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NDTV को भी नहीं मिले कृषि कानून के विरोधी किसान; प्रदर्शनकारी ‘नकली किसान’ बोले: माँग बाद में बता देंगे

एनडीटीवी की इस मुद्दे पर रिपोर्टिंग की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इनमें वह दो अलग-अलग तरह के किसानों के पास जाकर अपने सवाल पूछ रहे हैं। एक जो वाकई किसान हैं और उन्हें नए कानून से कोई आपत्ति नहीं है। वहीं, एक वो किसान बनकर प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्हें यही नहीं मालूम कि उनकी माँग क्या है।

संसद में कृषि विधेयक पास हो जाने के बाद से विपक्ष लगातार मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर हंगामा कर रहा है। ऐसे में उनके ‘निष्पक्ष’ प्रोपेगेंडा न्यूज चैनल एनडीटीवी ने ही उनके निराधार प्रश्नों का जवाब अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग से दे दिया है।

एनडीटीवी की इस मुद्दे पर रिपोर्टिंग की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इनमें वह दो अलग-अलग तरह के किसानों के पास जाकर अपने सवाल पूछ रहे हैं। एक जो वाकई किसान हैं और उन्हें नए कानून से कोई आपत्ति नहीं है। वहीं, एक वो किसान बनकर प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्हें यही नहीं मालूम कि उनकी माँग क्या है।

सोशल मीडिया पर वायरल होती वीडियोज को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि कृषि विधेयक किसानों के लिए इतने फायदेमंद हैं कि खुद एनडीटीवी भी ऐसे किसान नहीं ढूँढ पाया जो इसका विरोध करें। इन दावों के साथ एनडीटीवी पत्रकार श्रीनिवासन की वीडियो वायरल हो रही है। श्रीनिवासन किसानों से पूछते हैं कि जो किसानों के लिए कानून लागू हुआ है, उसके कारण कुछ किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। तो क्या वह लोग भी उस कानून के विरोध में हैं?

इस पर वहाँ खड़ा किसान साफ सिर हिलाकर मना करता है और कहता है कि वह उसके विरोध में नहीं हैं। पत्रकार के आसपास खड़े लोग भी इससे मना कर देते हैं कि वह भी उस कानून के विरोध में नहीं हैं। वह कहते हैं कि इससे तो अब बिचौलिए की भूमिका खत्म हो जाएगी। मंडी तक जाने का समय बचेगा। अपनी फसल किसान कहीं भी बेच पाएगा।

बीच में एक किसान कहता है कि उनके पास प्राइवेट सेंटर हैं और वह चाहते हैं कि उनके इलाके में और भी सेंटर्स खुलें। इससे उन्हें ही फायदा होगा। वहीं अन्य किसान कहते हैं कि उनके इलाके के आस पास कई कलेक्शन सेंटर हैं जिनको सामान देने से उनकी मजदूरी भी नहीं कटती। कैश भी सीधा हाथ में मिलता है।

गौरतलब है कि उक्त बातें तो उन किसानों की है जिनके खेतों के पास जाकर एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्टिंग की। अब एक नजर उस रिपोर्टिंग पर भी डालिए, जहाँ रिपोर्टर प्रदर्शन कर रहे ‘नकली’ किसानों से उनकी माँग जानने पहुँचा। एनडीटीवी रिपोर्टर ने सवाल किया कि सरकार कह रही है यह बिल आपके हित में है? इस पर प्रदर्शनकारी प्रदर्शन की ओर इशारा करके कहता है कि हाँ अभी फैसला होगा। इसके बाद रिपोर्टर पूछता है आप किसान ही हैं न? जवाब मिलता है- हाँ। रिपोर्टर फिर पूछता है- आपकी माँग क्या है? इस पर कुछ वाजिब जवाब देने की जगह प्रदर्शनकारी कहता है कि बता देंगे बाद में।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर एनडीटीवी की इन वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि ये कॉन्ग्रेस के पेड कार्यकर्ता ‘नकली’ किसान बनकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनसे सवाल पूछो कि आपकी माँग क्या है? तो जवाब मिलता है- बता देंगे बाद में। ऐसे ही दूसरी वीडियो को लेकर राहुल गाँधी पर टिप्पणी की जा रही है और कहा जा रहा है कि बिग बास्केट, रिलायंस फ्रेश, मोर आदि के बुरे परिणाम गिनाने वाले अपने पारिवारिक चैनल की रिपोर्ट देखें जिसमें इनके लाभ किसान खुद बता रहे हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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