राजनीतिक बहस बनी जानलेवा: सपा कार्यकर्ता आपस में भिड़े, 1 की मौत

कुर्सियों को एक-दूसरे पर फेंकने के दौरान वरिष्ठ ज़िला उपाध्यक्ष राजेश पांडेय भी घायल हो गए। कार्यक्रम स्थल से निकलकर राजेश पांडेय पार्टी के ज़िला कार्यालय पहुँचे, जहाँ कुछ देर बाद ही उनकी मृत्यु हो गई।

न्यूज़ चैनलों पर आम मुद्दों पर बहस होने के कार्यक्रम आम हैं। यह मुद्दे राजनीतिक भी हो सकते हैं और सामाजिक भी। टीवी पर बहस के कार्यक्रम में यदि किसी तरह का कोई विवाद उत्पन्न होता है तो उसे शांत करने का प्रयास किया जाता है, लेकिन कभी-कभी हालात इतने विपरीत हो जाते हैं कि बहस पर आधारित यह कार्यक्रम आपसी झगड़े का कारण बन जाते हैं।

ऐसा ही एक मामला यूपी के संत कबीर नगर का है, जहाँ शुक्रवार (22 फ़रवरी 2019) को एक न्यूज़ चैनल द्वारा आयोजित डिबेट के कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। इस दौरान माहौल इस क़दर बिगड़ा कि आपस में हाथापाई हुई और कुर्सियों को एक-दूसरे पर फेंका गया। इस अफ़रा-तफरी में भालचंद्र यादव समर्थकों के साथ मारपीट हुई और धनघटा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व अध्यक्ष लाल बहादुर यादव का पैर टूट गया।

ख़बरों के अनुसार, कुर्सियों को एक-दूसरे पर फेंकने के दौरान वरिष्ठ ज़िला उपाध्यक्ष राजेश पांडेय भी घायल हो गए। कार्यक्रम स्थल से निकलकर राजेश पांडेय पार्टी के ज़िला कार्यालय पहुँचे, जहाँ कुछ देर बाद ही उनकी मृत्यु हो गई।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

दरअसल, दोपहर क़रीब तीन बजे जूनियर हाईस्कूल परिसर में लोकसभा चुनाव में सीटों के बँटवारे पर एक बहस का आयोजन किया गया। इस बहस के कार्यक्रम में कई दलों के नेता मौजूद थे। चर्चा के दौरान सीटों के बँटवारे को लेकर सपा-बसपा के कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा आपत्ति की गई। इसके बाद सपा कार्यकर्ता आपस में मार-पीट करने लगे। जिलाध्यक्ष गौहर समेत बाक़ी के नेताओं ने मामले को किसी तरह शांत कराया।


शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

कॉन्ग्रेस

राहुल गाँधी की सुस्त रणनीति से चिंतित मीडिया, ‘इन्वेस्टमेंट’ खतरे में

मीडिया के एक धड़े में कॉन्ग्रेस की संभावित हार को लेकर अफरा-तफरी का माहौल है। शायद इतना ‘दाँव’ पर लगा है कि अब खुलकर भाजपा को हराने की हिमायत उनकी मजबूरी है।
आरफा खानम

शब्बीर बरखा को भेजता है अश्लील फोटो, आरफ़ा को ‘होली बिस्मिल्ला’ पर अशरफ़ी कहता है ‘डर्टी लेडी’

एक तरफ बरखा दत्त को अश्लील तस्वीर भेजने वाला शब्बीर है, वहीं दूसरी ओर 'द वायर' की पत्रकार आरफ़ा खानम हैं जिन्होंने होली मुबारक कहते हुए 'बिस्मिल्ला' शब्द लिखा तो 'सच्चे' मुसलमान भड़क उठे।
नीरव मोदी

नीरव मोदी की गिरफ़्तारी से दुःखी और अवसादग्रस्त कॉन्ग्रेस पेट पर मूसल न मार ले

कॉन्ग्रेस की यही समस्या है कि वो इतना नकारा तो चौवालीस सीट पाने के बाद भी नहीं महसूस कर पाया जितना विपक्ष में कि इतने नेताओं के महागठबंधन के बाद भी मोदी को घेरने के लिए उसके पास सिवाय अहंकार और अभिजात्य घमंड के और कुछ भी नहीं है।

