Thursday, April 25, 2024
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महिलाधिकारों पर केरल सरकार का दोहरा रवैया; मस्जिद जा रही महिलाएँ गिरफ्तार

महिलाओं के साथ अपराधियों की तरह व्यवहार करने एवं सबरीमाला मंदिर और वावर मस्जिद को दो अलग-अलग चश्मे से देखने के लिए केरल की वामपंथी सरकार निशाने पर है।

सबरीमाला मंदिर के मामले में महिलाधिकारों की रक्षा का दावा करने वाली केरल की वामपंथी सरकार का दोहरा रवैया सामने आया है। दरअसल, बात सबरीमाला मंदिर के पास ही स्थित वावर मस्जिद का है जहाँ पुलिस ने तीन महिलाओं को अंदर जाने से सिर्फ मना ही नहीं किया, वरन गिरफ़्तार भी कर लिया। ये तीनो महिलाऍं तमिलनाडु के संगठन ‘हिन्दू मक्कल काची’ से जुड़ी हुई है। द न्यूज़ मिनट में प्रकाशित एक खबर के अनुसार ये तीनो महिलाएँ सोमवार की शाम को मस्जिद में जाकर प्रार्थना करना चाहती थी जिसके कारण पुलिस ने इन्हे पहले ही गिरफ़्तार कर लिया।

गिरफ़्तार की गई तीनो महिलाऍं तमिलनाडु की है जिनके नाम हैं- रेवती, शुशीला देवी और गांधीमत्ती। सुशीला और रेवती तिरुप्पुर से है जबकि गांधीमत्ती तिरुनेलवेली की रहने वाली है। इन तीनो ने इस सप्ताह की शुरुआत में एक प्रेस कांफ्रेंस कर वावर मस्जिद में जाने का ऐलान किया था। इन तीनो ने सवाल पूछा था कि अगर महिलाएँ सबरीमाला मंदिर में जा सकती है तो फिर वावर मस्जिद में क्यों नहीं?

इस मामले में लोगों की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएँ आई है। सोशल मीडिया पर लोगों के केरल की वामपंथी सरकार और राज्य की पुलिस के दोहरे रवैये पर सवाल उठाये। लोगों ने सबरीमाला और वावर मस्जिद पर दोहरा रवैया अपनाने के लिए केरल सरकार को आड़े हाथों लिया।

राजनीतिक विश्लेषक सोनम महाजन ने ट्वीट कर महिला अधिकार की बात करने वालों की चुप्पी पर सवाल खड़े किये। सोनम ने कहा;

“सबरीमाला मंदिर के नजदीक स्थित वावर मस्जिद में प्रवेश करने की कोशिश करने के लिए केरल पुलिस द्वारा गिरफ्तार की गई तीनो महिलाओं पर आईपीसी की धारा 153A (धर्म के आधार पर दो समुदायों में विद्वेष को बढ़ावा देना) लगा दी गई है। सबरीमाला दर्शन के दौरान अधिकतर अयप्पा भक्त इस मस्जिद में आते हैं। फेमिनिस्ट कहाँ हैं?”

ख़बरों के अनुसार पुलिस ने उन महिलाओं के साथ-साथ उनको केरल तक पहुँचाने वाले एक अन्य व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया है। यही नहीं, उन महिलाओं के ड्राइवर को भी गिरफ्तार कर लिया गया। ये करवाई स्थानीय पुलिस द्वारा की गई। अब इन सभी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जायेगा। Kozhinjambada की पुलिस ने इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए कहा;

“ये महिलाएँ सांप्रदायिक तनाव को जन्म देना चाहती थी। पुलिस को उनके पलक्कड़ पहुँचने की सूचना थी और जिले में स्थित सभी 7 चेक पोस्ट पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी थी। इस समूह को अंत में पलक्कड़ के ही वेला थावलम चेक पोस्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया।”

लेखिका शेफाली वैद्य ने भी केरल के मुख्यमंत्री को लपेटे में लिया और बराबरी की बात करने के उनके दावों को खोखला बताया।

शेफाली ने अपने ट्वीट में कहा;

अगर महिलाएँ सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करना चाहती है तो यह बराबरी के हक़ की लड़ाई है लेकिन अगर वो वावर मस्जिद में प्रवेश करना चाहती है तो यह क़ानून व्यवस्था के लिए ख़तरा है और केरल पुलिस उन्हें गिरफ़्तार कर लेती है। क्या पिनाराई विजयन ऑड-इवन फार्मूला पर काम कर रहे हैं?”

वावर मस्जिद केरल की राजधानी से 5 किलोमीटर दूर 1000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और सबरीमाला मंदिर में दर्शन करने के लिए जाने वाले श्रद्धालु अक्सर यहाँ आया करते हैं। श्रद्धालु अक्सर इस मस्जिद की परिक्रमा करते हैं और जय वावर स्वामी के नारे भी लगाते रहे हैं। दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार मुस्लिम बहुल इलाक़े में स्थित इस मस्जिद को मक्का-मदीना के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तीर्थ भी माना जाता है।

ऐसे में महिलाओं के साथ अपराधियों की तरह व्यवहार करने एवं सबरीमाला मंदिर और वावर मस्ज़िद को दो अलग-अलग चश्मे से देखने के लिए केरल की वामपंथी सरकार निशाने पर है। पहले ही केरल पुलिस हजारों की संख्या में सबरीमाला के श्रद्धालुओं को गिरफ्तार करने के लिए आलोचना का सामना कर रही है, ऊपर से वावर मस्जिद मामले ने आग में घी का काम किया है। भारतीय जनता पार्टी के सोशल मीडिया सेल के महिला विंग की राष्ट्रीय प्रभारी प्रीती गाँधी ने कहा कि केरल की सरकार अलग-अलग सम्प्रदायों के लिए अलग-अलग नियम अपना रही है।

प्रीती ने अपने ट्वीट में कहा;

“केरल के वावर मस्जिद में पुलिस ने तीन महिलाओं को गिरफ़्तार किया। ये वही राज्य है जहाँ की पुलिस ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आदेश पर सबरीमाला मंदिर में महिला अराजकतावादियों को घुसाया था और अब वही पुलिस बोल रही है कि सांप्रदायिक तनाव पैदा हो रहा था। अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग क़ानून?”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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