5% हिन्दुओं को पीट कर वोट नहीं देने दिया गया: ‘मुस्लिम भीड़’ द्वारा हत्या से बाल-बाल बचे सांसद का लेख

"अगर यहाँ पर 5% हिंदू हैं और उन्हें वोट नहीं देने दिया जाता है तो यह भयावह स्थिति है। सोचिए, अगर यही हालात सभी बूथों पर हो जाए तो भारत का लोकतंत्र कैसे चलेगा?"

ऑपइंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में बिहार स्थित पश्चिम चम्पारण के सांसद संजय जायसवाल के हवाले से बताया था कि कैसे एक बूथ पर एक भीड़ ने उन्हें घेर कर उनकी हत्या का प्रयास किया और सांसद की तरफ़ से बताया गया कि उस भीड़ में 90% मुस्लिम थे। उनके अनुसार मुस्लिम बहुल इलाक़े में हिन्दुओं को वोट नहीं देने दिया जा रहा था। सांसद पर हुए हमले, पत्थरबाज़ी पर ऑपइंडिया की रिपोर्ट यहाँ पढ़ें। इस संबंध में हिन्दुओं के मताधिकार पर हुए आक्रमण को लेकर पढ़िए पिछले 10 वर्षों से सांसद रहे संजय जायसवाल का लेख, ठीक हूबहू उन्हीं के शब्दों में:

मैं तन, मन और वचन से हिंदू हूँ। यही कारण है जिसके चलते 10 वर्ष के मेरे संसदीय जीवन में एक भी मुसलमान या ईसाई यह नहीं कह सकता कि वह मेरे घर किसी प्रकार की मदद के लिए आया हो और मैंने उसकी मदद नहीं की। चाहे पारसी हो या यहूदी, वह अपने घर से उजड़ने के बावजूद हज़ारों वर्ष तक अपने धर्म और परंपरा का निर्वहन भारत में कर सके क्योंकि यहाँ के सारे राजा तब हिंदू थे। मैंने अपने जीवन में कभी इफ़्तार पार्टी का आयोजन नहीं किया क्योंकि वह मेरा धर्म नहीं है। लेकिन, मैं अपने मुस्लिम मित्रों की खुशी में शरीक होने हर साल इमामबाड़ा या कहीं भी इफ़्तार के आयोजन मे ज़रूर जाता हूँ, चाहे उसके लिए मेरा कितना भी मज़ाक क्यों नहीं उड़ाया जाए।

मैं सभी हिंदू बहुल गाँव सहित अन्य गाँवों के अपने सभी नागरिकों का भी आभारी हूँ क्योंकि जिन्हें जहाँ इच्छा थी, उन्होंने वहाँ वोट डाला। लेकिन, नरकटिया से खौना के बूथ संख्या 162 की बात ही कुछ और है। साल 2000 में तत्कालीन विधायक एवं मंत्री के सामने उस बूथ को लूटा गया था और उनकी काफी बेइज्जती की गई थी। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि फिर वहाँ पर हिंदू वोटर कभी वोट डालने नहीं गए। इस बार जबलपुर से एक बायोमेडिकल इंजीनियर ब्राह्मण बच्चा सिर्फ इसलिए गाँव आया क्योंकि उसे नरेंद्र मोदी को वोट देना था। कुशवाहा और बीन लोग भी यहाँ बहुत हैं, लेकिन इस टोले के लोग संत सिंह कुशवाहा के लिए भी वोट डालने 2015 में नहीं गए थेलेकिन, इस बार उस बच्चे के साथ नरेंद्र मोदी जी को वोट डालने सभी लोग बाहर निकले।

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घटना के दिन 12:15 बजे उन सबों की पिटाई बूथ पर ही कर गई। इस पिटाई के पीछे आरोपितों की यह सोच थी कि आख़िर इन ग्रामीणों की वोट डालने की हिम्मत कैसे हुई? पीठासीन पदाधिकारी और होमगार्ड के जवान केवल मुँह देखते रह गए। दोपहर 3:30 बजे तक ये पीड़ित लोग प्रशासन से गुहार लगाते रहे कि उनकी मदद की जाए। लेकिन, कोई प्रशासन या अधिकारी इनके मताधिकार में मदद के लिए आगे नहीं आया। उलटा जिला प्रशासन को फोटो भेज दिया गया कि बूथ पर सब कुछ शांतिपूर्ण है। ज़ाहिर सी बात है, जब सारे हिंदू पिट कर भगा दिए गए थे तो माहौल तो शांतिपूर्ण हो ही जाना था।

