Thursday, September 24, 2020
Home देश-समाज कॉन्ग्रेस ने 60 साल तक लुटेरों को शरण दी, BJP ने सिर्फ 66 मामलों...

कॉन्ग्रेस ने 60 साल तक लुटेरों को शरण दी, BJP ने सिर्फ 66 मामलों से ही वसूले ₹80,000 करोड़

मार्च 2019 तक, कई रेजॉल्युशन प्रस्ताव सॉल्व होने के करीब हैं। अंतिम चरणों में 1.80 लाख करोड़ रुपए रिकवरी की उम्मीद है। 52,000 करोड़ रुपए एस्सार स्टील लिमिटेड से और भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड से 18,000 करोड़ रुपए रिकवरी की उम्मीद है।

इस लेख का उद्देश्य एनडीए सरकार द्वारा न्याय देने और लेनदारों (creditors) को बकाया राशि वसूलने के लिए शुरू की गई, नई दिवाला और दिवालियापन कानून, 2016 (new Insolvency and Bankruptcy Code, 2016) की दक्षता का मूल्यांकन है। अब तक ऐसी कई दिवालिया कंपनियों ने कॉन्ग्रेस शासन के दौरान बने उलझाऊ कानून की शरण लेकर खुद को बचाते आ रहे थे।

इनसॉल्वेंसी रेजोल्युशन प्रक्रिया में कॉन्ग्रेस के समय के शामिल कानून

  • बीमार औद्योगिक कंपनी अधिनियम, 1985 (The Sick Industrial Companies Act, 1985)
  • वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण और सुरक्षा हित अधिनियम, 2002 का प्रवर्तन (The Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002)
  • बैंक और वित्तीय संस्थान अधिनियम, 1993 के कारण ऋण की वसूली (The Recovery of Debt Due to Banks and Financial Institutions Act, 1993)
  • कंपनी अधिनियम, 2013 (The Companies Act, 2013

कई कानूनी रास्ते और एक थकाऊ लम्बी कोर्ट प्रणाली के कारण भारत गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों का एक बड़ा ढेर बन चुका है। बैंकरप्सी कोड भारत में क्रेडिट को अधिक आसानी से प्रवाहित करने और अपने दावों के त्वरित निपटान के लिए निवेशकों में विश्वास पैदा करने का प्रयास है। कोड कॉरपोरेट संस्थाओं और व्यक्तियों के दिवालिया होने से संबंधित मौजूदा कानूनों को एकल कानून में समेकित करता है।

इस कानून ने लेनदारों (creditors) के वैधानिक अधिकारों के प्रवर्तन से संबंधित कानून को एकीकृत किया है और लेनदारों के अधिकारों को समाप्त किए बिना एक देनदार (debtor) कंपनी को अपने ऋण को बनाए रखने के लिए पुनर्जीवित किया जा सकता है।

इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड: – NDA Vs UPA

कॉन्ग्रेस ने कमर्शियल इन्सॉल्वेंसी को सुलझाने की जो पुरातन व्यवस्था की विरासत छोड़ी थी, उसके तहत कंपनी अधिनियम में कंपनी को बंद करने का प्रावधान था यदि वह अपने ऋण का भुगतान करने में असमर्थ थी। इसके अतिरिक्त, कॉन्ग्रेस सरकार ने बीमार कंपनियों के पुनर्वास के लिए 1980 के दशक में SICA लागू किया था। यह उन कंपनियों पर लागू होता है जिनकी निवल संपत्ति (Net Worth) नकारात्मक हो गई है।

- विज्ञापन -

यह कानून पूरी तरह से विफल साबित हुआ। यद्यपि यह कानून पुनर्वास के लिए बनाया गया था, लेकिन कई बीमार कंपनियों को लेनदारों के खिलाफ एक सुरक्षात्मक लोहे ढाल की तरह उपयोग किया गया। ऋण वसूली न्यायाधिकरण बैंकों को सभी बकाया राशि की वसूली के लिए सक्षम बनाने के लिए बनाया गया था। लेकिन ये भी कर्ज वसूलने के लिए अत्यधिक कुशल तंत्र साबित नहीं हुए हैं। गैर-कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी के लिए प्रांतीय इन्सॉल्वेंसी एक्ट लागू था। यह सभी कानून अप्रभावी था और उपयोग न होने के कारण भी अपनी उपयोगिता खो चुके थे।

अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने SARFAESI कानून बनाया था जो पहले के कानून से काफी बेहतर साबित हुआ था। वर्ष 2000 में, एनपीए ने दोहरे अंको के साथ  उछाल भरी थी। SARFESI कानून और RBI द्वारा विवेकपूर्ण ब्याज दर प्रबंधन दोनों की वजह से NPA को नीचे लाने में मदद मिली।

इसके बाद, 2008 और 2014 के बीच, बैंकों ने अंधाधुंध उधार दिए। इससे एनपीए का प्रतिशत बहुत ज़्यादा बढ़ गया, जो आरबीआई के एसेट क्वालिटी रिव्यू द्वारा उजागर किया गया था। इस पर एनडीए सरकार द्वारा शीघ्र कार्रवाई की गई। एक विशेषज्ञ समिति नियुक्त की गई, जिसने 2015 में आईबीसी की सिफारिश करते हुए अपनी रिपोर्ट सबमिट की।

इसके बाद, एक विधेयक लोकसभा में पेश किया गया और संसद की संयुक्त समिति को रेफर किया गया। संसदीय समिति ने इस विधेयक पर अपने सुझाव दिए और विधेयक में कुछ बदलावों की सिफारिश करते हुए एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। IBC को मई 2016 में संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित किया गया था। यह आर्थिक विधायी परिवर्तन संसद द्वारा किया गया था।

तुरंत, एनसीएलटी का गठन किया गया, इनसॉल्वेंसी बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया की स्थापना की गई और नियमों को तैयार किया गया। 2016 के अंत तक कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी के मामले एनसीएलटी द्वारा देखे जा रहे थे।

IBC प्रक्रिया के माध्यम से शुरुआत बेहद संतोषजनक रही है। इसने ऋणी-लेनदार संबंध को बदल दिया है। लेनदार अब देनदार का पीछा नहीं करता है। एनसीएलटी के गठन और आईबीसी के कार्यान्वयन पर इसकी कार्यक्षमता ने कानून में सुधार की आवश्यकता की तरफ ध्यान आकर्षित किया था। तब से दो विधायी हस्तक्षेप हुए हैं।

अब एनसीएलटी उच्च विश्वसनीयता का एक विश्वसनीय मंच बन गया है। जो कंपनियों को इंसॉल्वेंसी की तरफ ले जाते हैं, उन्हें ही प्रबंधन से बाहर निकाल दिया जाता है। नए प्रबंधन का चयन एक ईमानदार और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत होती है। जिसमें कोई राजनीतिक या सरकारी हस्तक्षेप नहीं हुआ हो।

दिवालिया कंपनियों में डूबे धन की वसूली तीन तरीकों से हुई

सबसे पहले, धारा 29 (ए) की शुरुआत के बाद कंपनियां रेड लाइन को पार नहीं करने के लिए भुगतान कर रही हैं. साथ  ही इसे एनसीएलटी को रेफर कर दिया जाता है। नतीजतन, बैंकों को संभावित देनदारों से धन प्राप्त होना शुरू हो जाता है जो डिफ़ॉल्टर घोषित होने से बचने के लिए भुगतान करते हैं। बकाएदारों को भी पता है कि एक बार जब वे IBC में आ गए तो वे निश्चित रूप से धारा 29 (A) के कारण प्रबंधन से बाहर हो जाएँगे।

दूसरे, एक बार लेनदार की एक याचिका एनसीएलटी के समक्ष दायर कर दी जाती है, तो देनदार पहले स्तर पर ही भुगतान करना शुरू कर देते हैं ताकि दिवालिया होने की घोषणा न हो।

तीसरा, कई बड़े दिवालिया मामलों को पहले ही हल कर लिया गया है और कई हल होने के करीब हैं। जिनका निराकरण नहीं किया जा सकता है वे परिसमापन (liquidation) की ओर अग्रसर हैं और बैंकों को परिसमापन मूल्य प्राप्त हो रहा है।

अब तक

  • 1322 मामले एनसीएलटी द्वारा लिए गए हैं
  • प्रवेश से पहले (pre-admission stage) के चरण में 4452 मामलों का निस्तारण किया गया है
  • 66 को स्थगन (adjudication) के बाद सुलझा लिया गया है
  • परिसमापन (liquidation) के लिए 260 मामलों को आदेश दिया गया है
  • अभी तक 66 रिज़ॉल्यूशन के मामलों में, लेनदारों द्वारा लगभग 80,000 करोड़ रुपए की वसूली हो चुकी है

