Sunday, April 21, 2024
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370 का ‘पावर’ ख़त्म: लिबरल ‘महाभारत’ देख लिए तो अब Twitter पर पाकिस्तानियों की हालत देखिए…

कैप्टन मिर्जा नाम के यूजर ने तो सोशल मीडिया पर अपील की कि उन्हें अब भारतीय प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और एक यूजर ने तो इमरान खान को टैग करते हुए 'कुछ' करने को कहा है। साथ ही कहा है कि अभी पता चलेगा कि इमरान खान रियल हैं या नहीं।

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 के प्रावधान को आज खत्म कर दिया गया। मोदी सरकार के इस फैसले ने जहाँ विपक्ष को बेचैन किया वहीं पाकिस्तान में भी उथल-पुथल मच गई। राजनेताओं से लेकर पाकिस्तान के कलाकार और आम जनता भी इस विषय पर अपना मत रख रहे हैं। इस खबर को पाकिस्तानी मीडिया अपनी हेडलाइनों में ब्रेकिंग बनाकर चला रहा है और जानकारी के मुताबिक वे इस फैसले को गैर-कानूनी और अवैध तक बता रहे हैं।

फैसला आने के बाद पाकिस्तान मीडिया की कवरेज:

डॉन की हेडलाइन– “भारत ने संसद में भारी विरोध के बीच कश्मीर का ख़ास दर्जा ख़त्म करने के लिए प्रस्ताव पेश किया।”

The Dawn का स्क्रीनशॉट औऱ उसमें कश्मीर मुद्दा

द नेशन की हेडलाइन– “भारत सरकार ने अपने संविधान से अनुच्छेद 370 ख़त्म करने का ऐलान किया”
पाकिस्तान टुडे– “अमित शाह के ऐलान के बाद जम्मू-कश्मीर में तनाव फैल गया है।”
द न्यूज़– “पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भारत के ‘अवैध’ कदम की निंदा करता है”

गौरतलब है इस प्रकार की मीडिया हेडलाइनों के साथ सोशल मीडिया पर अब भी कुछ पाकिस्तानी ‘कश्मीर हमारा है’ का नारा लगा रहे हैं तो वहीं कुछ ऐसे भी है जो इसके लिए पाकिस्तान प्रधानमंत्री से गुहार लगा रहे हैं।

पाकिस्तानी राजनेता,पत्रकार और कलाकारों के कश्मीर मामले पर रिएक्शन

इस मामले पर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने #KashmirBleeds के साथ ट्वीट किया है, वे लिखते हैं, “भारतीय कश्मीर में लोगों पर लगातार अत्याचार हो रहा है। अतिवादी भारतीय सरकार के इरादे साफ़ हैं। कश्मीर में भारत की आक्रामकता के मद्देनज़र राष्ट्रपति को संसद का संयुक्त सत्र तुरंत बुलाना चाहिए।”

वहीं बॉलीवुड से अपनी पहचान बनाने वाली पाकिस्तानी अदाकारा माहिरा खान इस मामले पर लिखती हैं, “क्या हमने पूरी तरह उन चीज़ों को भुला दिया है जिनके बारे में हम बात नहीं करना चाहते हैं? लेकिन ये सिर्फ़ रेत पर खिंची लकीरें नहीं है, ये मासूम लोगों के मारे जाने का सवाल है। जन्नत (कश्मीर) जल रही है और हम ख़ामोशी से रो रहे हैं। “

पाकिस्तान के जाने-माने पत्रकार हामिद मिर भी इस फैसले के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त राष्ट्र को टैग करते हुए बताते हैं कि भारत सरकार ने अपने संविधान से अनुच्छेद 370 हटाने की कोशिश करके एक जंग छेड़ दी है।

पाकिस्तानी मीडिया न्यूज़ स्रोतों की मानें तो भारत में लिए गए इस बड़े फैसले के बाद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में जाने पर विचार कर सकता है। ‘द न्यूज’ अखबार के मुताबिक उनके मुल्क ने कश्मीर मुद्दे पर हमेशा सक्रिय पक्ष रखा है, इसलिए वे इसपर खामोशी नहीं बरत सकते।

पाकिस्तानी आवाम के ट्विटर पर रिएक्शन

इस समय पाकिस्तान की आवाम भी सोशल मीडिया पर जमकर अपना गुस्सा और भड़ास निकाल रही है। आमरा मेहदी नाम की पाकिस्तानी महिला ट्विटर पर लिखती हैं, “जिन्ना साहब माफी, पाकिस्तान के हमारे कथित प्रतिनिधि एक-दूसरे से लड़ाई करने और अपनी संपत्ति बढ़ाने में ही व्यस्त रह गए। आपका कश्मीर चला गया।”

जबकि नवीद नाम के दूसरे यूजर की मानें तो अब कश्मीर में हर शख्स अत्याचारी भारत के ख़िालफ़ उठ खड़ा होगा। यह कश्मीर की आजादी की शुरुआत भर है।

वकास अहमद कहते हैं कि मुस्लिम दुनिया को पंथ से ऊपर उठते हुए एक होना चाहिए और भारत पर कश्मीर में नरसंहार करने से रोकने के लिए दबाव बनाना चाहिए।

एक यूजर ने तो संयुक्त राष्ट्र पर सवाल उठाते हुए कहा, “मुस्लिम देशों के मंच ओआईसी और यूएन(संयुक्त राष्ट्र) जिस उद्देश्य से अस्तित्व में आए, वे कभी पूरे नहीं हुए।” इस यूजर के मुताबिर संयुक्त राष्ट्र अपना वादा नहीं निभा पाया। कश्मीर मुद्दे के न सुलझने के पीछे इस यूजर ने यूएन की नाकामी बताया और कहा अब उसे यूएन से कोई उम्मीद नहीं है।

कैप्टन मिर्जा नाम के यूजर ने तो सोशल मीडिया पर गुहार लगाई है कि उन्हें अब भारतीय प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और एक यूजर ने तो इमरान खान को टैग करते हुए ‘कुछ’ करने को कहा है। साथ ही कहा है कि अभी पता चलेगा कि इमरान खान रियल हैं या नहीं।

वहीं, उर्वा लिखती हैं, संयुक्त राष्ट्र अस्तित्व में ही क्यों है? कश्मीर विवादित मुद्दा रहा है और हाल ही में ट्रंप ने भी इसके बारे में बात की थी, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और ओआईसी को क्या हो गया है?

एक यूजर लिखते हैं कि अगर यूएन पाकिस्तान की समस्या नहीं सुलझा सकता तो पाकिस्तान को यूएन छोड़ देना चाहिए।

बता दें ऊपर लगाए गए सभी ट्वीट और 370 अनुच्छेद हटने के बाद आए रिएक्शन इस बात का सबूत है कि जिस अनुच्छेद के अस्त्तिव में होने से कश्मीर का विकास रुका हुआ था, उसके समर्थक भारत से लेकर पाकिस्तान में बैठे हुए थे। अब चूँकि केंद्र सरकार ने इस समस्या का निवारण कर दिया है तो उन सभी लोगों का दर्द छलक रहा है जो कश्मीर को पत्थरबाजों का कश्मीर बने रहने देना चाहते थे, जो चाहते थे कि कश्मीरी पंडितो को कभी न्याय न मिले। जिनका उद्देश्य था कि कश्मीर के नाम पर और भी लड़ाईयाँ सालों साल तक चलती रहें।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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