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अफगानिस्तान

अफगानिस्तान में अपहृत सिख को छुड़ाया गया, अब CAA के माध्यम से मिल सकती है भारतीय नागरिकता

सरकार ने इशारा किया है कि निधान सिंह सचेदवा भारतीय नागरिकता के लिए CAA के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। उनकी पत्नी ने पीएम मोदी से...

बच्चे के लिए 7 साल 9 महीने का इंतजार, आतंकियों ने 4 घंटे में छीनी जिंदगी: काबुल हमले से जैनब की गोद सूनी

काबुल में अस्पताल पर हुए आतंकी हमले ने जैनब की गोद फिर से सूनी कर दी है। गोद भरने के लिए उसने करीब सात साल इंतजार किया...

रमजान के महीने में 1 दिन में 2 बड़े आतंकी हमले: 2 नवजात समेत 40 लोगों की मौत, 60 घायल, ISIS ने ली जिम्मेदारी

आतंरिक मंत्रालय के प्रवक्ता तारिक आर्यन ने ISIS द्वारा किए गए इन हमलों की निंदा करते हुए पूरी घटना को मानवता और अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया है।

जैश-ए-मोहम्मद ने 400 आतंकियों को कश्मीर घाटी पर हमले के लिए पाक की मदद से अफगान कैंप में किया प्रशिक्षित

"पूर्वी अफगानिस्तान में खोस्त से जलालाबाद के बीच और कंधार प्रांत में पाकिस्तान की सीमा से सटे इलाकों में भी जैश कैडर को तालिबान इकाइयों के....."

अफगानिस्तान: राष्ट्रपति भवन के 20 कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव, दहशत न फैले इसलिए दबाई जा रही खबर

बताया जा रहा कि एक सरकारी महकमे से राष्ट्रपति भवन संक्रमित फाइल पहुॅंची। इसी फाइल के संपर्क में आने से कर्मचारी संक्रमित हुए।

97000 सिखों और हिंदुओं का सफाया… वो भी सिर्फ 29 साल में! आतंकी हमले आम, मानवाधिकार बेमानी है अफगानिस्तान में

अमेरिका के स्टेट्स डिपार्टमेंट और मीडिया के अनुसार 1990 में वहाँ 1 लाख हिन्दू और सिख आबादी थी, जोकि अब 3000 के आसपास है। यह समझना कोई कठिन काम नहीं है कि उन 97,000 हिन्दुओं और सिखों के साथ क्या हश्र हुआ होगा।

27 सिखों का हत्यारा ISIS आतंकी भारत का, कश्मीरी मुस्लिमों का बदला लेने के लिए गुरुद्वारे पर हमला

खुफिया सूत्रों ने बताया है कि आतंकियों के निशाने पर काबुल स्थित भारतीय दूतावास था। लेकिन, वहॉं सुरक्षा बेहद सख्त होने के कारण वे अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाए और गुरुद्वारे पर हमला कर दिया।

मेरी 3 साल की बेटी के सिर में गोली मारी, वो बार-बार बोल रही थी- डैडी मुझे बचा लो…

एक बच्ची जो 10 दिन बाद अपना चौथा जन्मदिन मनाने वाली थी, उसे भी आतंकियों ने मौत के घाट उतार दिया। उस पिता पर क्या गुजरी होगी जिसके ऊपर उसकी नन्ही बेटी का ​शव आकर गिरा होगा।

क्या अफगान-तालिबान शांतिवार्ता की घुटन का परिणाम है ISIS द्वारा गुरूद्वारे पर हमला, भारत में लिबरल-वामपंथी गिरोह की चुप्पी के मायने?

कल गुरूद्वारे पर हमले के बाद पूरा अफगानिस्तान अपने सिख-हिन्दू भाइयों के लिए उमड़ पड़ा और अपनी सहानुभूति व्यक्त कर उसके साथ खड़े होने की दृढ़ता दिखाई। इस हमले पर अभी तक तालिबान की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस्लामिक स्टेट ने इसकी जिम्मेदारी लेकर एक बार फिर अपना घिनौना चेहरा दुनिया के सामने रख दिया। इधर भारत में लिबरल-वामपंथी गिरोह इसको लेकर चुप्पी साधे हुए है। जैसे उसने सुकमा में नक्सली हमले के वक्त साधा था।

‘इनका कसूर सिर्फ इतना है कि ये सिख हैं, ये उस मजहब के नहीं जिससे आतंकी आते हैं’

"भारत में कुछ लोग इनके प्रवेश का विरोध करते हैं। इन्हें नागरिकता देने की बात पर राजनीति साधते हैं। वे चाहते हैं कि आतंकियों को भी नागरिकता दी जाए ताकि वे यहाँ उनका पालन कर सकें और हत्याएँ जारी रख सकें।"

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