एनसीएलटी डेटाबेस के अनुसार, पूर्व प्रवेश स्तर पर निपटाए गए 4452 मामलों में, जाहिर तौर पर तय की गई राशि लगभग 2.02 लाख करोड़ रुपए थी। भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड और एस्सार स्टील इंडिया लिमिटेड जैसे बड़े 12 मामलों में से कुछ रिज़ॉल्यूशन के उन्नत चरणों में हैं और इस वित्तीय वर्ष में हल होने की संभावना है, जिसमें लगभग 70,000 करोड़ रुपए प्राप्त होने की उम्मीद है।

मार्च 2019 तक, कई रेजॉल्युशन प्रस्ताव सॉल्व होने के करीब हैं। अंतिम चरणों में 1.80 लाख करोड़ रुपए रिकवरी की उम्मीद है। 52,000 करोड़ रुपए एस्सार स्टील लिमिटेड से और भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड से 18,000 करोड़ रुपए रिकवरी की उम्मीद है। अन्य तनावग्रस्त कंपनियों में मोनेट इस्पात, एमटेक ऑटो और रूचि सोया शामिल हैं।

एनपीए के मानक खातों में रूपांतरण में वृद्धि और एनपीए श्रेणी में आने वाले नए खातों में गिरावट, ऋण और उधार व्यवहार में एक निश्चित सुधार दिखाती है।

Insolvency and Bankruptcy code: आगे क्या

यह स्पष्ट है कि भारत सरकार भारत में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने के अपने उद्देश्य में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। विधायिका, RBI, SEBI और न्यायपालिका ने एक एकीकृत मोर्चा प्रस्तुत किया है, जो भारत में अब तक अभूतपूर्व है। किसी भी तरह की स्पष्ट खामियों को जल्द से जल्द सुलझाया जा रहा है और कानून तेजी से विकसित हो रहा है।

इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 के कार्यान्वयन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इन चुनौतियों का प्रभावी संशोधनों के साथ सामना किया गया है। IBC एक सराहनीय कार्य कर रहा है, और उन सभी अधिकारियों को उचित श्रेय दिए जाने की आवश्यकता है जिन्होंने इस कानून को लागू करने के लिए लगन से काम किया है।

यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है, कि, 2019 में, भारत ने पहले ही दुनिया भर में खुदरा निवेश के लिए शीर्ष 30 विकासशील देशों में अपना स्थान सुरक्षित कर लिया है और भारत में इन्सॉल्वेंसी रेजॉल्युशन एक अधिक सुव्यवस्थित, समेकित और शीघ्रतापूर्ण समाधान के रूप में उभरा है। यह देखने की जरूरत है कि क्या इन उपायों का इस्तेमाल बैंकिंग प्रणाली पर तनावग्रस्त परिसंपत्तियों (stressed assets) के बोझ को कम करने के लिए किया जा सकता है और क्या भारत इन्सॉल्वेंसी रेजॉल्युशन के मामले में अन्य विकसित राष्ट्रों के समकक्ष आ सकता है।

धैर्य रॉय के मूल अंग्रेजी लेख का अनुवाद रवि अग्रहरि ने किया है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Dhairya Roy
Head - Project Management Office (Projects, Corporate Relations and Media), for Minister of Finance & Planning, Forests - Government of Maharashtra.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

महिलाओं को समानता, फिक्स्ड टर्म रोजगार, रिस्किलिंग फंड सहित मोदी सरकार द्वारा श्रम कानून में सुधार के बाद उठ रहे 5 सवालों के जवाब

मोदी सरकार द्वारा किए गए श्रम कानून में सुधार के बाद तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। इसीलिए आज हम आपको इनसे जुड़े पाँच महत्वपूर्ण सवालों का जवाब देने जा रहे हैं।

दिल्ली दंगों की प्लानिंग का वॉट्सऐप चैट, OpIndia के हाथ आए एक्सक्लुसिव सबूत से समझिए क्या हुआ 24 फरवरी को

अथर नाम का आदमी डरा हुआ है और सलाह दे रहा है कि CAA-समर्थक ग्रुप और पुलिस काफी सख्ती दिखा रही है, इसलिए नुकसान हो सकता है और...

‘ऑपरेशन दुराचारी’ के तहत यौन अपराधियों के सरेआम चौराहों पर लगेंगे पोस्टर: महिला सुरक्षा पर सख्त हुई योगी सरकार

बलात्कारियों में उन्हीं के नाम का पोस्टर छपेगा जिन्हें अदालत द्वारा दोषी करार दिया जाएगा। मिशन दुराचारी के तहत महिला पुलिसकर्मियों को जिम्मा दिया जाएगा।

‘काफिरों का खून बहाना होगा, 2-4 पुलिस वालों को भी मारना होगा’ – दिल्ली दंगों के लिए होती थी मीटिंग, वहीं से खुलासा

"हम दिल्ली के मुख्यमंत्री पर दबाव डालें कि वह पूरी हिंसा का आरोप दिल्ली पुलिस पर लगा दें। हमें अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना होगा।”

पूना पैक्ट: समझौते के बावजूद अंबेडकर ने गाँधी जी के लिए कहा था- मैं उन्हें महात्मा कहने से इंकार करता हूँ

अंबेडकर ने गाँधी जी से कहा, “मैं अपने समुदाय के लिए राजनीतिक शक्ति चाहता हूँ। हमारे जीवित रहने के लिए यह बेहद आवश्यक है।"

…भारत के ताबूत में आखिरी कील, कश्मीरी नहीं बने रहना चाहते भारतीय: फारूक अब्दुल्ला ने कहा, जो सांसद है

"इस समय कश्मीरी लोग अपने आप को न तो भारतीय समझते हैं, ना ही वे भारतीय बने रहना चाहते हैं।" - भारत के सांसद फारूक अब्दुल्ला ने...

प्रचलित ख़बरें

नेपाल में 2 km भीतर तक घुसा चीन, उखाड़ फेंके पिलर: स्थानीय लोग और जाँच करने गई टीम को भगाया

चीन द्वारा नेपाल की जमीन पर कब्जा करने का ताजा मामला हुमला जिले में स्थित नामखा-6 के लाप्चा गाँव का है। ये कर्णाली प्रान्त का हिस्सा है।

शो नहीं देखना चाहते तो उपन्यास पढ़ें या फिर टीवी कर लें बंद: ‘UPSC जिहाद’ पर सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़

'UPSC जिहाद' पर रोक को लेकर हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जिनलोगों को परेशानी है, वे टीवी को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं।

‘ये लोग मुझे फँसा सकते हैं, मुझे डर लग रहा है, मुझे मार देंगे’: मौत से 5 दिन पहले सुशांत का परिवार को SOS

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मौत से 5 दिन पहले सुशांत ने अपनी बहन को एसओएस भेजकर जान का खतरा बताया था।

‘क्या आपके स्तन असली हैं? क्या मैं छू सकता हूँ?’: शर्लिन चोपड़ा ने KWAN टैलेंट एजेंसी के सह-संस्थापक पर लगाया यौन दुर्व्यवहार का आरोप

"मैं चौंक गई। कोई इतना घिनौना सवाल कैसे पूछ सकता है। चाहे असली हो या नकली, आपकी समस्या क्या है? क्या आप एक दर्जी हैं? जो आप स्पर्श करके महसूस करना चाहते हैं। नॉनसेंस।"

‘शिव भी तो लेते हैं ड्रग्स, फिल्मी सितारों ने लिया तो कौन सी बड़ी बात?’ – लेखिका का तंज, संबित पात्रा ने लताड़ा

मेघना का कहना था कि जब हिन्दुओं के भगवान ड्रग्स लेते हैं तो फिर बॉलीवुड सेलेब्स के लेने में कौन सी बड़ी बात हो गई? संबित पात्रा ने इसे घृणित करार दिया।

आफ़ताब दोस्तों के साथ सोने के लिए बनाता था दबाव, भगवान भी आलमारी में रखने पड़ते थे: प्रताड़ना से तंग आकर हिंदू महिला ने...

“कई बार मेरे पति आफ़ताब के द्वारा मुझपर अपने दोस्तों के साथ हमबिस्तर होने का दबाव बनाया गया लेकिन मैं अडिग रहीं। हर रोज मेरे साथ मारपीट हुई। मैं अपना नाम तक भूल गई थी। मेरा नाम तो हरामी और कुतिया पड़ गया था।"

महिलाओं को समानता, फिक्स्ड टर्म रोजगार, रिस्किलिंग फंड सहित मोदी सरकार द्वारा श्रम कानून में सुधार के बाद उठ रहे 5 सवालों के जवाब

मोदी सरकार द्वारा किए गए श्रम कानून में सुधार के बाद तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। इसीलिए आज हम आपको इनसे जुड़े पाँच महत्वपूर्ण सवालों का जवाब देने जा रहे हैं।

आंध्र प्रदेश में 6 हिंदू मंदिरों पर हुए हमले, क्या यह सब जगन रेड्डी सरकार की मर्जी से हो रहा: TDP नेता ने लगाए...