3.30 बजे मैं बीन टोला गाँव में पहुँचा और मैंने सभी घायलों को देखा। मुझे इस बात पर बहुत आक्रोश है कि पीठासीन पदाधिकारी अथवा जिला के उच्च अधिकारियों ने इन सबो की मदद क्यों नहीं की? मैं 2 बार इस क्षेत्र का सांसद रहा हूँ। 40-50 मतों से मुझे कोई अंतर नहीं पड़ने वाला है लेकिन मैं वहाँ सभी हिंदुओं के साथ बूथ पर आया क्योंकि ये उनके मताधिकारों की बात थी। मैंने रास्ते में भी कहा कि अगर यहाँ पर 5% हिंदू हैं और उन्हें वोट नहीं देने दिया जाता है तो यह भयावह स्थिति है। सोचिए, अगर यही हालात सभी बूथों पर हो जाए तो भारत का लोकतंत्र कैसे चलेगा?

जब तक मैं सरकारी अफसरों से बहस कर रहा था, तब तक स्थिति बिल्कुल दूसरी हो गई। मुझे इस बात का भी अफसोस नहीं है कि मैं वहाँ 3:30 घंटे फँसा रहा और प्रशासन मेरी मदद के लिए नहीं पहुँचा। एक तरह से मुझे बंधक बना कर रखा गया था। अफसोस तो मुझे इस बात का है कि भारत के हर नागरिक को वोट देने का अधिकार है और उक्त घटना के दौरान पीड़ित लोग वोट देने के लिए गुहार लगाते रहे लेकिन डीएम तथा एसपी ने उनकी कोई मदद नहीं की। इस बात की लड़ाई मुझे 20 वर्षों तक लड़नी पड़े तो भी मैं लड़ूँगा और इन सबों को इंसाफ दिला कर ही रहूँगा। मैं जल्दी नाराज़ नहीं होता हूँ पर चाहे वह बैरिया में छठ घाट उजाड़ने की घटना हो या फिर किसी स्थान पर किसी वोटर को वोट नहीं देने की घटना, मेरा ख़ून अपने आप उबल ही जाता है।

क्या थी घटना?

रविवार (मई 12, 2019) को बिहार के चम्पारण में लोकसभा चुनाव के छठे चरण के तहत मतदान चल रहा था। इस दौरान सांसद भी सभी बूथ पर घूम-घूम कर (प्रत्याशी को मिलने वाले अनुमति के तहत) चुनाव प्रक्रिया को देख रहे थे। तभी उन्हें सूचना मिली कि नरकटिया के बूथ संख्या 162 पर भाजपा समर्थकों को पिटाई की जा रही है। सांसद जब वहाँ पर पहुँचे और उन्होंने पूछताछ शुरू की तो भीड़ उग्र हो गई। फिर क्या था, कश्मीर में पत्थरबाज़ी के तर्ज पर सांसद पर हमला किया गया। आजतक ने अपने वीडियो में भी इस बात की पुष्टि की है कि लोग दीवार के पास खड़े होकर बड़े-बड़े पत्थर फेंक रहे हैं। सांसद ने कहा कि ऐसी स्थिति आ गई थी, जिसमें उनकी व उनके साथ जो हिन्दू समाज के लोग थे, उनकी हत्या की जा सकती थी।

इस हमले में सांसद बाल-बाल बचे और कई समर्थकों को चोटें आईं। कई भाजपा समर्थक घायल भी हुए। संजय जायसवाल के आरोप गंभीर हैं। उनके अनुसार, माहौल ऐसा हो गया था कि अगर उनके गार्ड ने गोली नहीं चलाई होती तो शायद उनकी हत्या भी हो सकती थी। सांसद को वहाँ काफ़ी देर तक बंधक बना कर भी रखा गया। पुलिस के पहुँचने के बाद भी जायसवाल को पीटने के लिए भीड़ उतारू थी, लेकिन उन्हें किसी तरह सुरक्षित जगह पर पहुँचाया जा सका।

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