Homeसोशल ट्रेंडगूगल बढ़ावा दे रहा गज़वा-ए-हिन्द को: ऍप और किताब डाउनलोड के लिए उपलब्ध?, सोशल...

गूगल बढ़ावा दे रहा गज़वा-ए-हिन्द को: ऍप और किताब डाउनलोड के लिए उपलब्ध?, सोशल मीडिया पर दिखा गुस्सा

कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने भी रीट्वीट करते हुए संचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद को टैग किया। उन्होंने पूछा कि गूगल अपने प्लेटफोर्म पर कट्टरपंथ को जड़ें कैसे जमाने दे सकता है। साथ ही ऍप और किताब की लिंक भी डालते हुए इन्हें रिपोर्ट करने की अपील की।

भारतीय खिलाड़ी, स्पेशल फोर्सेज़ के रिटायर्ड सैनिक और भाजपा सदस्य मेजर सुरेंद्र पूनिया ने ट्विटर पर हैरतंगेज़ स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं। इसमें गूगल के ऍप स्टोर पर ‘गज़वा ए हिन्द’ के नाम से एक ऍप और एक किताब डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध दिखाए जा रहे हैं। इस ट्वीट में उन्होंने एनआईए, गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए उनका ध्यान दिलाया है। साथ ही अपने फॉलोवर्स से इस ऍप को गूगल को रिपोर्ट करने के लिए भी कहा है।

बता दें कि गज़वा ए हिन्द का मतलब हिंदुस्तान पर हमला और उसे दार उल इस्लाम बनाने की लड़ाई होता है। आठवीं सदी में सिंध और मुल्तान को खलीफा के लिए जीतने वाले मुहम्मद बिन खलीफा से लेकर आज पाकिस्तान और अन्य कट्टरपंथियों को भारत से दुश्मनी इसी के चलते है।

मेजर पूनिया के ट्वीट को ट्विटर पर तेज़ी से रीट्वीट भी किया जा रहा है। एक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्थक प्रशांत ने कहा कि अगर गूगल इस पर कार्रवाई न करे तो गूगल पर कार्रवाई होनी चाहिए।

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अंशुल सक्सेना ने भी रीट्वीट करते हुए संचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद को टैग किया। उन्होंने पूछा कि गूगल अपने प्लेटफोर्म पर कट्टरपंथ को जड़ें कैसे जमाने दे सकता है। साथ ही ऍप और किताब की लिंक भी डालते हुए इन्हें रिपोर्ट करने की अपील की।

कुछ सोशल मीडिया यूज़रों ने रिपोर्ट करने की प्रक्रिया भी स्टेप बाई स्टेप बतानी शुरू कर दी है। सलाह दी है कि रिपोर्ट करते समय कैटेगरी में ‘अब्यूसिव ऑर हार्मफुल कंटेंट’ रखा जाए।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

राम मनोहर लोहिया के सिद्धांतों से भटकी समाजवादी पार्टी, ‘PDA’ के नाम पर सिर्फ ‘MY’ समीकरण को तरजीह: समझिए कैसे दलितों की अनदेखी कर...

सामाजिक न्याय का दावा करने वाली सपा आज भी अपने पुराने ढर्रे पर चल रही है, जिससे उसका 'PDA' का रैपर महज एक चुनावी चुनावी हथकंडा नजर आता है।

असल बात को छुपाओ, शब्दों का हेर-फेर कर प्रोपेगेंडा फैलाओ: UP को बदनाम करने के लिए ये है NewsLaundry की ट्रिक, जानिए कैसे प्रस्तावित...

हर राज्य में सभी MoU हकीकत में नहीं बदलते। कुछ परियोजनाएँ सफल होती हैं और कुछ निरस्त होती हैं। इससे पूरे निवेश मॉडल को ही फर्जी कह देना गलत है।
- विज्ञापन -