विषय: जेएनयू

रोमिला थापर

रोमिला थापर जी, सीवी न सही सुरख़ाब के जो पर लगे हैं आप पर वही दिखा दीजिए हमें…

आखिर रोमिला थापर से सीवी क्यों न माँगी जाए? इसे ऐसे क्यों दिखाया जा रहा है कि विश्वविद्यालय ने रोमिला थापर के ऊपर कोई परमाणु हथियार डेटोनेट कर दिया है? लिबरपंथी और वामपंथी क्षुब्ध क्यों हैं? एक कागज का टुकड़ा माँगने पर इसे अपने सम्मान पर लेने जैसी कौन सी बात हो गई?
रोमिला थापर

JNU की रोमिला थापर से CV माँग कर गुनाह किया है इस क्रूर, घमंडी, तानाशाही सरकार ने

जहाँ कुछ ही दिन पहले प्रधानमंत्री से डिग्री दिखाओ जी कहा जा रहा था, वहाँ एक रिटायर हो चुके प्रोफेसर से, सीवी माँगना गलत क्यों है? अगर वो कहें कि ये ऐसी जगह है जहाँ डिग्री की जरूरत ही नहीं होती, तो ये भी पूछिएगा कि प्रधानमंत्री होने के लिए कौन सी शैक्षणिक योग्यताएँ जरूरी हैं?
रोमिला थापर, जेएनयू

मैं अपना सीवी नहीं दूँगी: रोमिला थापर ने JNU के नियम-क़ायदों को मानने से किया इनकार

रोमिला थापर ने कहा कि उनको मिली मान्यता जीवन भर के लिए है और जेएनयू उनकी सीवी माँग कर मूल्यों का उल्लंघन कर रहा है। फिलहाल उनका जेएनयू के साथ अपना सीवी साझा करने का कोई इरादा नहीं है।
रोमिला थापर, जेएनयू

FACT CHECK: रोमिला थापर को जानबूझ कर परेशान कर रहा है JNU? वामपंथियों के अफवाह का सच

क्या रोमिला थापर जेएनयू जैसे बड़े संस्थानों के नियम-क़ायदों से ऊपर हैं? क्या वह किसी संस्था में उसके नियम-क़ानून का पालन किए बिना बने रहना चाहती हैं। आख़िर उनके के पास ऐसा क्या है कि जेएनयू उनके कहे अनुसार अपना काम करे?
रोमिला थापर

प्रोफेसर बने रहना है तो योग्यता साबित करनी होगी, CV दिखाइए: JNU का रोमिला थापर को नोटिस

JNU प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद से कई प्रोफेसर झटके में हैं। उनका कहना है कि प्रोफेसर एमेरिटस को पहले कभी भी CV जमा कर अपनी योग्यता साबित नहीं करनी पड़ी है। एक बार जो इस पद पर काबिज़ हो गया, वह अमूमन जीवन-भर बना रहता है। खुद प्रोफेसर थापर 1993 से यानी 26 वर्षों से इस पद पर कायम हैं।
हंसराज हंस

हमारे बुजुर्गों ने गलतियॉं की भुगत हम रहे, JNU का नाम बदल कर MNU कर दो: हंसराज हंस

जेएनयू का नाम बदलने का सुझाव पहली बार नहीं आया है। इससे पहले 2016 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा था कि जेएनयू ऐसे लोगों का अड्डा बनती जा रही है जो देश के खिलाफ साजिश में शामिल है। उन्होंने इसका नाम बदल कर सुभाष चन्द्र बोस यूनिवर्सिटी रखने की मॉंग की थी।
आज़ादी माँगता डरपोक वामपंथी

वामपंथी फट्टू तो होते थे, लेकिन JNU वालों ने कल रात नई मिसाल पेश की है

JNU में तो दो बार से सारे वामपंथियों के नितम्ब चिपक कर एक होने के बाद ही चुनाव जीते जा रहे हैं, इस साल कितने चिपकेंगे ये देखने की बात है। घर में कॉफी पीने वाला लेनिनवंशी पब्लिक में लाल चाय पीने लगता है और छत पर मार्लबोरो फूँकता माओनंदन कॉलेज के स्टाफ क्लब में बीड़ी पीता दिखता है।
JNU

Video: ‘हिन्दुस्तान तो फासिस्ट है, ये हमारे लिए लानत है’ – JNU में फिर शुरू हुआ ‘आजादी गैंग’ का खेल

"आप लोग डरिए मत, ये हम कह रहे हैं... ये जुल्म कश्मीरी बर्दाश्त नहीं करेगा। हिन्दुस्तान तो फासिस्ट है... ये हमारे लिए एक लानत है और मैं इस लानत को स्वीकार नहीं करूँगा।"
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय

Article 370 पर JNU में बगावत: भीड़ ने सेना को दी गालियाँ, खुद को हिंदुस्तानी मानने से किया इनकार

जेएनयू में आर्टिकल 370 पर सरकार के फैसले के ख़िलाफ़ 'आजादी-आजादी' के नारों की गूँज सुनाई दी। भीड़ ने रात के अँधेरे में यहाँ जमकर नारेबाजी की और अनुच्छेद 370 को वापस लेने की माँग की। इन लोगों ने सेना को लेकर भी काफ़ी अपशब्द बोले।
शेहला रशीद

शेहला के बैग में कंडोम की अफवाह फैलाने पर चौकीदार नीतीश कुमार समेत 16 पर FIR

अप्रैल में शेहला रशीद का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें शेहला कह रही थीं कि हिंदू हो या मुसलमान, सारे अमीर व्यक्ति शाम को होटल में बैठकर एक साथ बीफ खाते हैं और दारू पीते हैं। इसके बाद वह कई लोगों के निशाने पर आ गई थीं।
JNU में रैगिंग

JNU: पहले पूछा ‘बिहारी हो?’ हाँ कहते ही मारे थप्पड़, उठक-बैठक लगवाई

"तुम बिहारी हो?" हाँ में जवाब देते ही वह गाली देने लगा। आरोपित ने रवि राज से कहा- "यह दिल्ली है, सलीके से रहा करो।" इसके बाद विजय ने रवि राज को फिर दाे थप्पड़ मारे, कान पकड़ उठक-बैठक लगवाने के बाद यह हिदायत भी दी कि आगे कभी भी मिलो तो नाक रगड़कर प्रणाम करना।
गार्ड रामजल मीणा

5 साल से JNU में बतौर गार्ड तैनात रामजल मीणा ने निकाला एंट्रेंस एग्जाम, पढ़ेंगे रशियन

मीणा अभी मुनिरका में किराए पर रहते हैं। वो शादीशुदा हैं और उनकी 3 बेटियाँ भी हैं। मीणा मानते हैं कि परिवार की वित्तीय ज़रूरतों को पूरा करने में वह ख़ासे व्यस्त रहे लेकिन उनके मन में कहीं न कहीं नियमित शिक्षा के लिए किसी कॉलेज में एडमिशन न ले पाने का दुःख ज़रूर था। उन्होंने जब जेएनयू के शैक्षिक वातावरण को देखा, तब उनकी यह इच्छा फिर से जाग उठी। वह अपनी ड्यूटी के दौरान व उसके बाद प्रवेश परीक्षा की तैयारी करते थे।

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