स्वामी असीमानंद और कर्नल पुरोहित के बहाने: ‘सैफ्रन टेरर’ की याद में

कल दो घटनाएँ हुईं, और दोनों ही पर मीडिया का एक गिरोह चुप है। अगर यही बात उल्टी हो जाती तो अभी तक चुनावों के मौसम में होली की पूर्व संध्या पर देश को बताया जा रहा होता कि भगवा आतंकवाद कैसे काम करता है। चैनलों पर एनिमेशन और नाट्य रूपांतरण के ज़रिए बताया जाता कि कैसे एक हिन्दू ने ट्रेन में बम रखे और मुसलमानों को अपनी घृणा का शिकार बनाया।
रणजीत सिंह

कोहिनूर धारण करने वाला सिख सम्राट जिसकी होली से लाहौर में आते थे रंगीन तूफ़ान, अंग्रेज भी थे कायल

कहते हैं कि हवा में गुलाल और गुलाबजल का ऐसा सम्मिश्रण घुला होता था कि उस समय रंगीन तूफ़ान आया करते थे। ये सिख सम्राट का ही वैभव था कि उन्होंने सिर्फ़ अंग्रेज अधिकारियों को ही नहीं रंगा बल्कि प्रकृति के हर एक आयाम को भी रंगीन बना देते थे।

मोदी बनाम गडकरी, भाजपा का सीक्रेट ‘ग्रुप 220’, और पत्रकारिता का समुदाय विशेष

ये वही लम्पटों का समूह है जो मोदी को घेरने के लिए एक हाथ पर यह कहता है कि विकास नहीं हुआ है, रोजगार कहाँ हैं, और दूसरे हाथ पर, फिर से मोदी को ही घेरने के लिए ही, यह कहता है कि गडकरी ने सही काम किया है, उसका काम दिखता है।
मस्जिद

न्यूजीलैंड के बाद अब इंग्लैंड की 5 मस्जिदों पर हमला: आतंकवाद-रोधी पुलिस कर रही जाँच

हमलों के पीछे का मकसद अज्ञात है लेकिन वेस्ट मिडलैंड्स पुलिस ऐसा मान रही है कि सारे हमले एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि आतंकवाद-रोधी पुलिस मामले की जाँच कर रही है।
PM Modi मूवी ट्रेलर

PM NARENDRA MODI: जान डाल दिया है विवेक ओबेरॉय ने – दर्द, गुस्सा, प्रेम सब कुछ है ट्रेलर में

विवेक ओबेरॉय के अलावा बोमन इरानी, बरखा बिष्ट, मनोज जोशी, प्रशांत नारायण, राजेंद्र गुप्ता, जरीना वहाब और अंजन श्रीवास्तव मुख्य भूमिकाओं में होंगे। फिल्म का डायरेक्शन उमंग कुमार ने किया है।
ताशकंद फाइल्स

The Tashkent Files: मीडिया गिरोह वालों… यह प्रोपेगेंडा नहीं, अपने ‘लाल’ का सच जानने का हक है

यह फिल्म तो 'सच जानने का नागरिक अधिकार' है। यह उस महान नेता की बहुत बड़ी सेवा है, जिसकी रहस्यमय मौत की पिछले 53 वर्षों में कभी जाँच नहीं की गई।

‘अश्लील वीडियो बनाकर सेवादारों ने किया था ब्लैकमेल’, पुलिस ने पेश किया 366 पन्नों का चालान

ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर वह मानसिक रूप से बीमार हो गए थे। जाँच के आधार पर पुलिस का दावा है कि सुसाइड नोट को सेवादारों ने षड्यंत्र के तहत आत्महत्या करने से पहले लिखवाया था।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

24,263फैंसलाइक करें
6,161फॉलोवर्सफॉलो करें
30,697सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें


शेयर करें, मदद करें: