कुंभ 1954 के दूसरे शाही स्नान (मौनी अमावस्या) में खुद नेहरू के शामिल होने के फैसले ने प्रयाग में लाशों के ढेर लगा दिए। भगदड़ में करीब 1000 लोगों की जान गई।
बिरेन सिंह ने बताया कि 1992-97 के बीच मणिपुर में 1600 से अधिक लोग मारे गए थे। उन्होंने पूछा कि तब प्रधानमंत्री रहे नरसिम्हा राव या आइके गुजराल क्यों नहीं मणिपुर पहुँचे थे।
कॉन्ग्रेस पार्टी के भीतर उन नेताओं को अनदेखा किया जाता है जिन्होंने संगठन और देश के लिए अपना अहम योगदान दिया, लेकिन गाँधी परिवार के वफादार नहीं माने गए।