Friday, June 21, 2024
Homeसोशल ट्रेंडनाम लिए बिना कुमार विश्वास ने किया 'चीते-गधे की बहस' वाला ट्वीट, नेटिजन्स ने...

नाम लिए बिना कुमार विश्वास ने किया ‘चीते-गधे की बहस’ वाला ट्वीट, नेटिजन्स ने चित्रा त्रिपाठी और योगेंद्र यादव की तकरार से जोड़ा

चित्रा त्रिपाठी और योगेंद्र यादव के बीच विवाद की शुरुआत एक टीवी डिबेट से हुई थी। बाद में ट्विटर पर भी दोनों की तकरार देखने को मिली थी।

आंदोलनजीवी योगेंद्र यादव और आज तक की पत्रकार चित्रा त्रिपाठी की तकरार में अब नेटिजन्स ने कवि कुमार विश्वास की भी एंट्री करवा दी है। विश्वास का एक ट्वीट वायरल हो रहा है। इसमें उन्होंने किसी का नाम लिए बिना चीते और गधे की कहानी सुनाई है। लेकिन नेटिजन्स इस चित्रा त्रिपाठी और योगेंद्र यादव से जोड़कर देख रहे हैं।

अपने ट्वीट में कुमार विश्वास ने लिखा है, “एक बार एक चीते और गधे में घास के रंग को लेकर बहस हो गई। चीते ने कहा कि घास हरे रंग की होती है। गधा अड़ गया कि घास नीले रंग की होती है। दोनों के बीच दो दिन तक ट्वीट-ट्वीट से लड़ाई होती रही। बात राजा शेर के पास पहुँची। शेर ने भरे दरबार निर्णय दिया कि गधा ही ठीक बोल रहा है और चीता ग़लत। जब गधा विजय के ख़ुमार में ढेंचू-ढेंचू चिल्लाता हुआ वापस स्टूडियो चला गया तो रोते हुए चीते ने कहा महाराज आपने जानते-बूझते गधे को जिताकर और मुझे हराकर अपमानित क्यूँ किया ? शेर ने कहा तुम तो उसी पल हार गए थे जब तुमने शेर-वंशी चीता होकर एक गधे से बहस प्रारंभ की थी।”

कुमार विश्वास के इस इस ट्वीट में किसी व्यक्ति विशेष का जिक्र नहीं है। पर नेटीजेंस इसे चित्रा त्रिपाठी और योगेंद्र यादव की बहस से जोड़ रहे हैं। @MR_SEROTONIN_ नाम के हैंडल ने लिखा है, “क्या आपका मतलब इससे है कवि महोदय ? गधा: योगेंद्र यादव, चीता: चित्रा त्रिपाठी?”

साभार – @MR_SEROTONIN_

एक अन्य यूजर @op_shekhawat ने लिखा, “ये घटना और इसके पात्र काल्पनिक हैं। इसका योगेंद्र यादव और चित्रा त्रिपाठी से कोई लेना-देना नहीं है।”

साभार- @op_shekhawat

नितिन निक्की ने भी इसे योगेंद्र यादव और चित्रा त्रिपाठी की बहस से जोड़ा है।

साभार- @LalitPa27359411

@t97688663 हैंडल के यूजर ने चित्रा त्रिपाठी की फोटो शेयर करते हुए कहा है कि उनके सामने योगेंद्र यादव उर्फ सलीम की कोई औकात नहीं है।

साभार- @t97688663

कुछ लोगों ने कुमार विश्वास को ‘सामंती’ बताते हुए उनके इस ट्वीट पर आपत्ति जताई है।

चित्रा त्रिपाठी बनाम योगेंद्र यादव

दरअसल चित्रा त्रिपाठी और योगेंद्र यादव के बीच विवाद की शुरुआत 18 मई 2023 को आज तक के डिबेट शो ‘दंगल’ से हुई। इस शो में कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कॉन्ग्रेस को विभिन्न जातियों के वोटों को लेकर चर्चा हो रही थी। इस दौरान, चित्रा त्रिपाठी ने स्वतंत्रता के बाद देश में पहली बार हुए विधानसभा चुनावों के आँकड़ें रखते हुए कहा था कि उस चुनाव में 22 राज्यों में से 13 राज्यों के मुख्यमंत्री ब्राह्मण थे। लेकिन मंडल कमीशन लागू होने के बाद खुद को बड़ा ओबीसी नेता बताने की होड़ मची हुई है। कर्नाटक में कॉन्ग्रेस ने सिद्धारमैया को सीएम बनाते हुए भी ओबीसी कार्ड ही खेला है। साथ ही उन्होंने राहुल गाँधी द्वारा जातीय जनगणना का मुद्दा उठाने को लेकर भी योगेंद्र यादव से सवाल पूछा था। इसका जवाब देते हुए योगेंद्र यादव ने पहली बार हुए चुनावों में 12 राज्यों के मुख्यमंत्री ब्राह्मण होने की बात को पीड़ा बताया था।

बाद में जब आज तक ने इस बहस के वीडियो को ट्वीट किया तो उसे रीट्वीट करते हुए योगेंद्र यादव ने लिखा था, “मैने पूछ ही लिया कि ‘आज तक’ बार बार उस युग को क्यों याद कर रहा है जब अधिकांश मुख्यमंत्री और एक चौथाई सांसद ब्राह्मण होते थे? कहीं इसके पीछे कोई पीड़ा तो नहीं? या उस अतीत का मोह? जाहिर है सवाल मेरी ही नीयत पर उठाए गए।” इसके बाद योगेंद्र यादव और चित्रा त्रिपाठी की सोशल मीडिया में भी तकरार हुई थी।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बिहार का 65% आरक्षण खारिज लेकिन तमिलनाडु में 69% जारी: इस दक्षिणी राज्य में क्यों नहीं लागू होता सुप्रीम कोर्ट का 50% वाला फैसला

जहाँ बिहार के 65% आरक्षण को कोर्ट ने समाप्त कर दिया है, वहीं तमिलनाडु में पिछले तीन दशकों से लगातार 69% आरक्षण दिया जा रहा है।

हज के लिए सऊदी अरब गए 90+ भारतीयों की मौत, अब तक 1000+ लोगों की भीषण गर्मी ले चुकी है जान: मिस्र के सबसे...

मृतकों में ऐसे लोगों की संख्या अधिक है, जिन्होंने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था। इस साल मृतकों की संख्या बढ़कर 1081 तक पहुँच चुकी है, जो अभी बढ़ सकती है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -