Homeसोशल ट्रेंड'बिहार में ई बा' के बाद मैथिली ठाकुर ने पूछा- किसकी सरकार?

‘बिहार में ई बा’ के बाद मैथिली ठाकुर ने पूछा- किसकी सरकार?

मैथिली ठाकुर का ‘बिहार में ई बा’ गा देना तो सीधे सीधे बिहार के कुछ स्थापित नामों के धंधे पर चोट था! ये वो लोग थे जिन्होंने बिहार की पृष्ठभूमि को अपहरण, रंगदारी, गुंडागर्दी और तमाम तरह के सामाजिक अपराधों तक समेटकर रख दिया था।

बिहार चुनावों की शरुआत से ही राजनेताओं और बाहुबलियों की चर्चा के साथ एक नाम मैथिली ठाकुर (Maithili Thakur) का भी सामने आया था। दरअसल, मैथिली ठाकुर ने एक गाने ‘बिहार मा का बा’ (Bihar me ka ba) के जवाब में बताया था कि ‘बिहार में ई बा’ (Bihar mein ee baa) और ये गाना सबकी जुबान पर चढ़ गया था।

बिहार में आज मंगलवार (नवम्बर 10, 2020) को बिहार चुनावों के नतीजे आ गए हैं और मैथिली ठाकुर ने अपनी एक तस्वीर ट्वीट करते हुए इस बार खुद सवाल किया है। मैथिली ने ट्वीट में लिखा है – “किसकी सरकार?”

इस तस्वीर में मैथिली ठाकुर के पीछे जो पोस्टर नजर आ रहा है उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, और नीतीश कुमार नजर आ रहे हैं। हालाँकि, उनके अलावा पोस्टर में दो और शख्सियत राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव भी मौजूद हैं लेकिन मैथिली ठाकुर का इशारा साफ़ नजर आ रहा है।

आखिरकार बिहार के चुनाव परिणामों से लगभग स्पष्ट हो चुका है कि बिहार की जनता ने राजद और महागठबंधन को नकार कर NDA को अपना समर्थन देकर सत्ता सौंप दी है। जिसका अर्थ है कि NDA ही बिहार में सरकार बनाने जा रही है।

रुझानों में एनडीए के पास 120 से ज्यादा सीटें दिख रही हैं, वहीं राजद को करीब 110 सीटें मिलती दिख रही हैं। अन्य को भी 10 के करीब सीटें मिलती दिख रही हैं। हालाँकि, फिलहाल दोनों ही मुख्य दल अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हैं।

कुछ लोगों को रास नहीं आया था मैथिली ठाकुर का जवाब

मैथिली ठाकुर का ‘बिहार में ई बा’ गा देना तो सीधे सीधे बिहार के कुछ स्थापित नामों के धंधे पर चोट था! ये वो लोग थे जिन्होंने बिहार की पृष्ठभूमि को अपहरण, रंगदारी, गुंडागर्दी और तमाम तरह के सामाजिक अपराधों तक समेटकर रख दिया था।

पेट पर कोई लात मार दे और वो बिलबिलाएँ भी नहीं, ऐसा कैसे हो सकता था? मैथिली का गाना उनके ‘विकास’ की राह में रोड़ा बन गया। उन्हें राज्य के विकास से कोई लेना देना नहीं, उनके निजी स्वार्थों से इस गीत के बोल टकराते हैं। ये विवाद गीत पर नहीं हुआ, ये निजी स्वार्थ के सामाजिक हितों से टकराव का शोर था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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