राज्य में हाल ही में हिंदू मंदिरों पर हमले की घटनाएँ बढ़ रही हैं। अभी कुछ दिन पहले कृष्णा जिले के वत्सवई मंडल में मककपेटा गाँव में ऐतिहासिक काशी विश्वेश्वर स्वामी मंदिर के अंदर नंदी की मूर्ति को कुछ बदमाशों ने खंडित कर दिया था।

अक्षरधाम मन्दिर हमला: 18 साल पहले जब 2 आतंकवादियों ने हमारी आस्था पर किया था प्रहार

इस हमले में 30 श्रद्धालुओं, एक राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी व एक कमांडो ने अपनी जान की आहुति दी थी। गंभीर रूप से घायल एक और कमांडो ने...

दिल्ली दंगों की प्लानिंग का वॉट्सऐप चैट, OpIndia के हाथ आए एक्सक्लुसिव सबूत से समझिए क्या हुआ 24 फरवरी को

अथर नाम का आदमी डरा हुआ है और सलाह दे रहा है कि CAA-समर्थक ग्रुप और पुलिस काफी सख्ती दिखा रही है, इसलिए नुकसान हो सकता है और...

टैलेंट मैनेजमेंट कंपनियाँ देती हैं ऑफर, पार्टियों में ट्रे में लेकर घूमते हैं ड्रग्स: मुकेश खन्ना और शिल्पा शिंदे ने किए कई चौकाने वाले...

टैलंट मैनेजमेंट कम्पनियाँ जब किसी आर्टिस्ट को देश के बाहर ले जाती हैं तो उसकी हर जरूरत का ख्याल रखती हैं और क्लाइंट भी उन्हें जॉइन करने से पहले मिलने वाली 'सुविधाओं' के बारे में पूछते हैं।

‘ऑपरेशन दुराचारी’ के तहत यौन अपराधियों के सरेआम चौराहों पर लगेंगे पोस्टर: महिला सुरक्षा पर सख्त हुई योगी सरकार

बलात्कारियों में उन्हीं के नाम का पोस्टर छपेगा जिन्हें अदालत द्वारा दोषी करार दिया जाएगा। मिशन दुराचारी के तहत महिला पुलिसकर्मियों को जिम्मा दिया जाएगा।

भड़काऊ भाषण के लिए गए थे कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद, कविता कृष्णन: दिल्ली दंगो पर चार्जशीट में आरोपित ने किया बड़ा खुलासा

“एक व्यक्ति को सिर्फ गवाही के आधार पर आरोपित नहीं बना दिया जाता है। हमारे पास लगाए गए आरोपों के अतिरिक्त तमाम ऐसे सबूत हैं जिनके आधार पर हम अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा रहे हैं।”

‘क्रिकेटरों की बीवियों को लेते देखा है ड्रग्स’- शर्लिन चोपड़ा का दावा, बॉलीवुड के बाद अब IPL पार्टी में ड्रग्स का खुलासा

मॉडल और अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि ड्रग्स सिर्फ बॉलीवुड तक ही सीमित नहीं है। क्रिकेट की दुनिया में भी इसका बराबर चलन है, उन्होंने आईपीएल के दौरान........

दिल्ली दंगा: UAPA के तहत JNU के पूर्व छात्रनेता उमर खालिद को 22 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया

दिल्ली की एक अदालत ने जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को उत्तरी पूर्वी दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी हिंसा से संबंधित एक मामले में 22 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा है।

ड्रग्स और बॉलीवुड: बड़े सितारों की चुप्पी बहुत कुछ कहती है – अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti speaks on Silent Bollywood and...

बॉलीवुड के नशेड़ियों को सही साबित करने के लिए भगवान शिव पर एक टिप्पणी आई है और इसके जरिए ड्रग सेवन को सही साबित करने का प्रयास हुआ है।

हमसे जुड़ें

264,935FansLike
78,005FollowersFollow
323,000SubscribersSubscribe
Advertisements