमण हटाने को कहा तो कॉन्ग्रेस नेता के भाई अब्बास सिद्दीकी ने पुलिसकर्मी से की मारपीट, गिरफ्तार

स्थानीय लोगों का कहना है कि अब्बास और उसके साथी सड़क पर कुर्सी लगाकर बैठे हुए थे, जिसे हटाने की बात को लेकर व्यापारियों ने पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता और मारपीट की।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,510FollowersFollow
359,000SubscribersSubscribe