विवादित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आज शनिवार (6 जून 2026) को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने समर्थकों से बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पहुँचकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। लेकिन यह प्रदर्शन फीका ही रहा, ना भीड़ जुटी और ना ही कोई सार्थक परिणाम दिखा।
जमीन पर यह प्रदर्शन भले की पुलिस की मुस्तैदी की वजह से शांतिपूर्ण रहा हो लेकिन पार्टी के तिलचट्टों ने सोशल मीडिया पर इसमें हिंसा के लिए उकसाने की पूरी कोशिश की थी। ऑपइंडिया को सोशल मीडिया पर CJP समर्थकों की कई ऐसी टिप्पणियाँ मिलीं, जिनमें प्रदर्शन के दौरान प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हिंसा की बात कही गई थी।
रक्तपात और हिंसा का आह्वान
CJP के प्रदर्शन में शामिल होने की अपील करने वाली कुछ रेडिट पोस्टों के जवाब में एक समर्थक ने खुले तौर पर हिंसा का समर्थन किया। उसने लिखा, “यह अभिशप्त सरकार खून-खराबे और हिंसा के बिना सत्ता से नहीं हटेगी।”

इसी रेडिट अकाउंट से की गई एक अन्य टिप्पणी में भी प्रदर्शन के दौरान हिंसा को उचित ठहराने की कोशिश की गई। टिप्पणी में लिखा गया, “सत्ता में बैठे लोग गुंडे हैं और अपने पास मौजूद हर हथकंडे का इस्तेमाल करते हैं। अगर ये गुंडे इतने ही मूर्ख हैं, तो आंदोलन का हिंसक होना तय है।”

भारत में भी नेपाल जैसा Gen Z विरोध प्रदर्शन चाहिए
एक अन्य CJP समर्थक ने हाल ही में नेपाल में हुए युवा-नेतृत्व वाले उग्र प्रदर्शनों का हवाला देते हुए वैसी ही स्थिति की इच्छा जताई। उसने कहा कि नेपाल में युवाओं ने पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज की परवाह किए बिना आंदोलन में हिस्सा लिया और भारतीय युवाओं को भी इसी तरह एकजुट होकर आगे आना चाहिए।
अपनी टिप्पणी में उसने लिखा, “नेपाल में युवाओं ने पुलिस या लाठीचार्ज की चिंता किए बिना विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। भारतीय युवाओं को भी एकता के लिए इससे अधिक मजबूत विश्वास दिखाना चाहिए।”

नेपाल को मजबूत लोकतांत्रिक परंपराओं या राजनीतिक स्थिरता के लिए नहीं जाना जाता। वहाँ बहुत कम प्रधानमंत्री ऐसे रहे हैं जो अपना पूरा कार्यकाल पूरा कर पाए हों। देश के राजनीतिक इतिहास में कई बार सरकारें जनआंदोलनों और राजनीतिक उथल-पुथल के चलते सत्ता से बेदखल हुई हैं।
इसके विपरीत, भारत दुनिया के सबसे सफल और जीवंत लोकतंत्रों में से एक माना जाता है, जहाँ सत्ता परिवर्तन हमेशा संवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनावों के माध्यम से होता रहा है। भारत में सरकारों को बदलने का अधिकार मतदाताओं के पास है और यह प्रक्रिया चुनावी व्यवस्था के जरिए संपन्न होती है।
प्रदर्शनों के दौरान की थी पागलपन भरी चीजें होने की उम्मीद
CJP के एक समर्थक ने प्रदर्शन के दौरान ‘कुछ बड़ा’ या ‘असामान्य’ होने की संभावना को लेकर उत्साह व्यक्त किया था। उसने लिखा, “मैं वहाँ जा रहा हूँ और इंस्टाग्राम को स्टोरीज से भर दूँगा, क्योंकि निश्चित रूप से कुछ पागलपन भरी चीजें होने वाली हैं।”
इस टिप्पणी से संकेत मिलता है कि समर्थक को प्रदर्शन के दौरान किसी अप्रत्याशित घटनाक्रम की उम्मीद थी। सोशल मीडिया पर सामने आए ऐसे संदेशों ने प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर और अधिक सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब पार्टी नेतृत्व लगातार आंदोलन को शांतिपूर्ण बता रहा है।

भारतीय न्यायपालिका को उखाड़ फेंकने का आह्वान
सोशल मीडिया पर की गई एक अन्य टिप्पणी में CJP के एक समर्थक ने केवल लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार ही नहीं, बल्कि भारतीय न्यायपालिका के प्रति भी असंतोष व्यक्त किया। उसने लिखा, “हमें अपनी न्यायपालिका को भी बाहर का रास्ता दिखाना होगा, क्योंकि उसने अपनी स्वतंत्रता खो दी है।”
इस तरह की टिप्पणियाँ दर्शाती हैं कि कुछ समर्थक देश की प्रमुख लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति गहरा अविश्वास व्यक्त कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसे बयान संवैधानिक संस्थाओं की वैधता पर सवाल खड़े करते हैं और सार्वजनिक विमर्श को और अधिक ध्रुवीकृत बना सकते हैं।

किसानों के विरोध-प्रदर्शन जैसी स्थिति के लिए योजना बनाना
CJP के कुछ समर्थक चाहते थे कि यह आंदोलन नवंबर 2020 में शुरू हुए किसान आंदोलन की तरह लंबा और प्रभावशाली साबित हो। सोशल मीडिया पर एक समर्थक ने दावा किया कि किसान आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और उपद्रव के लिए प्रदर्शनकारी नहीं, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए तत्व जिम्मेदार थे।
उसने लिखा, “निराशावादी नहीं बनना चाहता, लेकिन अगर सैकड़ों लोग प्रदर्शन के लिए जुटते हैं तो वे भीड़ में कुछ लोगों को सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के लिए शामिल कर देंगे और फिर पूरे आंदोलनकारियों को उपद्रवी बता देंगे। किसान आंदोलन में भी ऐसा हुआ था और इस बार भी ऐसा ही होगा।”
इस टिप्पणी में समर्थक ने पहले से ही यह तर्क देने की कोशिश की कि यदि प्रदर्शन के दौरान कोई हिंसा या कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसके लिए CJP नेतृत्व और समर्थकों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।

CJP समर्थकों की सोशल मीडिया टिप्पणियों को देखते हुए लगता है कि यह प्रदर्शन केवल सरकार के खिलाफ कथित शांतिपूर्ण विरोध तक सीमित नहीं था बल्कि इसके जरिए देश में अराजकता का माहौल पैदा करने की कोशिश की थी लेकिन सुरक्षाबलों की मुस्तैदी से यह संभव नहीं हो सका।
(मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)


