DU में लगी सावरकर-बोस-भगत सिंह की प्रतिमा, प्रपंची लिबरल्स के आँसुओं से यमुना में बाढ़

DUSU अध्यक्ष शक्ति सिंह का कहना है कि डीयू कैंपस में एक तहखाना है, जहाँ भगत सिंह को ट्रायल के दौरान रखा गया था। छात्रों ने माँग की थी कि या तो भगत सिंह की प्रतिमा लगाई जाए या तहखाने को सार्वजनिक किया जाए, लेकिन डीयू प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

देश में एक ऐसा वर्ग है जो राष्ट्रवाद और भारतीय इतिहास से जुड़ी हर दूसरी गतिविधि पर प्रलाप और प्रपंच का सिलसिला शुरू कर देता है। इस बार लिबरल्स के प्रलाप का विषय है दिल्ली यूनिवर्सिटी में भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और वीर सावरकर की मूर्ती की स्थापना। दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव से पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने नॉर्थ कैंपस स्थित आर्ट फैकल्टी के गेट पर बिना इजाजत वीर सावरकर, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह की प्रतिमा लगा दी।

इस प्रकरण के बाद सोशल मीडिया पर लिबरल्स का एक वर्ग तुरंत सक्रीय हो गया और उन्होंने भगत सिंह, बोस और वीर सावरकर की इस प्रतिमा का विरोध करना शुरू कर दिया। इस प्रपंच में कॉन्ग्रेस पार्टी भी शामिल थी और इन सबका मकसद था सिर्फ ट्विटर पर #gaddarsavarkar हैशटैग ट्रेंड कराया जाए।

यह कॉन्ग्रेस का दुर्भाग्य ही हो सकता है कि एक ओर जहाँ कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सर से पाँव तक घोटालों में पकड़े जा रहे हैं वहीं उनकी पार्टी का एकमात्र लक्ष्य आज सिर्फ सोशल मीडिया पर हैशटैग ट्रेंड करवाने तक सीमित हो चुका है। शायद अब कॉन्ग्रेस इन्हीं छोटी-छोटी खुशियों में अपना मनोबल तलाशने लगी है। स्वतन्त्रता संग्राम के जिन नायकों पर देश हमेशा गौरवान्वित रहा है, कॉन्ग्रेस अक्सर उनका अपमान करती आई है। और यह विरोध भी उसी का एक उदाहरण है।

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इसी क्रम में मीडिया का एक ख़ास लिबरल वर्ग भी इस प्रतिमा के विरोध में कॉन्ग्रेस के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता रहा।

हालाँकि ट्विटर पर ही एक वर्ग ऐसा भी मौजूद है जो प्रपंची लिबरल्स के दुःख पर तथ्यों से मरहम भी लगाते देखे गए।

एबीवीपी नेतृत्व वाले छात्रसंघ के अध्यक्ष शक्ति सिंह का कहना है कि उन्होंने कई बार यूनिवर्सिटी प्रशासन से प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति माँगने के लिए संपर्क किया लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं आया। और उनकी चुप्पी की वजह से ही छात्रों ने यह कदम उठाया है।

DUSU अध्यक्ष शक्ति सिंह का कहना है कि डीयू कैंपस में एक तहखाना है, जहाँ भगत सिंह को ट्रायल के दौरान रखा गया था। छात्रों ने माँग की थी कि या तो भगत सिंह की प्रतिमा लगाई जाए या तहखाने को सार्वजनिक किया जाए, लेकिन डीयू प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

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